दौसा में वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान: कालाखो बांध पर मंत्री सुरेश सिंह रावत ने किया जल पूजन
जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने अधिकारियों को मानसून से पूर्व नहरों की मरम्मत करने और ईआरसीपी के जरिए किसानों को भरपूर पानी देने के निर्देश दिए।

दौसा जिले के कालाखो बांध पर 'वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान' के तहत आयोजित कार्यक्रम में जल पूजन करते जल संसाधन मंत्री श्री सुरेश सिंह रावत (केंद्र में), सिकराय विधायक श्री विक्रम बंशीवाल (दाएं), जिला कलक्टर डॉ. सौम्या झा (बाएं से बैठी हुई तीसरी) एवं अन्य जनप्रतिनिधि तथा प्रशासनिक अधिकारी।
जल संरक्षण की दिशा में एक बड़े जन आंदोलन का सूत्रपात करते हुए दौसा जिले के ऐतिहासिक कालाखो बांध पर 'वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान' के अंतर्गत भव्य जल पूजन, कलश यात्रा और पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस वृहद जन-जागरण कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए राजस्थान के जल संसाधन मंत्री श्री सुरेश सिंह रावत ने स्पष्ट किया कि पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ईआरसीपी) के माध्यम से क्षेत्र के किसानों की तकदीर बदलेगी और सिंचाई व्यवस्था को अभूतपूर्व मजबूती मिलेगी। इस दौरान जन प्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं सहित भारी संख्या में स्थानीय महिलाओं और ग्रामीणों ने अपनी सक्रिय भागीदारी निभाकर जल एवं पर्यावरण संवर्धन का एक सशक्त संदेश दिया।
आयोजन की शुरुआत करते हुए जल संसाधन मंत्री श्री सुरेश सिंह रावत ने कालाखो बांध पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत जल पूजन संपन्न किया और क्षेत्र की सुख-समृद्धि के साथ-साथ आगामी मानूसन में उत्तम वर्षा की कामना की। इस मांगलिक अवसर पर पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं द्वारा एक विशाल कलश यात्रा निकाली गई, जिसने समूचे क्षेत्र को जल चेतना के रंग में सराबोर कर दिया। इसके साथ ही, प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने के उद्देश्य से बांध परिसर में व्यापक स्तर पर पौधारोपण भी किया गया।
जनसभा को संबोधित करते हुए मंत्री श्री रावत ने दो टूक शब्दों में कहा कि जल संकट के दौर में जल संरक्षण वर्तमान समय की सबसे बड़ी अनिवार्यता है। वर्षा जल के अधिकतम संचयन और पारंपरिक जल स्रोतों के जीर्णोद्धार में आमजन की भागीदारी को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जल संसाधनों को अक्षुण्ण बनाए रखने और सिंचाई तंत्र को मजबूत करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। उन्होंने ईआरसीपी (ERCP) के दूरगामी लाभों की चर्चा करते हुए बताया कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना के जरिए कालीसिंध, चंबल एवं पार्वती नदियों का अधिशेष जल इस प्यासे क्षेत्र तक पहुंचेगा, जिससे दौसा सहित पूरे पूर्वी राजस्थान में जल की उपलब्धता बढ़ेगी और अन्नदाताओं को सिंचाई के लिए भरपूर पानी मिल सकेगा।
आगामी मानसून सत्र को देखते हुए जल संसाधन मंत्री ने मौके पर ही प्रशासनिक एवं तकनीकी अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि वर्षा ऋतु के आगमन से पूर्व ही सभी जल स्रोतों, नहरों और एनीकटों की आवश्यक मरम्मत का कार्य अनिवार्य रूप से पूरा कर लिया जाए। किसानों की वर्षों पुरानी मांग का त्वरित संज्ञान लेते हुए मंत्री श्री रावत ने पुरानी केनाल प्रणाली के तत्काल नवीनीकरण और नहरों व जल मार्गों पर किए गए अवैध अतिक्रमणों को हटाने के लिए प्रभावी कानूनी व धरातलीय कार्रवाई करने के सख्त निर्देश जारी किए। उन्होंने दोतरफा रुख साफ करते हुए कहा कि किसानों के हितों के साथ किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा और सिंचाई ढांचे को सुदृढ़ बनाने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने आगामी 5 जून को आने वाले विश्व पर्यावरण दिवस पर रिकॉर्ड पौधारोपण करने का आह्वान करते हुए कहा कि जल और पर्यावरण संरक्षण को अब एक जन आंदोलन का रूप देना ही होगा।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित सिकराय विधायक श्री विक्रम बंशीवाल ने भी जनसमुदाय को संबोधित किया और वर्षा जल संचयन को जीवन का हिस्सा बनाने की पुरजोर अपील की। उन्होंने नागरिकों को जल की हर बूंद बचाने और अधिक से अधिक पौधे लगाने का संकल्प दिलाया। इसके साथ ही विधायक बंशीवाल ने क्षेत्रीय आवश्यकताओं को देखते हुए ईआरसीपी योजना के अंतर्गत शेष बचे बांधों को भी जोड़ने तथा कालाखो बांध पर आवश्यक विकास कार्यों को अविलंब कराने की पुरजोर मांग रखी। इस ऐतिहासिक अभियान के साक्षी के रूप में दौसा जिला कलक्टर डॉ. सौम्या झा, अतिरिक्त जिला कलक्टर अरविंद शर्मा, अतिरिक्त जिला कलक्टर (लालसोट) मनमोहन मीणा सहित विभिन्न सरकारी विभागों के आला अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि और भारी तादाद में ग्रामीणजन उपस्थित रहे, जिनका उत्साह यह साबित कर रहा था कि यह जल अभियान आने वाले दिनों में राजस्थान की धरा पर एक नई हरित क्रांति का सूत्रपात करेगा।

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