सीयूराज और बीएनएचएस मुंबई के बीच जैव विविधता संरक्षण हेतु समझौता
राजस्थान केन्द्रीय विश्वविद्यालय और बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी मिलकर पर्यावरण विषविज्ञान और वन्यजीव अनुसंधान के क्षेत्र में नवाचार करेंगे।

राजस्थान केन्द्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आनंद भालेराव (बाएं) और बीएनएचएस के प्रतिनिधि शैक्षणिक साझेदारी के दौरान विवि परिसर में स्मृति चिह्न साझा करते हुए।
अजमेर/बांदरसिंदरी। राजस्थान केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूराज) और देश की प्रतिष्ठित संस्था बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (बीएनएचएस), मुंबई के बीच जैव विविधता संरक्षण, अनुसंधान, प्रशिक्षण एवं शैक्षणिक आदान-प्रदान को सुदृढ़ करने के उद्देश्य aसे एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह रणनीतिक साझेदारी दोनों संस्थानों की विशेषज्ञता और संसाधनों को एक साझा मंच पर लाकर न केवल संस्थागत दक्षता को बढ़ाएगी, बल्कि विद्यार्थियों एवं शोधकर्ताओं के लिए वैज्ञानिक शोध के नए द्वार भी खोलेगी। जहाँ 143 वर्षों की समृद्ध विरासत समेटे बीएनएचएस पारिस्थितिक निगरानी और क्षेत्राधारित अनुसंधान में अपनी गहरी विशेषज्ञता साझा करेगा, वहीं राजस्थान केन्द्रीय विश्वविद्यालय अपनी आधुनिक प्रयोगशाला सुविधाएं और सुदृढ़ शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराकर इस मिशन को गति प्रदान करेगा।
इस समझौते के तहत पर्यावरणीय विषविज्ञान (Environmental Toxicology) के क्षेत्र में संयुक्त प्रयोगशाला अनुसंधान पर विशेष बल दिया गया है, जिसमें हाई परफॉर्मेंस लिक्विड क्रोमैटोग्राफी (HPLC) तकनीक के माध्यम से पशुधन ऊतक नमूनों में नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इन्फ्लेमेटरी ड्रग्स (NSAIDs) की पहचान, जैव संचयन अध्ययन, मृदा विश्लेषण और जैव विविधता का सटीक आकलन शामिल है। इसके अतिरिक्त, राजस्थान और अन्य भौगोलिक क्षेत्रों में पारिस्थितिक सर्वेक्षण, आवास पुनर्स्थापन तथा वनस्पति एवं जीव-जंतुओं की दीर्घकालिक निगरानी जैसी क्षेत्रीय परियोजनाओं को भी क्रियान्वित किया जाएगा। यह साझेदारी प्रशिक्षण कार्यशालाओं, छात्र इंटर्नशिप और कौशल विकास के माध्यम से संरक्षण विज्ञान एवं पर्यावरण प्रबंधन के क्षेत्र में नई पीढ़ी को तैयार करेगी, जबकि संयुक्त प्रकाशनों और सम्मेलनों के माध्यम से होने वाला ज्ञान साझाकरण भविष्य की नीतियों के निर्धारण में निर्णायक भूमिका निभाएगा।
इस दूरगामी सहयोग पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कुलपति प्रो. आनंद भालेराव ने इसे पर्यावरण रक्षा के प्रति एक साझा प्रतिबद्धता करार दिया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि संस्थान जब एक स्पष्ट उद्देश्य के साथ एकजुट होते हैं, तो उसका प्रभाव व्यापक होता है, जिससे शोधार्थी बहुमूल्य अनुभव प्राप्त कर एक सतत और जिम्मेदार भविष्य के निर्माण में योगदान दे सकेंगे। विश्वविद्यालय का यह कदम न केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा, बल्कि पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान और सतत विकास के राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी एक मील का पत्थर साबित होगा।

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