आंगनबाड़ी बैठक में गूंजा संकल्प: बच्चों के भविष्य को संवारने में पिता की सहभागिता जरूरी
क्या आप जानते हैं कि बच्चे के भविष्य को संवारने में पिता की मौजूदगी का क्या महत्व है? राजस्थान के आंगनबाड़ी केंद्रों पर हुई विशेष बैठक में पिता की सहभागिता और पोषण पर दिया गया जोर। जानिए बच्चों के सर्वांगीण विकास से जुड़ी नई सरकारी पहल।

जयपुर, 15 जून 2026। बच्चों के सर्वांगीण विकास में अब पिता की सक्रिय भागीदारी को अनिवार्य बनाने की पहल शुरू हो गई है। इसी क्रम में सोमवार को महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा प्रदेशभर के आंगनबाड़ी केंद्रों पर अभिभावक-आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बैठक (PAM) का आयोजन किया गया, जिसका मुख्य केंद्र बिंदु "पोषण, संतुलित आहार एवं स्वास्थ्य" के साथ-साथ "बच्चे के जीवन में पिता की भूमिका" रहा। इस बैठक का उद्देश्य परिवार के पुरुष सदस्यों को बच्चों के लालन-पालन में एक सक्रिय भागीदार के रूप में स्थापित करना है।
महिला एवं बाल विकास विभाग की शासन सचिव श्रीमती पूनम ने बच्चों के समग्र विकास में पिता की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन और साथ से ही बच्चों में आत्मविश्वास एवं भावनात्मक सुरक्षा का संचार होता है। विभाग की ओर से इस बार की बैठकों में विशेष रूप से पिता, दादा, चाचा और परिवार के अन्य पुरुष अभिभावकों को शामिल करने पर जोर दिया गया, ताकि वे बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए अपने दायित्वों को समझ सकें।
आईसीडीएस निदेशक श्री वासुदेव मालावत ने इस पहल पर विस्तृत चर्चा करते हुए बताया कि शोध यह साबित करते हैं कि जिन बच्चों को पिता का पर्याप्त समय मिलता है, उनका बौद्धिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास बेहतर होता है। बैठक में अभिभावकों को यह संदेश दिया गया कि पिता का हाथ थामकर चलना बच्चे को दुनिया की ताकत देता है। इस अवसर पर बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य जांच और वृद्धि निगरानी के महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही, तीन से छह वर्ष की आयु के बच्चों के लिए एपीएआर आईडी (APAR ID), आभा आईडी (ABHA ID) बनवाने और आधार नामांकन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने अभिभावकों के साथ शाला पूर्व शिक्षा और पोषण संबंधी व्यवहार में बदलाव लाने के लिए कार्ययोजना पर संवाद किया। विभाग ने सभी महिला पर्यवेक्षकों को निर्देशित किया है कि इस महत्वपूर्ण बैठक की ऑनलाइन रिपोर्टिंग 18 जून 2026 तक अनिवार्य रूप से पूरी कर ली जाए ताकि इस कार्यक्रम के प्रभाव का सटीक मूल्यांकन किया जा सके। यह पहल परिवार और समुदाय को बच्चों के भविष्य के प्रति एकजुट करने की एक सशक्त कड़ी सिद्ध हो रही है।

