राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय में इकोसिस्टम रेस्टोरेशन पर नेशनल कॉन्फ्रेंस शुरू
एनएमपीबी और आयुष मंत्रालय के सहयोग से आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन में औषधीय पौधों के संरक्षण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए।

राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आनंद भालेराव, एनएमपीबी के सीईओ प्रो. महेश कुमार दाधीच और अन्य अतिथि दीप प्रज्वलन कर सम्मेलन का शुभारंभ करते हुए।
राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय में पृथ्वी विज्ञान संकाय के अंतर्गत पर्यावरण विज्ञान विभाग के द्वारा दो दिवसीय (12-13 फरवरी) “इकोसिस्टम रेस्टोरेशन: बदलते क्लाइमेट में मेडिसिनल प्लांट्स की भूमिका (NCERMPCC-2026)” पर नेशनल कॉन्फ्रेंस का आज शुभारंभ किया गया। यह कोन्फ्रेंस राष्ट्रीय नेशनल मेडिकल प्लांट बोर्ड (NMPB), आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से आयोजित की गई।
- मुख्य अतिथि: प्रो. महेश कुमार दाधीच (मुख्य कार्यकारी अधिकारी, नेशनल मेडिकल प्लांट बोर्ड, आयुष मंत्रालय, भारत सरकार)
- विशिष्ट अतिथि: प्रो. नीता कोटेचा (पूर्व उपकुलपति, राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान)
प्रो. महेश कुमार दाधीच का संबोधन और आह्वान
आयोजन में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित प्रो. महेश कुमार दाधीच ने औषधीय पौधों के संरक्षण, संवर्धन एवं सतत उपयोग को बढ़ावा देने हेतु NMPB द्वारा संचालित राष्ट्रीय पहलों की जानकारी दी। साथ ही उन्होंने पारिस्थितिकी पुनर्स्थापन एवं ग्रामीण आजीविका सुदृढ़ीकरण में औषधीय पादप क्षेत्र को एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में सशक्त करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
"हम में से कोई भी अयोग्य नहीं है, आवश्यकता हैं अच्छे योजक की।" प्रो. दाधीच ने प्रो. आनंद भालेराव जी के द्वारा किए गए कार्यो की सराहना करते हुए कहा कि "यदि इस तरह कार्य करने की तत्परता और लग्न सभी में उत्पन्न हो जाए तो सभी विश्वविद्यालय सीयूराज की तरह प्रगति के नए सौपान पर होंगे।"
उन्होंने राजस्थान के ग्रामीण परिवेश को देखते हुए पीपल के पेड़ की महत्ता साझा की और कहा कि यदि हम पर्यावरण को बचाना चाहते हैं और ग्लोबल वार्मिंग के संकट से निपटना चाहते हैं, तो हमें ऐसे पेड़ लगाने की आवश्यकता है जो पर्याप्त ऑक्सीजन देते हैं।
उन्होंने आह्वान किया कि: "हमें जीवन में सात पेड़ लगाने चाहिए एवं उसका पालन पोषण इस प्रकार से करना चाहिए जैसे हमारे माता-पिता करते हैं, ताकि हम पृथ्वी के ऋण से मुक्त हो सकें।"
अध्यक्षीय संबोधन और उद्घाटन सत्र
उद्घाटन सत्र का शुभारंभ कुलपति प्रो. आनंद भालेराव ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में किया। उन्होंने सतत प्रथाओं को बढ़ावा देने तथा पारिस्थितिकी पुनर्स्थापन के लिए अनुसंधान-आधारित समाधानों में शैक्षणिक संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने सतत पारिस्थितिकी प्रबंधन हेतु पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोणों के साथ एकीकृत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
इससे पूर्व कुलपति एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन किया गया। आयोजन सचिव एवं विभागाध्यक्ष, डॉ. प्रमोद एन. कांबले ने स्वागत उद्बोधन में पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्स्थापन एवं जलवायु सहनशीलता में औषधीय पौधों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बदलती जलवायु परिस्थितियों में जैव विविधता ह्रास से निपटने हेतु अंतःविषयक अनुसंधान एवं नीति समन्वय की तात्कालिक आवश्यकता पर बल दिया। इस अवसर पर सम्मेलन की "सार-संग्रह पुस्तक" का भी औपचारिक विमोचन किया गया।
सम्मेलन की रूपरेखा और सहभागिता
इस सम्मेलन में देशभर से प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं, उद्यमियों एवं शोधार्थी भाग ले रहे हैं। दो दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में निम्नलिखित गतिविधियाँ होंगी:
- आमंत्रित व्याख्यान
- मौखिक एवं पोस्टर प्रस्तुतियाँ
- तकनीकी सत्र (विषय: पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्स्थापन, जलवायु परिवर्तन अनुकूलन, जैव विविधता संरक्षण एवं औषधीय पादप संसाधन)
उद्घाटन सत्र का समापन सह-आयोजक प्रो. राजेश कुमार द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसके पश्चात राष्ट्रीय गीत एवं राष्ट्रगान प्रस्तुत किया गया।
विश्वविद्यालय परिसर में नवनिर्मित ICICI बैंक शाखा का उद्घाटन
इसी कड़ी में कुलपति प्रो. आनंद भालेराव जी के द्वारा विश्वविद्यालय परिसर में नवनिर्मित आईसीआईसीआई बैंक की ब्रांच का उद्घाटन भी किया गया। कुलपति महोदय ने बैंक की प्रशंसा करते हुए कहा कि "यह बैंक भारत में अपना शीर्ष स्थान रखता है और इसका डीमेट अकाउंट भी सराहनीय है।" इस दौरान बैंक के जोनल अधिकारी व अन्य अधिकारियों के साथ विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक कर्मचारी भी उपस्थित रहे।

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