वीकेंड के बाद भी सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला–2025 में बरकरार रही धूम, महिला उद्यमिता और स्वदेशी उत्पादों ने आकर्षित किया जनसैलाब
सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला–2025 में वीकेंड के बाद भी दर्शकों की भीड़ रही। मेला महिला उद्यमिता, स्वदेशी उत्पाद और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आकर्षक मंच बना। राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद की कार्यशालाओं ने स्थानीय महिलाओं को बाजार के अनुसार उत्पाद विकसित करने का व्यावहारिक अनुभव दिया।

जयपुर, 22 दिसंबर। सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला–2025 का उत्साह वीकेंड के बाद भी उतना ही प्रबल देखने को मिला। सोमवार को सामान्य कार्यदिवस होने के बावजूद मेला परिसर में भारी भीड़ रही, जो दर्शाती है कि शिल्प, हस्तकला और स्वदेशी उत्पादों के प्रति लोगों की रुचि दिन-ब-दिन बढ़ रही है।
मेला परिसर में परिवार सहित आए दर्शकों ने विभिन्न राज्यों से आए शिल्पकारों के कलात्मक उत्पादों की सराहना की और स्थानीय स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) महिलाओं के उत्पादों की खरीदारी में सक्रिय भागीदारी दिखाई। टाइनी टॉट्स इंग्लिश स्कूल के स्कूली बच्चों ने भी मेले का भ्रमण किया, जहां उन्होंने महिला उद्यमिता, ग्रामीण आजीविका और स्वदेशी उत्पादों को नज़दीक से समझा। यह उनके लिए आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा से जुड़ने का एक महत्वपूर्ण शैक्षिक अनुभव साबित हुआ।
महिला उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजीविका) ने कमला पोद्दार ग्रुप के सहयोग से विशेष उत्पाद संवर्धन कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला में एसएचजी महिलाओं को डिज़ाइन नवाचार, उत्पाद की गुणवत्ता सुधार और बाजार की मांग के अनुरूप उत्पाद विकसित करने संबंधी व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान किया गया। विशेष रूप से जूट उत्पादों पर आधुनिक प्रिंट, पेंटिंग तकनीकों और पारंपरिक कला के समकालीन उपयोग पर ध्यान केंद्रित किया गया।
कार्यशाला में शामिल महिलाओं ने बताया कि विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से उनके उत्पादों की फिनिशिंग और आकर्षण में सुधार हुआ है, जिससे भविष्य में उनकी बिक्री और बाजार प्रतिस्पर्धा की संभावनाएँ बढ़ेंगी।
शाम को आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने मेले की रौनक को और बढ़ा दिया। मंच पर पंजाब की पारंपरिक लोक प्रस्तुतियाँ—गिद्दा और भांगड़ा—ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और पूरा परिसर उत्साह व तालियों से गूंज उठा।
सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला–2025 अब केवल स्वदेशी उत्पादों के प्रचार का माध्यम नहीं, बल्कि महिला उद्यमिता, कौशल विकास और सांस्कृतिक एकता का प्रभावशाली मंच बनकर उभर रहा है। यह मेला ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने और समाज में नवाचार तथा सांस्कृतिक जुड़ाव को प्रोत्साहित करने में अहम भूमिका निभा रहा है।
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