पशुपालन, गोपालन एवं देवस्थान विभाग के मंत्री जोराराम कुमावत ने कहा कि सम्पूर्ण सृष्टि जल पर आधारित है और वर्तमान भी जल है तो भविष्य भी, सृष्टि के लिये जल है तो ही अगला पल है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल पर प्रारम्भ किया गया वन्दे गंगा जल संरक्षण अभियान वर्तमान और भविष्य में आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित करने के लिये एक जन आन्दोलन है, जिसके माध्यम से जन-जागरूकता बढ़ाकर जल और पर्यावरण संरक्षण में प्रभावी सफलता प्राप्त की जा सकती है।

मंत्री कुमावत आज जवाहर लाल नेहरु मार्ग स्थित सरस संकुल ऑडिटोरियम में राज्य स्तरीय डेयरी जल संरक्षण अभियान के उद्घाटन अवसर पर आयोजित संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में डेयरी अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। सरस संकुल परिसर में पौधों में जल प्रवाह कर संगोष्ठी का शुभारम्भ किया गया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति और प्रत्येक घर में पानी बचाने की महती आवश्यकता है तथा पारम्परिक जल स्त्रोतों का संरक्षण अनिवार्य है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को जल संकट का सामना न करना पड़े।

उन्होंने कहा कि आरसीडीएफ, इससे सम्बद्ध जिला दुग्ध संघ तथा गांव-गांव ढाणी-ढाणी में कार्यरत दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियां इस जन अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। अभियान का उद्देश्य जल संरक्षण को व्यवहार एवं कार्य संस्कृति का हिस्सा बनाना है। उन्होंने पिछले दो वर्षों में सहकारी डेयरी क्षेत्र की उपलब्धियों के लिये डेयरी प्रबंधन और कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि दूध एवं दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता के क्षेत्र में आरसीडीएफ ने अनुकरणीय कार्य किया है।

राजस्थान को-ऑपरेटिव डेयरी फैडरेशन की प्रबंध संचालक श्रुति भारद्वाज ने स्वागत उद्बोधन में बताया कि राज्य की सभी सहकारी डेयरियों ने पिछले दो वर्षों में पर्यावरण एवं जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है। उन्होंने कहा कि आरसीडीएफ के प्रयासों के परिणामस्वरूप एक वर्ष पूर्व जहां एक लीटर दूध की प्रोसेसिंग पर डेढ़ लीटर पानी व्यय होता था, वह अब घटकर मात्र 800 मिली लीटर रह गया है। इससे राज्यभर में प्रतिदिन 45 लाख लीटर दूध की प्रोसेसिंग पर 31.50 लाख लीटर से अधिक पानी की बचत हो रही है।

उन्होंने बताया कि अभियान के अंतर्गत त्रिस्तरीय व्यवस्था अपनाई जा रही है, जिसमें जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता शामिल हैं। दुग्ध संघों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, वेस्ट मैनेजमेंट, जीरो लिक्विड डिस्चार्ज प्लांट और बॉयोफलैक्सी प्लांट जैसे नवाचारों से पर्यावरण संरक्षण को बल मिला है। भीषण गर्मी को देखते हुए आरसीडीएफ सहित राज्य के दुग्ध संघों में 111 प्याउ स्थापित किए जा रहे हैं, वहीं पशुओं के लिये खेली और पक्षियों के लिये परिंडे भी लगाए गए हैं।

इसी अवसर पर सरस पार्लर पर उपभोक्ताओं को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिये प्लास्टिक वेस्ट कलेक्शन बिन का भी शुभारम्भ किया गया। मंत्री कुमावत ने जवाहर लाल नेहरु मार्ग स्थित सरस पार्लर पर यह बिन शुरू किया, जिसमें एकत्रित प्लास्टिक कचरे को रिसाइकिल कर पुनः उपयोग में लाया जाएगा।

जयपुर डेयरी के प्रबंध संचालक मनीष फौजदार ने उपस्थित प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि जल संरक्षण के क्षेत्र में जयपुर डेयरी आज विश्व की अग्रणी डेयरियों में शामिल हो चुकी है। उन्होंने बताया कि जीरो लिक्विड डिस्चार्ज प्लांट के कारण प्रत्येक वर्ष लगभग 6 करोड़ लीटर से अधिक पानी की बचत की जा रही है।

संगोष्ठी में आरसीडीएफ के वित्तीय सलाहकार डॉ. आकाश आल्हा सहित बड़ी संख्या में डेयरी फेडरेशन एवं जयपुर डेयरी के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान गोपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने सभी उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को जल संरक्षण की शपथ भी दिलाई।

कार्यक्रम के पश्चात मंत्री कुमावत ने सरस पार्लर का निरीक्षण किया तथा वहां पनीर डोसा और सरस सोफ्टी का स्वाद लिया। उन्होंने सरस उत्पादों की गुणवत्ता और स्वाद की सराहना करते हुए उपभोक्ताओं से भी संवाद किया।

यह अभियान राज्य की सहकारी डेयरी व्यवस्था में जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और जन-जागरूकता को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो आने वाले समय में सतत विकास की आधारशिला को और मजबूत करेगा।

Updated On
Pratahkal Bureau

Pratahkal Bureau

प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story