EPFO ने बढ़ाई अनिवार्य वेतन सीमा, ₹15,000 से ₹25,000 हुई; राजस्थान में 51 लाख तक लाभ
EPFO ने अनिवार्य कवरेज की वेतन सीमा ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 कर दी है। राजस्थान में PMVBRY के तहत 26,694 संस्थान पंजीकृत हुए और 44,000 से अधिक पहली बार रोजगार पाने वाले कर्मचारी लाभान्वित हुए।

तस्वीर में ईपीएफओ राजस्थान जोन के कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मंच पर बैठे अधिकारी नजर आ रहे हैं, जिसमें बाएं से पारि और दाएं ओर अजित कुमार मौजूद हैं।
जयपुर। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने अनिवार्य भविष्य निधि कवरेज के लिए निर्धारित वैधानिक वेतन सीमा को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रतिमाह कर दिया है। नई वेतन सीमा 17 सितंबर 2026 से प्रभावी हो गई है। इससे ₹15,000 से अधिक और ₹25,000 तक वेतन पाने वाले वे पात्र कर्मचारी भी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आएंगे, जो केवल वेतन सीमा के कारण अब तक अनिवार्य ईपीएफ कवरेज से बाहर थे।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन, भारत सरकार के राजस्थान स्थित क्षेत्रीय कार्यालय की ओर से गुरुवार को जयपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इसमें राजस्थान के प्रभारी अतिरिक्त केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त अजित कुमार ने बताया कि नई व्यवस्था से देशभर में करीब 51 लाख अतिरिक्त कर्मचारियों को पहली बार ईपीएफओ कवरेज मिलने की उम्मीद है। पात्र कर्मचारियों को कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) बचत, कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के तहत पेंशन और कर्मचारी जमा संबद्ध बीमा योजना (EDLI) के तहत बीमा सुरक्षा का लाभ मिलेगा।
अजित कुमार ने नियोक्ताओं से संशोधित वेतन सीमा का अनुपालन सुनिश्चित करने और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ईसीआर दाखिल करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ईपीएफओ का उद्देश्य श्रमिकों को व्यापक सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने के साथ सेवा वितरण में सुधार, डिजिटल प्रशासन को बढ़ावा देना और औपचारिक रोजगार को प्रोत्साहित करना है।
प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PMVBRY) के तहत राजस्थान की प्रगति की जानकारी देते हुए अजित कुमार ने बताया कि योजना का उद्देश्य औपचारिक रोजगार को बढ़ावा देना तथा पहली बार रोजगार पाने वाले कर्मचारियों और अतिरिक्त रोजगार सृजित करने वाले नियोक्ताओं को प्रोत्साहित करना है।
उन्होंने बताया कि राजस्थान में PMVBRY के तहत 26,694 संस्थानों का पंजीकरण हुआ है। योजना से 44,000 से अधिक पहली बार रोजगार पाने वाले कर्मचारी लाभान्वित हुए हैं और लाभार्थियों के खातों में करीब ₹21 करोड़ की वित्तीय सहायता जमा की गई है। इसके अलावा 2,515 संस्थानों को कुल ₹53 करोड़ से अधिक की प्रोत्साहन राशि मिली है।
ईपीएफओ की ओर से चलाए जा रहे कर्मचारी नामांकन अभियान-2026 (EEC-2026) के माध्यम से उन पात्र कर्मचारियों को भविष्य निधि के दायरे में लाने का अवसर दिया जा रहा है, जो संस्थानों में कार्यरत होने के बावजूद अभी तक भविष्य निधि सदस्य नहीं बने हैं। यह अभियान 1 जुलाई 2026 से 31 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। इसके तहत 1 अप्रैल 2009 से 31 मार्च 2026 के बीच नियुक्त किए गए और वर्तमान में सेवा में कार्यरत पात्र कर्मचारी शामिल हैं।
ऐसे मामलों में, जहां पहले कभी कर्मचारी अंशदान की कटौती नहीं हुई है, कर्मचारी अंशदान माफ करने का प्रावधान है। नियोक्ता को निर्धारित प्रावधानों के अनुसार नियोक्ता अंशदान, ब्याज और प्रशासनिक शुल्क जमा करना होगा तथा इसके लिए केवल ₹100 का नुकसान होगा।
अजित कुमार ने बताया कि विलंबित ईपीएफ अंशदान जमा करने से जुड़े अनुपालन और विवादों के समाधान के लिए विश्वास योजना 2026 के तहत विशेष व्यवस्था की गई है। योजना में विलंबित भुगतान पर लगने वाले दंड को तर्कसंगत बनाकर काफी कम किया गया है। यह योजना 14 जून 2024 से पहले की अंशदान अवधि से संबंधित चूक पर लागू होगी। इससे नियोक्ताओं की अनुपालन लागत कम होने और पुराने मामलों के समाधान में सुविधा मिलने की उम्मीद है। यह योजना 28 दिसंबर 2026 तक प्रभावी रहेगी।
अजित कुमार ने कहा कि राजस्थान में इन पहलों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए ईपीएफओ नियोक्ताओं, उद्योग संघों, ट्रेड यूनियनों, श्रमिक प्रतिनिधियों और कर्मचारियों के साथ लगातार समन्वय कर रहा है। उन्होंने सभी पात्र हितधारकों से EEC-2026, विश्वास योजना, PMVBRY और अन्य योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने की अपील की।

