स्वाभिमान, साहस और राष्ट्रभक्ति के अमर प्रतीक महाराणा प्रताप की जयंती पर राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय का परिसर गौरव, श्रद्धा और प्रेरणा के वातावरण से सराबोर हो उठा। ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की तृतीया के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में विश्वविद्यालय परिवार ने मेवाड़ के महान योद्धा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके संघर्ष, त्याग और राष्ट्रनिष्ठा को स्मरण किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ महाराणा प्रताप के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आनन्द भालेराव, प्रभारी कुलसचिव एवं वित्त अधिकारी प्रदीप अग्रवाल, डीन अकादमिक प्रो. डी.सी. शर्मा, अधिष्ठातागण, संकाय सदस्य, अधिकारी, कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने सहभागिता करते हुए महाराणा प्रताप के जीवन और आदर्शों पर अपने विचार व्यक्त किए।

अपने संबोधन में कुलपति प्रो. आनन्द भालेराव ने कहा कि यदि भारत के महान राष्ट्रनायकों की सूची तैयार की जाए तो महाराणा प्रताप का नाम प्रथम पंक्ति में स्थान पाने का अधिकारी होगा। उन्होंने कहा कि इतिहास केवल उन व्यक्तियों को याद नहीं रखता जो अपने लिए जीते हैं, बल्कि उन विभूतियों को सम्मान देता है जिन्होंने राष्ट्र, समाज और मानवीय मूल्यों के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित किया। उनके अनुसार महाराणा प्रताप का जीवन राष्ट्रनिष्ठा, स्वाभिमान और त्याग का अनुपम उदाहरण है।

कुलपति ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण भी है। सत्य, न्याय, कर्तव्यनिष्ठा और स्वाभिमान जैसे मूल्यों से युक्त नागरिक ही राष्ट्र को सशक्त बना सकते हैं। उन्होंने युवाओं से महान व्यक्तित्वों के जीवन से प्रेरणा लेने और उन्हें अपने जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया।

उन्होंने यह भी कहा कि युवा पीढ़ी को देश के गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना समय की आवश्यकता है। विश्वविद्यालय में आयोजित ऐसे कार्यक्रम केवल अतीत का स्मरण नहीं कराते, बल्कि वर्तमान को दिशा और भविष्य को प्रेरणा प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि आज त्वरित सफलता की चाह बढ़ रही है, जबकि वास्तविक सफलता अपने सिद्धांतों और मूल्यों पर अडिग रहने में निहित है। महाराणा प्रताप का जीवन इसी संदेश का सशक्त उदाहरण है।

इस अवसर पर प्रभारी कुलसचिव एवं वित्त अधिकारी प्रदीप अग्रवाल ने महाराणा प्रताप के जीवन से जुड़े प्रेरक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए उनके संघर्षशील व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने ‘घास की रोटी’ के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी महाराणा प्रताप ने स्वतंत्रता और सम्मान के मार्ग से कभी समझौता नहीं किया। उन्होंने कहा कि उनके साहस, दृढ़ संकल्प और स्वाभिमान का प्रभाव उनके समकालीन शासकों तक पर पड़ा था।

डीन अकादमिक प्रो. डी.सी. शर्मा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि महाराणा प्रताप राजस्थान के शौर्य, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति के ऐसे प्रतीक हैं, जिन पर पूरे समाज को गर्व है। उन्होंने कहा कि उनका जीवन संघर्षों से जूझते हुए सफलता प्राप्त करने, नेतृत्व क्षमता विकसित करने तथा राष्ट्र के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देता है।

प्रो. शर्मा ने विश्वविद्यालय में महान विभूतियों के जीवन और विचारों को विद्यार्थियों तक पहुंचाने के लिए कुलपति प्रो. आनन्द भालेराव के नेतृत्व में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की और इसे प्रेरणादायी पहल बताया।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने महाराणा प्रताप की प्रतिमा के समक्ष पुष्पांजलि अर्पित कर राष्ट्र की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। प्रभारी कुलसचिव प्रदीप अग्रवाल ने सभी का आभार व्यक्त किया, जबकि कार्यक्रम का संचालन जनसंपर्क अधिकारी अनुराधा मित्तल ने किया।

महाराणा प्रताप जयंती के इस आयोजन ने विश्वविद्यालय परिसर में राष्ट्रभक्ति, स्वाभिमान और कर्तव्यनिष्ठा के मूल्यों को पुनः जीवंत कर दिया। कार्यक्रम ने न केवल महान योद्धा के अद्वितीय योगदान को स्मरण कराया, बल्कि युवा पीढ़ी को उनके आदर्शों से प्रेरणा लेने का संदेश भी दिया।

Pratahkal Bureau

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