उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने जयपुर के JKK में राज्य स्तरीय अभिलेखागार प्रदर्शनी का किया उद्घाटन
जवाहर कला केंद्र में आयोजित तीन दिवसीय प्रदर्शनी में राजपूताना की रियासतों के ऐतिहासिक दस्तावेज, रियासती सिक्के और 1857 की क्रांति के अभिलेख प्रदर्शित किए गए हैं।

जयपुर, 17 मार्च। राजस्थान की समृद्ध विरासत और रियासतकालीन प्रशासनिक दक्षता को आमजन के समक्ष जीवंत करने के उद्देश्य से जयपुर के जवाहर कला केन्द्र में एक ऐतिहासिक समागम का आगाज़ हुआ है। उपमुख्यमंत्री तथा कला, साहित्य एवं संस्कृति एवं पुरातत्व मंत्री दिया कुमारी ने मंगलवार को कला, साहित्य एवं संस्कृति विभाग के अंतर्गत राजस्थान राज्य अभिलेखागार, बीकानेर द्वारा आयोजित तीन दिवसीय विशेष प्रदर्शनी का औपचारिक शुभारम्भ किया। ‘राजपूताना की रियासतों के ऐतिहासिक एवं प्रशासनिक महत्व के बहुमूल्य अभिलेख’ विषय पर आधारित यह प्रदर्शनी राजस्थान के गौरवशाली अतीत के उन अनछुए पहलुओं को उजागर करती है, जो अब तक फाइलों और बस्तों में कैद थे।
प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए उपमुख्यमंत्री ने आमेर के मिर्जा राजा जयसिंह द्वारा अपने पुत्र रामसिंह को लिखे गए अत्यंत निजी एवं रणनीतिक पत्र का गहराई से निरीक्षण किया। इसके साथ ही, उन्होंने जयपुर शहर की स्थापना के कालखंड (सन् 1727 ई.) के दौरान सवाई जयसिंह द्वारा व्यापारियों के मुखिया रामकिशन को जारी किए गए उस ऐतिहासिक परवाना का भी अवलोकन किया, जिसमें शहर में व्यापार-वाणिज्य को बढ़ावा देने हेतु विशेष दिशा-निर्देश दिए गए थे। राजस्थान राज्य अभिलेखागार, बीकानेर के निदेशक चंद्रसेन सिंह शेखावत ने उपमुख्यमंत्री को अवगत कराया कि इस संकलन में वकील रिपोर्ट, खरीते, अर्जदारत, आदेश, परवाना और हिंदू महासभा कोटपूतली के लिए जयपुर राज्य परिषद् द्वारा पारित रिजोल्यूसन जैसे अत्यंत दुर्लभ दस्तावेज सम्मिलित किए गए हैं।
प्रदर्शनी की विशिष्टता का अनुमान इसी तथ्य से लगाया जा सकता है कि यहाँ सन् 1885 ई. में जम्मू-कश्मीर के महाराजा के राज्याभिषेक के अवसर पर उदयपुर महाराजा फतेहसिंह बहादुर जी को भेजा गया खरीता प्रदर्शित है। वहीं, अलवर राज्य परिषद् द्वारा महिला शिक्षा पर बल देने संबंधी संकल्प और अलवर-भरतपुर के बीच रूपारेल नदी जल विवाद को सुलझाने हेतु किए गए ऐतिहासिक एग्रीमेंट के दस्तावेज भी मौजूद हैं। सामाजिक सुधारों की दृष्टि से झालावाड़ राज्य द्वारा बाल विवाह एक्ट सन् 1927 के तहत बेमेल विवाह रोकने के आदेश और उदयपुर महाराणा सरूप सिंह जी द्वारा कोटा महाराव को सती प्रथा निषेध के संबंध में भेजे गए आदेश की प्रति शासन की प्रगतिशील सोच को दर्शाती है।
इतिहास के शौकीनों के लिए यहाँ सभी 19 रियासतों के तत्कालीन नक्शे, राजचिह्न, संस्थापकों की वंशावली और सन् 1857 की क्रांति से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य उपलब्ध हैं। बीकानेर की प्रसिद्ध ऊँट सेना 'गंगा रिसाला' के पराक्रम और मानगढ़ पहाड़ी (1913) पर गोविन्द गुरू के नेतृत्व में हुए नरसंहार के हृदयविदारक वृत्तांत भी यहाँ दस्तावेजों के रूप में दर्ज हैं। महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक की हल्दीघाटी युद्ध (1576) में वीरता और मृत्यु पर प्रताप द्वारा व्यक्त शोक तथा भूमिदान के ताम्रपत्र दर्शकों को भावुक कर देते हैं। साथ ही, वायसराय लॉर्ड लैंसडाउन का भरतपुर महाराजा को लिखा पत्र और 1927 के हिंदी साहित्य सम्मेलन में रवींद्रनाथ टैगोर का पत्र आकर्षण का प्रमुख केंद्र बने हुए हैं। बीकानेर पुस्तकालय की दुर्लभ पुस्तकें जैसे 'रिपोर्ट राज मारवाड़ 1891', 'बीकानेर गोल्डन जुबली' और थॉमस हेडली की कृतियाँ शोधार्थियों के लिए ज्ञान का भंडार हैं। यह प्रदर्शनी 19 मार्च तक जवाहर कला केन्द्र की अलंकार दीर्घा में प्रातः 10 से रात्रि 8 बजे तक आमजन के लिए निशुल्क उपलब्ध रहेगी।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
