शास्त्रीय संगीत, समावेशी कला और युवा रचनात्मकता का सजीव संगम: डेल्फ़िक काउंसिल ऑफ़ राजस्थान के दो दिवसीय सांस्कृतिक महोत्सव का भव्य शुभारंभ।


आयोजन का विवरण और मुख्य अतिथि

जयपुर, 31 जनवरी। डेल्फ़िक काउंसिल ऑफ़ राजस्थान द्वारा वेस्ट ज़ोन कल्चरल सेंटर, नॉर्थ ज़ोन कल्चर सेंटर एवं उस्ताद इमामुद्दीन ख़ान डागर म्यूज़िक एंड कल्चर सोसायटी के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय सांस्कृतिक महोत्सव ‘आयो बसंत’ का भव्य शुभारंभ शुक्रवार को जवाहर कला केंद्र, जयपुर में हुआ। शास्त्रीय संगीत, डिजिटल रचनात्मकता और दिव्यांग प्रतिभा का यह अनुपम मेल भारतीय कला-संस्कृति की जीवंत परंपराओं को समकालीन रचनात्मक अभिव्यक्तियों से जोड़ने वाला एक सशक्त मंच बनकर उभरा।

कार्यक्रम का उद्घाटन आईएएस डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी एवं आईएएस श्री निशांत जैन की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ। आईएएस श्रीमती श्रेया गुहा ने अतिथियों, कलाकारों एवं दर्शकों का स्वागत करते हुए कहा कि:

"‘आयो बसंत’ केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि संवेदना, समावेशन और रचनात्मक चेतना का उत्सव है।"

नॉर्थ ज़ोन कल्चर सेंटर के निदेशक फुरकान खान ने भी भारतीय शास्त्रीय कलाओं, युवा प्रतिभाओं और नवाचार को प्रोत्साहित करने में ऐसे आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।

प्रथम सत्र: डिजिटल रचनात्मकता और वर्कशॉप

  • समय व स्थान: प्रातः काल, कृष्णायन सभागार।
  • गतिविधि: रील मेकिंग एवं मोबाइल सेल्फ़ी वर्कशॉप।
  • संचालन: कलाकार नीरज सरना द्वारा संचालित।
  • उद्देश्य: युवाओं और कला-प्रेमियों के बीच डिजिटल माध्यमों के ज़रिये विचारों, भावनाओं और कला को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के आधुनिक तरीकों पर संवाद।

सांस्कृतिक संध्या: सुरों की जुगलबंदी

शाम का सत्र जवाहर कला केंद्र के रंगायन सभागार में आयोजित हुआ, जहाँ संगीत की सुरमयी प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को भावलोक में पहुँचा दिया:

  • मुख्य कलाकार: युवा संतूर वादक श्री दिव्यांश हर्षित श्रीवास्तव एवं बांसुरी साधक श्री राग यमन।
  • संगति कलाकार: तबले पर श्री ईशान शर्मा और घटम पर श्री वरुण राजशेखरन की सधी हुई संगति।

भावनात्मक शिखर: 'वी आर वन' की प्रस्तुति

कार्यक्रम का भावनात्मक शिखर रहा ‘वी आर वन’ (दिव्यांगजन) समूह की व्हीलचेयर डांस प्रस्तुति, जिसने दर्शकों को गहराई तक भावविभोर कर दिया।

इस समूह की प्रस्तुतियां निम्नलिखित चरणों में संपन्न हुईं:

  • गणेश वंदना से कार्यक्रम का आरंभ।
  • शिव तांडव स्तोत्र पर आधारित शास्त्रीय फ़्यूज़न।
  • व्हीलचेयर एक्रो-योगा का प्रदर्शन।
  • देशभक्ति से ओतप्रोत समापन प्रस्तुति।

उल्लेखनीय है कि यह समूह हाल ही में 'इंडियाज़ गॉट टैलेंट' जैसे राष्ट्रीय मंच पर भी अपनी प्रतिभा का परिचय दे चुका है।

निष्कर्ष

महोत्सव के प्रथम दिवस की प्रस्तुतियों ने यह संदेश दिया कि कला केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता और मानवीय एकता का सशक्त माध्यम भी है। उपस्थित अतिथियों एवं दर्शकों ने ‘आयो बसंत’ को सुरों, संवेदना और सौहार्द का उत्सव बताते हुए इसकी सराहना की।

Pratahkal Newsroom

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