राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय में अहिंदी भाषी विद्यार्थियों को हिंदी के व्यावहारिक प्रयोग में दक्ष बनाने और उनमें भाषा के प्रति सहजता व आत्मविश्वास विकसित करने के उद्देश्य से हिंदी शिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। भारतीय शिक्षण मंडल, चित्तौड़ प्रांत की राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय इकाई एवं विश्वविद्यालय के राजभाषा प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला का आयोजन विश्वविद्यालय के कुलपति एवं भारतीय शिक्षण मंडल, चित्तौड़ प्रांत के अध्यक्ष प्रो. आनंद भालेराव के मार्गदर्शन में किया जा रहा है।

कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर भारतीय शिक्षण मंडल, चित्तौड़ प्रांत के सहमंत्री डॉ. जय प्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि राजस्थान हिंदी भाषी क्षेत्र में आता है। ऐसे में अहिंदी भाषी क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों के लिए हिंदी सीखना स्थानीय समाज से जुड़ने और प्रभावी संवाद स्थापित करने की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी है। उन्होंने कहा कि यह पहल विद्यार्थियों को उनके शैक्षणिक एवं सामाजिक जीवन में हिंदी के प्रभावी प्रयोग में सहायता प्रदान करेगी। साथ ही, भारतीय भाषाओं के प्रति विद्यार्थियों में रुचि, सम्मान और अपनत्व की भावना विकसित करने की दिशा में भी ऐसे प्रयास महत्त्वपूर्ण हैं।

कार्यशाला के संबंध में जानकारी देते हुए विश्वविद्यालय में भारतीय भाषा गतिविधि के प्रमुख एवं हिंदी अधिकारी डॉ. ओम कुमार कर्ण ने बताया कि राजस्थान राजभाषा हिंदी के ‘क’ क्षेत्र में आता है। विश्वविद्यालय में देश के विभिन्न अहिंदी भाषी क्षेत्रों से विद्यार्थी अध्ययन के लिए आते हैं। स्थानीय समाज से संपर्क और दैनिक व्यवहार में हिंदी में संवाद करते समय इन विद्यार्थियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। विद्यार्थियों की इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए हिंदी शिक्षण कार्यशाला की पहल की गई है।

उन्होंने बताया कि यह कार्यशाला लगभग पाँच माह तक प्रत्येक गुरुवार आयोजित की जाएगी। इसमें विद्यार्थियों को हिंदी में वार्तालाप, पठन एवं लेखन के साथ-साथ सामान्य हिंदी व्याकरण का व्यावहारिक ज्ञान प्रदान किया जाएगा। कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य विद्यार्थियों को हिंदी भाषा के दैनिक एवं शैक्षणिक उपयोग के लिए सक्षम बनाना तथा उनमें भाषा के प्रति सहजता और आत्मविश्वास विकसित करना है।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. अखिल अग्रवाल ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि यह कार्यशाला अहिंदी भाषी विद्यार्थियों के लिए हिंदी सीखने, समझने और आत्मविश्वास के साथ उसका प्रयोग करने की दिशा में एक सराहनीय एवं अभिनव पहल है। उन्होंने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति और समाज से जुड़ने का भी सशक्त माध्यम है। ऐसे में यह कार्यशाला विद्यार्थियों को हिंदी के माध्यम से भारतीय संस्कृति, समाज और जनमानस से जोड़ने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. गाथा ठक्कर ने किया। कार्यशाला के आयोजन में डॉ. गजानन, डॉ. अनुराग सिंह, श्रीमती मिलन चौहान एवं डॉ. अक्षांश भारद्वाज का महत्त्वपूर्ण सहयोग रहा।

Pratahkal Bureau

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