राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ विषय पर एक महत्वपूर्ण एवं विचारोत्तेजक पैनल चर्चा का आयोजन कुलपति माननीय प्रो. आनंद भालेराव के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों की विदुषी वक्ताओं ने अपने विचार साझा करते हुए महिला सशक्तिकरण के विविध आयामों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का उद्देश्य अधिनियम से संबंधित विभिन्न आयामों पर विचार-विमर्श करना, शासन में महिलाओं के बढ़ते प्रतिनिधित्व पर चर्चा करना तथा लैंगिक समानता के मुद्दों पर सार्थक संवाद स्थापित करना था।

समावेशिता और लोकतांत्रिक चेतना का नया अध्याय

राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आनंद भालेराव ने अपने संदेश में कहा कि "नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 केवल एक विधिक प्रावधान नहीं, बल्कि भारत की लोकतांत्रिक चेतना में समावेशिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन है।" उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जब महिलाओं को निर्णय-निर्माण की मुख्यधारा में स्थान मिलेगा, तो विकास अधिक संवेदनशील, संतुलित और स्थायी होगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के सार्थक संवाद से जागरूकता और सकारात्मक सोच विकसित होगी।

सृष्टि का आधार और नेतृत्व की सामर्थ्य

मुख्य वक्ता डॉ. मधु शर्मा ने नारी शक्ति की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि "नारी कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी समाज के हित में सार्थक योगदान देने की क्षमता रखती है।" उन्होंने नारी को सृष्टि का मूल आधार बताते हुए कहा कि वह कोमल होते हुए भी अत्यंत सशक्त है। उन्होंने महिलाओं से आह्वान किया कि वे परिवार एवं अपने लक्ष्यों के मध्य संतुलन बनाते हुए निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर रहें।

विधिक प्रावधान और 33 प्रतिशत आरक्षण की रूपरेखा

डॉ. मधु खंडेलवाल ने अधिनियम के विधिक आयामों को स्पष्ट करते हुए बताया कि यह 106वें संविधान संशोधन के माध्यम से लागू किया गया है, जिसके अंतर्गत लोकसभा एवं राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। उन्होंने इसे महिलाओं के नेतृत्व को सशक्त बनाने की दिशा में एक दूरदर्शी पहल बताते हुए कहा कि "इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए परिसीमन एवं जनगणना की प्रक्रिया का पूर्ण होना आवश्यक है। यह प्रावधान 15 वर्षों तक घूर्णन के आधार पर लागू रहेगा।"

सामूहिक शक्ति, तथ्य आधारित समझ और 'Her Story'

डॉ. निमिषा गौर ने इस पहल को सराहनीय बताते हुए कहा कि यह अधिनियम दो-तिहाई बहुमत से पारित हुआ है, जो इसके व्यापक महत्व को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि "वास्तविक महिला सशक्तिकरण तब संभव है, जब एक महिला दूसरी महिला को आगे बढ़ाने में सहयोग करे।" साथ ही, उन्होंने महिलाओं से नीति-निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया तथा तथ्यों पर आधारित समझ विकसित करने हेतु “फैक्ट फाइंडिंग” के महत्व को रेखांकित किया। डॉ. भूमिका शर्मा ने इसे लंबे संघर्ष के बाद मिली एक महत्वपूर्ण शुरुआत बताते हुए कहा कि "अब समय Her Story को भी समान स्थान देने का है।" उन्होंने ‘मैं’ से ‘हम’ की सोच को अपनाने तथा महिलाओं की सामूहिक शक्ति को पहचानकर उसे सशक्त बनाने पर बल दिया।

आत्मविश्वास, चुनौतियां और भविष्य की राह

डॉ. शैज़ी अहमद ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि "नारी शक्ति वंदन अधिनियम एक सकारात्मक पहल है, जिसे निरंतर प्रयासों के माध्यम से और अधिक प्रभावी बनाया जाना चाहिए।" उन्होंने आरक्षण की आवश्यकता, उसके लाभ एवं संभावित चुनौतियों पर विचार रखते हुए ‘हैप्पीनेस इंडेक्स’ को भी समान रूप से महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि व्यक्तित्व विकास के लिए मंच की अपेक्षा आत्मविश्वास और स्वयं के लिए खड़े होने का साहस अधिक महत्वपूर्ण है।

सक्रिय जनभागीदारी और सफल आयोजन

कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने सक्रिय सहभागिता करते हुए विभिन्न प्रश्न उठाए, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तारपूर्वक उत्तर दिया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की महिला कर्मियों, छात्राओं, केंद्रीय विद्यालय एवं अन्य शैक्षणिक संस्थानों की महिलाओं की उल्लेखनीय उपस्थिति रही, जिससे संवाद और अधिक व्यापक एवं समृद्ध हुआ। विशेष रूप से केंद्रीय विद्यालय की 10वीं से 12वीं कक्षा की छात्राओं ने अपनी सक्रिय सहभागिता से इस विमर्श को नई ऊर्जा प्रदान की। कार्यक्रम का संचालन डॉ. गरिमा कौशिक एवं डॉ. रीना गोदारा द्वारा किया गया। महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्षा डॉ. प्रगति जैन ने कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए इसकी प्रासंगिकता को रेखांकित किया तथा अंत में डॉ. प्रेमी देवी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया।

Pratahkal Bureau

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