उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने जयपुर में राजस्थान ललित कला अकादमी मेले का किया उद्घाटन
जवाहर कला केंद्र में 21 मार्च तक आयोजित इस मेले में 100 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं, जहाँ युवा कलाकारों की कलाकृतियों और लोक संस्कृति का प्रदर्शन हो रहा है।

जयपुर। राजस्थान की समृद्ध कलात्मक विरासत और लोक संस्कृति के संरक्षण के संकल्प के साथ उपमुख्यमंत्री तथा पर्यटन, कला-साहित्य एवं संस्कृति तथा पुरातत्व मंत्री दिया कुमारी ने मंगलवार को जवाहर कला केंद्र स्थित शिल्पग्राम में राजस्थान ललित कला अकादमी द्वारा आयोजित पांच दिवसीय कला मेले का विधिवत शुभारम्भ किया। 21 मार्च तक चलने वाले इस गौरवशाली आयोजन में आमजन का प्रवेश नि:शुल्क रखा गया है, जो प्रदेश की युवा प्रतिभाओं और पारंपरिक शिल्प को एक वैश्विक मंच प्रदान कर रहा है।
शुभारम्भ के पश्चात पत्रकारों से मुखातिब होते हुए उपमुख्यमंत्री ने विशेष जानकारी साझा की कि राज्य सरकार की घोषणा के अनुरूप इस वर्ष 'राजस्थान दिवस' चैत्र शुक्ल प्रतिपदा यानी 19 मार्च को गरिमापूर्ण तरीके से मनाया जा रहा है। उन्होंने प्रदेशवासियों को राजस्थान दिवस की अग्रिम शुभकामनाएं देते हुए इसे अपनी साझा धरोहर और लोक संस्कृति का पावन उत्सव बताया। दिया कुमारी ने रेखांकित किया कि पर्यटन, कला-साहित्य एवं संस्कृति तथा पुरातत्व विभाग द्वारा 14 से 19 मार्च तक आयोजित होने वाले विविध कार्यक्रमों की श्रृंखला में यह कला मेला एक महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने प्रदेश के युवा कलाकारों की कृतियों की सराहना करते हुए आह्वान किया कि आज की पीढ़ी अपनी ऐतिहासिक धरोहरों को न केवल समझे, बल्कि उन्हें सुरक्षित रखकर आगामी पीढ़ियों तक हस्तांतरित करने का उत्तरदायित्व भी निभाए।
कला-साहित्य एवं संस्कृति विभाग की उप सचिव तथा जवाहर कला केंद्र की अतिरिक्त महानिदेशक डॉ. अनुराधा गोगिया के अनुसार, राजस्थान ललित कला अकादमी द्वारा क्यूरेटेड इस मेले में पारंपरिक और समसामयिक कला गतिविधियों का अद्भुत समागम हो रहा है। मेले के स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि परिसर में 100 से अधिक स्टॉल कलाकारों को आवंटित किए गए हैं, जहाँ विभिन्न कला माध्यमों का जीवंत प्रदर्शन किया जा रहा है।
उद्घाटन समारोह के दौरान शिल्पग्राम का प्रांगण राजस्थान की लोक धुनों से गुंजायमान रहा। राजकी सपेरा एवं उनके समूह द्वारा प्रस्तुत कालवेलिया नृत्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसी क्रम में राजकी सपेरा एवं पूरण नाथ सपेरा की सुपुत्री ममता सपेरा ने मोरचंग की मधुर तान के साथ खरताल वाद्य यंत्र का ऐसा सामंजस्य बिठाया कि वातावरण कलामय हो गया। पाली के रूप दास तेरह ताली पार्टी द्वारा तेरहताली नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी गई, वहीं श्रवण गेगावत के मासक वादन और कच्छी घोड़ी कलाकारों के प्रदर्शन ने उत्सव की रौनक बढ़ा दी। नागौर की शहनाई की गूंज ने पूरे आयोजन को एक पारंपरिक उत्सव के रंग में सराबोर कर दिया, जो राजस्थान की जीवंत सांस्कृतिक पहचान का सशक्त प्रमाण बनकर उभरा।

Ruturaj Ravan
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