राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय में स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज के जैव रसायन विभाग द्वारा "स्कीम फॉर प्रमोशन ऑफ़ एकेडमिक एंड रिसर्च कोलेब्रेशन" (SPARC) पहल के अंतर्गत “तनाव सहनशीलता और पोषणीय खाद्य सुरक्षा के लिए प्लांट बायोटेक्नोलॉजी में प्रगति – दलहनी एवं उपेक्षित फसलों के लिए संभावनाएं” विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया।

अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने साझा किए विचार

सम्मेलन की सह संयोजक प्रो. पेट्रा बाउअर, हाइनरिख हाइने विश्वविद्यालय ड्यूसलडॉर्फ की सह-संयोजक, ने कहा कि "सम्मेलन में प्रदर्शित सशक्त अंतरराष्ट्रीय सहयोग पौध पोषण अनुसंधान को आगे बढ़ाने तथा वैश्विक रूप से प्रासंगिक फसल सुधार रणनीतियों के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।" वहीँ सीएसआईर - आइएचबीटी के निदेशक डॉ. सुदेश कुमार यादव ने कहा कि "सम्मेलन ने जैव संसाधनों और पादप जैवप्रौद्योगिकी को सतत कृषि एवं जैव-अर्थव्यवस्था से प्रभावी रूप से जोड़ा।" इसी कड़ी में एनआईएम की निदेशक डॉ. हेमा यादव ने कहा कि "SPARC 2026 ने कृषि-जैवप्रौद्योगिकी नवाचार और उद्यमिता की भूमिका को उजागर किया।" स्टेलनबॉश विश्वविद्यालय की डॉ. क्रिस्टेल वैन डेर वाईवर ने कहा कि "सम्मेलन ने पौधों की अकार्बनिक तनाव सहनशीलता बढ़ाने पर आधुनिक जैवप्रौद्योगिकीय दृष्टिकोणों पर सार्थक चर्चा का मंच प्रदान किया।" वहीँ सम्मेलन में प्रो. संजीब कुमार पांडा ने पादप जैव प्रौद्योगिकी को तनाव सहनशीलता एवं पोषण सुरक्षा से जोड़ते हुए दलहनी एवं अनाथ फसलों की महत्त्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।

उभरते विषयों पर गहन चर्चा और सहभागिता

आपको बता दे इस सम्मेलन में प्लांट स्ट्रेस फिजियोलॉजी, जीनोम एडिटिंग, जीनोमिक्स एवं ट्रांसक्रिप्टोमिक्स, सूक्ष्मजीव अंतःक्रियाएं, बायोफोर्टिफिकेशन, AI-आधारित लक्षण पहचान तथा कृषि जैव प्रौद्योगिकी में नवाचार जैसे उभरते विषयों पर 5 व्याख्यान आयोजित किए गए थे जिसमे 150 प्रतिभागियों ने भाग लिया था। इस सम्मेलन में सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका के स्टेलनबोश विश्वविद्यालय, जर्मनी के कोलोन विश्वविद्यालय सहित भारत के प्रमुख संस्थानों जैसे - ICAR, NABI, NIAM, IIPR, CSIR-IHBT तथा विभिन्न केंद्रीय एवं राज्य विश्वविद्यालयों के विशिष्ट वक्ताओं ने अत्याधुनिक शोध निष्कर्ष प्रस्तुत किए। साथ ही इन प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों ने जलवायु-सहिष्णु कृषि और पोषणीय सुरक्षा के लिए सतत एवं नवाचार आधारित समाधानों पर विचार-विमर्श किया।

शैक्षणिक संस्थानों की सक्रिय भागीदारी

इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में बेन-गुरियन यूनिवर्सिटी ऑफ द नेगेव (इज़राइल), बिट्स पिलानी (पिलानी एवं गोवा परिसर), बनस्थली विद्यापीठ, चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार, गुजरात बायोटेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी, जी.बी. पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ पंजाब तथा CURAJ के विभिन्न स्कूलों एवं विभागों के छात्रों एवं शोधकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

शोधकर्ताओं का प्रोत्साहन एवं पुरस्कार वितरण

इस सम्मेलन में युवा शोधकर्ताओं के लिए आयोजित मौखिक एवं पोस्टर प्रस्तुतियों के विशेष सत्रों ने उन्हें अपने शोध कार्य प्रस्तुत करने का उत्कृष्ट मंच प्रदान किया। इस अवसर पर उत्कृष्ट शोध संप्रेषण एवं नवाचार के लिए सर्वश्रेष्ठ मौखिक प्रस्तुति, सर्वश्रेष्ठ पोस्टर प्रस्तुति तथा यंग साइंटिस्ट ट्रैवल अवॉर्ड सहित विभिन्न पुरस्कार भी प्रदान किए गए। सम्मेलन का समापन अंतरराष्ट्रीय सहयोग को सुदृढ़ करने, अनुप्रयुक्त प्लांट बायोटेक्नोलॉजी अनुसंधान को बढ़ावा देने तथा सतत कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करने के दृढ़ संकल्प के साथ हुआ।

Pratahkal Bureau

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