जयपुर में कर्मचारियों का सैलाब: पुरानी पेंशन पर आंच आई तो 24 घंटे में ठप होगा राजस्थान, 8 लाख कर्मियों ने फूंका आंदोलन का बिगुल
जयपुर में 8 लाख सरकारी कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन और नियमितीकरण को लेकर महारैली के जरिए सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ ने चेतावनी दी है कि यदि 31 मार्च तक उनकी मांगें नहीं मानी गईं और ओपीएस से छेड़छाड़ हुई, तो प्रदेशव्यापी हड़ताल होगी। जानिए क्या हैं कर्मचारियों के वो 7 संकल्प जिन्होंने राजस्थान सरकार की चिंता बढ़ा दी है।

जयपुर, 12 जनवरी। राजस्थान की राजधानी जयपुर की सड़कें आज उस समय जनसमूह के समंदर में तब्दील हो गई जब प्रदेश के कोने-कोने से आए हजारों सरकारी कर्मचारियों ने अपनी हुंकार से सत्ता के गलियारों को हिला दिया। अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ के आह्वान पर आयोजित इस 'चेतावनी महारैली' ने न केवल राजधानी की रफ्तार रोक दी, बल्कि सरकार को दो टूक चेतावनी दे दी है कि यदि पुरानी पेंशन योजना (OPS) से किसी भी तरह की छेड़छाड़ की गई, तो मात्र 24 घंटे के शॉर्ट नोटिस पर प्रदेश के 8 लाख कर्मचारी सामूहिक हड़ताल पर चले जाएंगे। यह प्रदर्शन केवल एक रैली नहीं, बल्कि राजस्थान के कर्मचारी जगत के इतिहास में सरकार के विरुद्ध अब तक का सबसे बड़ा शंखनाद माना जा रहा है।
आंदोलन की शुरुआत रामनिवास बाग से एक विशाल रैली के रूप में हुई, जो शहर के मुख्य मार्गों से गुजरती हुई बाइस गोदाम पुलिया पर एक विशाल जनसभा में परिवर्तित हो गई। तीन घंटे तक चले इस पैदल मार्च के कारण जयपुर का यातायात पूरी तरह अस्त-व्यस्त रहा और चारों ओर जाम के हालात बने रहे। महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष महावीर शर्मा ने जनसभा को संबोधित करते हुए सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि सरकार अधीनस्थ सेवा के कर्मचारियों के साथ लगातार वादाखिलाफी कर रही है। बजट में घोषणाओं के बावजूद न तो कैडर का पुनर्गठन हुआ और न ही लंबे समय से लंबित वेतन विसंगतियों को दूर किया गया। शर्मा ने कड़े शब्दों में कहा कि निगमों, बोर्डों और विश्वविद्यालयों में ओपीएस के स्थान पर एनपीएस लागू करना महासंघ को दी गई एक खुली चुनौती है, जिसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
महासंघ ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए स्पष्ट किया कि पारदर्शी स्थानांतरण नीति के अभाव में हजारों तृतीय श्रेणी शिक्षक मानसिक प्रताड़ना झेल रहे हैं, वहीं लाखों संविदा कर्मी और मानदेय कर्मी नियमितीकरण और सम्मानजनक मानदेय के लिए तरस रहे हैं। प्रदेश महामंत्री महावीर सिहाग ने कहा कि आज की इस विशाल उपस्थिति ने सरकार को आईना दिखा दिया है कि उनकी नीतियां कर्मचारी और आम जन विरोधी हैं। वरिष्ठ उपाध्यक्ष तेज सिंह राठौड़ और बन्ना राम चौधरी ने बताया कि इस महारैली से पहले पूरे प्रदेश के जिलों में 'संघर्ष चेतना यात्रा' निकालकर कर्मचारियों को एकजुट किया गया था, जिसका परिणाम आज जयपुर की सड़कों पर दिखाई दे रहा है।
महासंघ ने अपनी भविष्य की रणनीति साझा करते हुए सात संकल्पों की घोषणा की है। इनमें पदोन्नति और वेतन विसंगति दूर करना, पुरानी पेंशन की सुरक्षा, संविदा कर्मियों का नियमितीकरण, पारदर्शी स्थानांतरण नीति, निजीकरण पर रोक और कर्मचारियों के स्वाभिमान की रक्षा शामिल है। महासंघ ने अल्टीमेटम दिया है कि यदि 31 मार्च तक इन मांगों पर प्रभावी कार्यवाही नहीं हुई, तो प्रदेश में एक वृहत और निर्णायक आंदोलन छेड़ा जाएगा। साथ ही, बजट प्रस्तुतीकरण के दिन सभी जिला मुख्यालयों पर सरकार को सद्बुद्धि देने के लिए 'सद्बुद्धि यज्ञ' का आयोजन किया जाएगा।
इस विशाल जनसभा को अर्जुन शर्मा, नरेंद्र कविया, सुरेश पाल सिंह, प्यारेलाल चौधरी, धर्मेंद्र फोगाट, प्रहलाद जाट, मोहन सिंह, हाफू राम चौधरी, शेर सिंह चौहान, ओम प्रकाश गठाला, हरलाल चौधरी, आनंद सिंह, कमला मीणा, मानसिंह शेखावत, लेखराज वर्मा, मोहन मीणा, महेंद्र तिवारी, रतन प्रजापत, रामकिशोर मीणा, हिमांशु यादव, नवल किशोर सैनी और रोशन शर्मा जैसे दिग्गज नेताओं ने संबोधित किया। मंच का कुशल संचालन संयुक्त महामंत्री अजय सैनी द्वारा किया गया। कर्मचारियों के इस उग्र रुख ने स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले दिनों में राजस्थान की राजनीति और प्रशासन में बड़ा गतिरोध देखने को मिल सकता है।

