नि:स्वार्थ मानव सेवा और चिकित्सा सहायता के क्षेत्र में सेवा का पर्याय बन चुके दरबार साहिब हालाणी के 200वें नि:शुल्क नेत्र चिकित्सा शिविर की ऐतिहासिक सफलता के उपलक्ष्य में गुलाबी नगरी के राजापार्क स्थित श्री झूलेलाल मंदिर में एक भव्य सत्संग एवं सिंधियत कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह गरिमामय समारोह दरबार साहिब द्वारा दशकों से जारी उस अटूट सेवा यात्रा का उत्सव रहा, जिसके माध्यम से अब तक 21 हजार से अधिक मरीज लाभान्वित हो चुके हैं और 7 हजार से अधिक सफल नेत्र ऑपरेशनों से लोगों के जीवन में उजाला फैलाया गया है।

समारोह को संबोधित करते हुए प्रो. हासो दादलानी ने दरबार साहिब हालाणी की सेवा परंपरा को मानव सेवा की अनुपम मिसाल बताया। उन्होंने विस्तार से जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि वर्ष 1983 में अजमेर और वर्ष 2008 में जयपुर से शुरू हुआ यह परोपकारी अभियान आज एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है, जिसके अंतर्गत केवल जयपुर में ही 200 शिविर आयोजित कर आर्थिक रूप से अक्षम हजारों लोगों को निशुल्क चिकित्सा प्रदान की गई है। दरबार साहिब द्वारा न केवल जयपुर, बल्कि अजमेर, भोपाल और उल्हासनगर में भी नियमित रूप से इन शिविरों का संचालन किया जाता है, जहाँ मरीजों से कोई शुल्क नहीं लिया जाता और ऑपरेशन, लेंस, चश्मे सहित दवाइयों की समस्त व्यवस्थाएं पूर्णतः नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं।

इस अवसर पर दरबार साहिब हालाणी के गौरवशाली 300 वर्ष पुराने इतिहास और उसकी समृद्ध सेवा परंपरा पर भी प्रकाश डाला गया। अविभाजित भारत के सिंध प्रांत की हालाणी तहसील से शुरू हुई इस आध्यात्मिक यात्रा को वर्तमान में दरबार के 27वें गद्दीनशीन पूज्य बाबा साधुराम साहिब सेवा, सत्संग और सुमिरन के संकल्प के साथ निरंतर पल्लवित कर रहे हैं। सेवा के अन्य प्रकल्पों की जानकारी देते हुए भगवान परियानी ने बताया कि पुष्कर मेला के दौरान कार्तिक एकादशी से पूर्णिमा तक विशाल अन्नक्षेत्र का संचालन किया जाता है, जहाँ प्रतिदिन लगभग 25 से 30 हजार श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं, वहीं अजमेर दरबार में प्रतिदिन चार समय सत्संग के माध्यम से मानवता को शांति और सेवा का संदेश दिया जा रहा है।

कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ महाराज कन्हैया लाल शर्मा द्वारा संपन्न वैदिक मंत्रोच्चार, हवन और पूजन के साथ हुआ, जिसमें आहुतियां देकर विश्व कल्याण की मंगल कामना की गई। इसके उपरांत आयोजित ब्राह्मण भोजन में लगभग 425 सिंधी ब्राह्मण परिवारों ने सहभागिता की, जिन्हें दक्षिणा, फल एवं वस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। समारोह की आध्यात्मिक संध्या में साईं मोहन दास उदासी और साईं गोकुल उदासी के सुमधुर सिंधी भजनों ने उपस्थित जनसमूह को भक्ति रस में सराबोर कर दिया।

इस महत्वपूर्ण पड़ाव पर समाज सेवा और चिकित्सा जगत में अतुलनीय योगदान देने वाले ख्यातनाम सिंधी चिकित्सकों डॉ. कमल चेलानी, डॉ. वासुदेव थावानी, डॉ. पुनीत रिझवानी, डॉ. जितेंद्र मंगतानी, डॉ. किशोर मूलराजानी, डॉ. राहुल खूबचंदानी, डॉ. राहुल मोटवानी, डॉ. हरीश तलरेजा, डॉ. जे. डी. दरयाणी, डॉ. निशांत दरयाणी, डॉ. घनश्याम गोकलानी, डॉ. मीना खिलनानी, डॉ. रमेश वाधवानी सहित रतन नेत्रालय की टीम को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में रमेश धर्मानी, मनोज ठाकवानी, तुलसी संगतानी सहित अनेक गणमान्य समाज बंधु उपस्थित रहे। आयोजन का समापन पारंपरिक सिंधी व्यंजनों की भोजन प्रसादी और सामूहिक 'पल्लव प्रार्थना' के साथ हुआ, जिसमें समस्त विश्व के कल्याण और आरोग्य की कामना की गई।

Pratahkal Bureau

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