कचनेर के पास स्थित श्रीक्षेत्र धर्मतीर्थ में श्री वृषभ सिद्ध जिन बिंब की 51 फीट ऊंची विशाल सिद्ध प्रतिमा की स्थापना पंचकल्याणक प्रतिष्ठापना एवं महामस्तकाभिषेक महोत्सव के अवसर पर रविवार को हुई, जिसमें श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। यह भव्य आयोजन परम पूज्य जगदुरु गणाधिपति, गणधाराचार्य श्री कुंथूसागरजी गुरुदेव के पावन सानिध्य में तथा क्रांतिकारी राष्ट्रसंत दिगंबर जैनाचार्य श्री गुप्तीनंदीजी गुरुदेव की उपस्थिति, मार्गदर्शन और प्रेरणा से सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने हजारों श्रद्धालुओं ने जोरदार तालियों और जयघोष के साथ अपना उत्साह व्यक्त किया।

सिद्ध प्रतिमा की स्थापना और धार्मिक अनुष्ठान

इस विशाल प्रतिमा के आधार में गणाधिपति गणधराचार्य श्री कुंथुसागरजी गुरुदेव, आचार्य गुप्तिनंदीजी गुरुदेव, आचार्य सुयशगुप्तजी, आचार्य श्रुतधरनंदीजी सहित अन्य साधु संतों द्वारा विधिवत यंत्र, नवरत्न, सोना-चांदी और पारा स्थापित किया गया। कार्यक्रम के दौरान संजय पापड्ड्रीवाल ने कहा कि "यह अत्यंत नेत्रदीपक और जीवन में दुर्लभ अवसर है, जो शायद फिर देखने या करने को न मिले।" प्रतिष्ठाचार्य मधुर पंडित ने संपूर्ण विधि संपन्न कराई। प्रतिमा के अग्रभाग में भी सोना, चांदी, नवरत्न और यंत्र अर्पित किए गए। श्रद्धा की पराकाष्ठा तब देखने को मिली जब डॉ. अंजली पापड़ीवाल ने अपनी उंगली से सोने की हीरे जड़े अंगूठी निकालकर अत्यंत श्रद्धा से प्रतिमा के नीचे समर्पित की।

महोत्सव समिति और व्यवस्थापन

इस महोत्सव के सफल आयोजन में पंचकल्याणक प्रतिष्ठापना महोत्सव समिति के अध्यक्ष संजय फालक पापड़ीवाल और कार्याध्यक्ष चंद्रशेखर चांदमल पाटणी ने सभी श्रद्धालुओं का स्वागत किया। इस अवसर पर महामंत्री पवनकुमार पापड़ीवाल (जालनापुरकर), स्वागताध्यक्ष जिनेंद्र बाकलीवाल, प्रमोद जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र पाटणी, मार्गदर्शक गुलाबचंद कासलीवाल, सुनील काला, आर. आर. पहाड़े सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। तीन क्रेनों की सहायता से कई घंटों के अथक प्रयास के बाद संजय कासलीवाल और मनोज कासलीवाल के मार्गदर्शन में प्रतिमा स्थापना का यह कठिन कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया। इस महोत्सव में आचार्य श्री तीर्थनंदीजी, प्रज्ञाश्रमण गणनायक आचार्य श्री सुयशगुप्तजी, आचार्य श्री श्रुतधरनंदीजी तथा गणिनी आर्यिका क्षमाश्री माताजी की ससंघ विशेष उपस्थिति रही।

गर्भकल्याणक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम

रविवार को महोत्सव के दूसरे दिन गर्भकल्याणक उत्तरार्ध का शुभारंभ सुबह 5:30 बजे हुआ। पंचकल्याणक विधान एवं 81 पवित्र कलशों के जल से धर्मतीर्थ अभिषेक किया गया। इसके पश्चात वास्तुविधान, हवन और मंदिर में गर्भशोधन विधि संपन्न हुई। शाम के समय गणधराचार्य का मंगल प्रवचन हुआ, जिसके बाद महाआरती तथा रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं गर्भकल्याणक संस्कार आयोजित किए गए, जिन्हें श्रद्धालुओं का उत्साहपूर्ण प्रतिसाद मिला। प्रचार-प्रसार संयोजक नरेंद्र अजमेरा और पियूष कासलीवाल (औरंगाबाद) ने बताया कि इस महोत्सव में राज्य और देशभर से दिगंबर जैन श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल हुए हैं।

दानदाताओं का विशेष योगदान और आगामी कार्यक्रम

इंदौर निवासी श्रीमती प्रेमलता गोधा, श्री अनिलकुमार व सौ. ज्योति गोधा, श्री अरुणकुमार व सौ. अंजु गोधा और उनके परिवार ने यह 51 फीट ऊंची विशाल सिद्ध प्रतिमा प्रदान की है। पुणे के श्री जिनेंद्र, सौ. हीरामणी, श्री राजेश, सौ. रेखा, श्री धीरज, सौ. सोनिया, श्री विकास, सौ. सपना और बाकलीवाल परिवार संपूर्ण आहारदाता रहे। बाराबंकी के श्री प्रमोद जैन परिवार महायज्ञनायक तथा गुरुग्राम के श्री विजेंद्र, सौ. निर्मल और जैन परिवार यज्ञनायक रहे, जबकि पापलकर परिवार द्वारा दीप प्रज्वलन किया गया। आज आचार्य श्री श्रुतधरनंदीजी का दीक्षा दिवस महोत्सव भी हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।

सोमवार (दि. 30) को जन्मकल्याणक विधियों की शुरुआत सुबह 5:30 बजे से होगी। सुबह 8 बजे सौधर्म इंद्र एवं अन्य मान्यवरों की ऐरावत हाथी पर भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। इसके बाद आचार्य संघ का मंगल प्रवचन एवं राज्याभिषेक समारोह आयोजित किया जाएगा, जिसमें 1008 कलशों से अभिषेक होगा। दिनभर गणधराचार्य का मंगल पूजन एवं प्रवचन चलेगा तथा रात्रि में बच्चों और युवाओं की भागीदारी के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे।

Pratahkal Bureau

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