eScan CERT-In App: साइबर ठगी से बचाने के लिए राजस्थान पुलिस की अपील
बॉटनेट और मैलवेयर से बैंकिंग विवरण सुरक्षित रखने के लिए राजस्थान पुलिस ने उपयोगकर्ताओं को eScan CERT-In ऐप इस्तेमाल करने की सलाह दी।

तस्वीर में राजस्थान पुलिस का साइबर एडवाइजरी लोगो और सुरक्षा हेल्पलाइन 1930 दिख रहा है।
जयपुर, 3 सितंबर। साइबर ठगों के फिशिंग लिंक मोबाइल, कंप्यूटर और अन्य उपकरणों में बॉटनेट मैलवेयर पहुंचाकर निजी जानकारी और संवेदनशील बैंकिंग विवरण चोरी कर सकते हैं। ऐसे साइबर खतरों से बचाव के लिए राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने आमजन से भारत सरकार के CERT-In और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से विकसित eScan CERT-In Bot Removal App का इस्तेमाल करने की अपील की है।
महानिदेशक पुलिस राजस्थान श्री राजीव कुमार शर्मा के निर्देशानुसार साइबर अपराधों की रोकथाम और आमजन को साइबर ठगी से सुरक्षित रखने के लिए राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा लगातार जागरूकता अभियान चला रही है। साइबर ठग फिशिंग लिंक के जरिए मोबाइल, कंप्यूटर और अन्य उपकरणों को बॉटनेट मालवेयर से संक्रमित कर सकते हैं। इसके बाद वे निजी जानकारी, मोबाइल एप्लीकेशन और संवेदनशील बैंकिंग विवरण पर नियंत्रण हासिल कर उपयोगकर्ता की जानकारी के बिना नेट बैंकिंग संबंधी विवरण, उपयोगकर्ता नाम और पासवर्ड जैसी महत्वपूर्ण जानकारी चोरी कर सकते हैं।
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम श्री वीके सिंह ने बताया कि इस खतरे से बचाव के लिए भारत सरकार के भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (CERT-In) और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से एंड्रॉयड उपयोगकर्ताओं के लिए eScan CERT-In Bot Removal App विकसित किया गया है। यह एप मोबाइल में मौजूद खतरनाक बॉट, मालवेयर, ट्रोजन और अन्य साइबर खतरों की पहचान करने तथा उन्हें हटाने में मदद करता है।
यह एप मोबाइल में छिपे वायरस, जासूसी सॉफ्टवेयर, विज्ञापन सॉफ्टवेयर और बॉटनेट संक्रमण की जांच कर उन्हें हटाने में मदद करता है। इसके साथ ही मोबाइल एप्लीकेशन को दी गई संवेदनशील अनुमतियों पर भी नजर रखता है। एप में इंटरनेट आधारित सुरक्षा व्यवस्था के जरिए नए वायरस और साइबर खतरों की पहचान की जाती है। खतरा मिलने पर संदिग्ध अथवा खतरनाक एप को हटाने या अलग रखने की सुविधा भी उपलब्ध है।
eScan CERT-In Bot Removal App के इस्तेमाल के लिए पहले गूगल प्ले स्टोर से एप इंस्टॉल करना होगा। इसके बाद आवश्यक स्टोरेज आदि अनुमतियां प्रदान करनी होंगी। एप के एंटीवायरस विकल्प में जाकर पूर्ण जांच (Full Scan) शुरू की जा सकती है। जांच के दौरान वायरस या खतरनाक फाइल मिलने पर उसे हटाने या अलग रखने की सुविधा का इस्तेमाल किया जा सकता है। जांच पूरी होने के बाद मोबाइल को पुनः शुरू करने की सलाह दी गई है।
राजस्थान पुलिस ने मोबाइल को सुरक्षित रखने के लिए व्हाट्सऐप की सेटिंग्स में जाकर दो-स्तरीय सत्यापन (Two-Step Verification) हमेशा सक्रिय रखने, मोबाइल एप्लीकेशन केवल आधिकारिक और विश्वसनीय स्रोतों से डाउनलोड करने तथा संदिग्ध वेबसाइटों या अज्ञात स्रोतों से APK फाइल डाउनलोड कर इंस्टॉल नहीं करने की सलाह दी है। किसी एप को इंस्टॉल करते समय केवल जरूरी अनुमतियां ही प्रदान करने और मोबाइल में विश्वसनीय एंटीवायरस, जैसे eScan CERT-In Bot Removal या M-Kavach 2, की सुरक्षा सक्रिय रखने को कहा गया है।
पुलिस ने मोबाइल के ऑपरेटिंग सिस्टम और सभी एप्लीकेशन को नियमित रूप से अद्यतन करते रहने तथा बैंक खाते और डिजिटल भुगतान से जुड़े संदेशों एवं लेन-देन पर नियमित नजर रखने की भी अपील की है। साइबर ठगों द्वारा इस प्रकार की ठगी का प्रयास होने या साइबर अपराध की घटना होने पर बिना देरी किए 1930 पर साइबर हेल्पलाइन पर सूचना देने को कहा गया है। इसके साथ ही नजदीकी पुलिस थाने या साइबर पुलिस थाने में शिकायत करने अथवा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई है। साइबर हेल्पलाइन 1930 और साइबर हेल्पडेस्क नम्बर 9256001930 / 9257510100 को भी सूचित किया जा सकता है।

