जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में भावुक क्षण: स्वर्गीय सविता माली की स्मृति में विजय राही को मिला पहला 'समाई ग्रांट' पुरस्कार
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में स्वर्गीय सविता माली की स्मृति में पहले 'समाई ग्रांट फॉर क्रिएटिव राइटिंग' पुरस्कार की घोषणा की गई। राजस्थान के युवा लेखक विजय राही को 25 हजार रुपये की राशि से सम्मानित किया गया। नमिता गोखले और सविता माली के परिजनों की उपस्थिति में हुए इस भावुक कार्यक्रम का उद्देश्य नए लेखकों को प्रोत्साहित करना है।

जयपुर। गुलाबी नगरी के ऐतिहासिक आंगन में आयोजित हो रहे विश्व प्रसिद्ध जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) में आज साहित्य और संवेदनाओं का एक अनूठा संगम देखने को मिला। शब्दों के इस महाकुंभ में न केवल विमर्श की धारा बही, बल्कि एक दिवंगत साहित्य प्रेमी की यादों को जीवंत रखते हुए नवोदित प्रतिभाओं के प्रोत्साहन का नया अध्याय शुरू हुआ। 'द पोएट्री ऑफ रिमेंबरेंस' नामक विशेष सत्र के दौरान स्वर्गीय श्रीमती सविता माली की पावन स्मृति में प्रथम 'समाई ग्रांट फॉर क्रिएटिव राइटिंग' पुरस्कार की घोषणा की गई, जिसने उत्सव के माहौल को भावुक और गौरवपूर्ण बना दिया।
इस प्रतिष्ठित और पहले सम्मान के लिए राजस्थान के उभरते हुए युवा कवि और लेखक विजय राही को चुना गया। मंच पर जब विजय राही को यह सम्मान प्रदान किया गया, तो पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। पुरस्कार के रूप में उन्हें 25 हजार रुपए की सम्मान राशि का चेक भेंट किया गया। यह क्षण केवल एक पुरस्कार वितरण भर नहीं था, बल्कि एक ऐसी विरासत की शुरुआत थी जो भविष्य के रचनाकारों के लिए संबल बनेगी।
समारोह के दौरान जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल की सह-संस्थापक एवं सह-निदेशक नमिता गोखले ने स्वर्गीय सविता माली के साहित्य के प्रति गहरे लगाव को याद किया। उन्होंने बताया कि श्रीमती माली कई वर्षों तक जेएलएफ की एक निष्ठावान और नियमित आगंतुक रही थीं। दुर्भाग्यवश कैंसर से संघर्ष के बाद उनके निधन ने साहित्य जगत को रिक्तता दी, लेकिन उनकी स्मृतियों को 'समाई ग्रांट' के माध्यम से अमर कर दिया गया है। गोखले ने जोर देकर कहा कि इस ग्रांट का मुख्य उद्देश्य उन नए और उभरते लेखकों को मंच प्रदान करना और आर्थिक सहायता देना है, जो अपनी लेखनी से समाज में नई चेतना जागृत कर रहे हैं।
सम्मान समारोह के दौरान मंच पर भावनाओं का ज्वार तब और गहरा हो गया जब जोधपुर से आए स्वर्गीय सविता माली के पति भरत माली और उनके बच्चे माधर्वी एवं अर्थविती ने स्वयं उपस्थित होकर विजय राही को पुरस्कृत किया। परिवार की उपस्थिति ने इस आयोजन को एक व्यक्तिगत स्पर्श और गरिमा प्रदान की। यह पुरस्कार न केवल विजय राही की रचनात्मक क्षमता पर मुहर लगाता है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि साहित्य के प्रति प्रेम मृत्यु के बाद भी परोपकार और प्रेरणा के रूप में जीवित रह सकता है। इस पहल ने जेएलएफ के मंच से नए लेखकों के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोल दिए हैं।

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