राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय में 'माइक्रोकॉसम 2026' का शुभारंभ
माइक्रोबायोलॉजी विभाग के दो दिवसीय वार्षिक महोत्सव में विभागीय पत्रिका 'माइक्रोस्फीयर' का विमोचन हुआ और विशेषज्ञों ने शोध व करियर अवसरों पर व्याख्यान दिए।

राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय में आयोजित माइक्रोकॉसम 2026 के उद्घाटन सत्र के दौरान सभागार में उपस्थित संकाय सदस्य, शोधार्थी और विद्यार्थी।
राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के वार्षिक महोत्सव ‘माइक्रोकॉसम 2026’ के चौथे संस्करण का शुभारंभ वैज्ञानिक जिज्ञासा, शोध और रचनात्मक गतिविधियों के साथ हुआ। इस अवसर पर विभागीय पत्रिका ‘माइक्रोस्फीयर’ का विमोचन भी किया गया। दो दिवसीय महोत्सव में प्रतिष्ठित वक्ताओं, संकाय सदस्यों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों की सहभागिता के साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण, अकादमिक उत्कृष्टता, नवाचार एवं रचनात्मक अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया।
माइक्रोबायोलॉजी विभाग की ओर से आयोजित इस महोत्सव का उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना तथा उन्हें नवीन शोध क्षेत्रों, विभिन्न व्यावसायिक अवसरों और नवाचारपरक विचारों से परिचित कराना है। महोत्सव विद्यार्थियों को अपने ज्ञान, वैज्ञानिक सोच और रचनात्मक प्रतिभा को प्रदर्शित करने के साथ अकादमिक एवं व्यावसायिक विकास के अवसरों से जुड़ने का मंच प्रदान कर रहा है।
विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. आनंद भालेराव ने कहा कि ‘माइक्रोकॉसम 2026’ का आयोजन और ‘माइक्रोस्फीयर’ पत्रिका का विमोचन विश्वविद्यालय की वैज्ञानिक जिज्ञासा, अंतर्विषयक अनुसंधान तथा विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा को प्रोत्साहित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
महोत्सव के प्रथम दिन वैज्ञानिक और व्यावसायिक विषयों पर विभिन्न ज्ञानवर्धक सत्र आयोजित किए गए। डॉ. टॉम श्राइवर ने ‘आरएनए वर्ल्ड हाइपोथीसिस’ पर मुख्य व्याख्यान दिया। उन्होंने आरएनए अणुओं की विकासवादी भूमिका तथा प्रोटीन और डीएनए के उद्भव से जुड़े पहलुओं पर प्रकाश डाला।
लॉरियल से डॉ. नीतू सूद ने सौंदर्य प्रसाधन उद्योग में माइक्रोबायोलॉजी के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध करियर अवसरों की जानकारी दी। वहीं, विभाग की पूर्व छात्रा डॉ. सुगंधा महाजन ने खाद्य एवं डेयरी उद्योग में रोजगार और करियर की संभावनाओं पर अपने विचार साझा किए। IGIB में पीएचडी शोधार्थी नितिन जांगिड़ ने विद्यार्थियों के साथ अपनी शैक्षणिक यात्रा और शोध अनुभव साझा किए। प्रथम दिवस पर वैज्ञानिक तंबोला का आयोजन भी किया गया। दिनभर की गतिविधियों के बाद सांस्कृतिक संध्या के साथ पहले दिन का समापन हुआ, जिसमें विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम की शुरुआत में डॉ. अखिल अग्रवाल ने अतिथियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों का स्वागत किया। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने के लिए विद्यार्थियों की ओर से किए गए अथक प्रयासों, समर्पण और व्यापक तैयारियों की सराहना की।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण विभागीय पत्रिका ‘माइक्रोस्फीयर’ का औपचारिक विमोचन रहा, जिसे प्रो. संजीब कुमार पंडा ने संपन्न किया। ज्ञान, रचनात्मकता और नवीन विचारों के समन्वय के रूप में परिकल्पित यह पत्रिका विद्यार्थियों एवं शिक्षकों की शैक्षणिक उपलब्धियों, शोध कार्यों और रचनात्मक प्रयासों को मंच प्रदान करेगी।
युवा शोधार्थियों को संबोधित करते हुए डॉ. टॉम श्राइवर ने अकादमिक क्षेत्र की चुनौतियों पर अपने विचार रखे। उन्होंने शोध एवं अकादमिक करियर को अत्यंत कठिन बताते हुए कहा कि इस क्षेत्र में सफलता के लिए निरंतर परिश्रम, धैर्य और दृढ़ संकल्प आवश्यक हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी रुचि के अनुरूप क्षेत्र चुनने की सलाह दी और कहा कि उन्हें ऐसा कार्य तलाशना चाहिए, जिसके प्रति उनके मन में वास्तविक लगाव हो। उनके अनुसार, शोध के प्रति जुनून ही कठिन परिस्थितियों में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
इस अवसर पर प्रो. संजीब कुमार पंडा ने जीवन विज्ञान स्कूल की उपलब्धियों और विकसित हो रहे शोध बुनियादी ढांचे की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्कूल के अंतर्गत जैव प्रौद्योगिकी, जैव रसायन एवं सूक्ष्म जीवविज्ञान के तीन विभाग संचालित हैं। उन्होंने अंतर्विषयक अनुसंधान के लिए जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) समर्थित सुविधा तथा पशु जीवविज्ञान के लिए जैव सुरक्षा स्तर-3 (BSL-3) सुविधा का उल्लेख किया। उन्होंने इसे राजस्थान के लिए एक विशिष्ट शोध संसाधन बताया।
प्रो. पंडा ने विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय स्तर पर प्राप्त A++ मान्यता का उल्लेख करते हुए QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग और QS एशिया रैंकिंग में स्थान प्राप्त करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी दी। उन्होंने रोगाणुरोधी प्रतिरोध (AMR), CRISPR-Cas9 एवं प्राइम एडिटिंग जैसी उन्नत जीन-संपादन तकनीकों और एकल-कोशिका माइक्रोबायोलॉजी जैसे आधुनिक शोध क्षेत्रों के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
महोत्सव के दूसरे दिन वैज्ञानिक पोस्टर प्रस्तुति, कपड़ों पर चित्रकारी, फेस पेंटिंग, सब्जियों की नक्काशी, आंखों पर पट्टी बांधकर पिपेटिंग, प्रोटोटाइप निर्माण और वाद-विवाद प्रतियोगिता सहित विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों को वैज्ञानिक ज्ञान के साथ अपनी रचनात्मकता, तार्किक चिंतन, नवाचार और टीम भावना प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. दीक्षा त्रिपाठी ने धन्यवाद ज्ञापन किया। दो दिवसीय ‘माइक्रोकॉसम 2026’ के माध्यम से माइक्रोबायोलॉजी के विद्यार्थियों को वैज्ञानिक अनुसंधान, व्यावसायिक संभावनाओं और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने के साथ उनकी अकादमिक एवं वैज्ञानिक अभिरुचि को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जा रहा है।

