जयपुर। राजस्थान की कृषि धरा पर अब आधुनिक विज्ञान और परंपरागत जैविक पद्धति के संगम से समृद्धि की नई इबारत लिखी जाएगी। जयपुर के दुर्गापुरा स्थित राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान (RARI) के प्रांगण में शुक्रवार को आयोजित जिला स्तरीय कृषक संवाद कार्यक्रम में उम्मीदों की एक नई किरण दिखाई दी। राज्य किसान आयोग के अध्यक्ष श्री सीआर चौधरी ने इस भव्य आयोजन की अध्यक्षता करते हुए किसानों का आह्वान किया कि वे केवल खेती न करें, बल्कि कृषि वैज्ञानिकों द्वारा विकसित नवीनतम तकनीकों को आत्मसात कर अपनी उपज और आय में क्रांतिकारी वृद्धि करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब समय आ गया है जब अन्नदाता रसायनों के जाल से निकलकर जैविक खेती और जल संरक्षण की राह को मजबूती से थामे।

संवाद के दौरान एक संजीदा संरक्षक की भूमिका निभाते हुए श्री चौधरी ने कहा कि राज्य किसान आयोग सरकार और किसानों के बीच एक अभेद्य सेतु के रूप में कार्य कर रहा है। उन्होंने जयपुर जिले के कोने-कोने से आए किसानों की समस्याओं को न केवल सुना, बल्कि उनके सुझावों को शासन की नीतियों का हिस्सा बनाने का भरोसा भी दिलाया। अध्यक्ष ने इस बात पर विशेष बल दिया कि किसान अपने सुझाव लिखित रूप में भी दें, ताकि उन्हें राज्य और केंद्र सरकार तक प्रभावी ढंग से पहुँचाया जा सके। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले दशक में कृषि क्षेत्र में हुए अभूतपूर्व सुधारों का उल्लेख करते हुए विश्वास दिलाया कि केंद्रीय योजनाओं के लक्ष्यों और अनुदान राशि में वृद्धि के प्रस्ताव जल्द ही भारत सरकार को भेजे जाएंगे।

इस वैचारिक मंथन में पानी, बिजली, कृषि आदान, मार्केटिंग और प्रसंस्करण जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर गहन चर्चा हुई। इसी क्रम में कृषि (विस्तार) खंड जयपुर के अतिरिक्त निदेशक श्री ईश्वर लाल यादव ने जल की एक-एक बूंद की महत्ता को प्रतिपादित किया। उन्होंने कृषकों को फार्म पोण्ड और पाइप लाइन जैसी योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रेरित करते हुए जल संरक्षण को भविष्य की खेती का आधार बताया। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने चेताया कि अत्यधिक उर्वरकों और कीटनाशकों का प्रयोग मिट्टी की उर्वरता को निगल रहा है, जिसका एकमात्र समाधान जैविक और प्राकृतिक खेती है।

समारोह की गरिमा को बढ़ाते हुए राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. हरफूल सिंह, एसकेएन कृषि विश्वविद्यालय जोबनेर के प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. आर एन शर्मा, अतिरिक्त निदेशक कृषि अनुसंधान श्री अजय कुमार पचोरी, उप सचिव डॉ. नीता और संयुक्त निदेशक कृषि-जयपुर श्री कैलाश चन्द मीणा सहित कई प्रशासनिक अधिकारी और विषय विशेषज्ञ मौजूद रहे। अधिकारियों की इस भारी मौजूदगी और किसानों के उत्साह ने यह साफ कर दिया कि प्रदेश में कृषि विकास के लिए प्रशासन और काश्तकार अब एक ही धरातल पर खड़े हैं। यह संवाद कार्यक्रम महज एक सरकारी औपचारिकता नहीं, बल्कि राजस्थान के कृषि परिदृश्य को आधुनिक, सुरक्षित और अधिक लाभदायक बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित होने वाला है।

Pratahkal Bureau

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