अजमेर। राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रांगण में भारतीय शिक्षण मंडल के 57वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आगामी 31 मार्च 2026, मंगलवार को एक भव्य समारोह का आयोजन होने जा रहा है। राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय एवं भारतीय शिक्षण मंडल, चित्तौड़ प्रांत के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह कार्यक्रम भारतीय शिक्षा पद्धति में युगांतकारी परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। इस गरिमामय अवसर पर भारतीय शिक्षण मंडल, चित्तौड़ प्रांत की प्रतिष्ठित वार्षिक पत्रिका “भारतीय शिक्षण बोध” का विधिवत विमोचन भी संपन्न किया जाएगा, जो शिक्षा जगत के लिए वैचारिक पाथेय सिद्ध होगी।

इस वर्ष के स्थापना दिवस समारोह के लिए “स्वबोध आधारित शिक्षा: औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति एवं राष्ट्र पुनर्निर्माण का आधार” जैसा अत्यंत प्रासंगिक विषय निर्धारित किया गया है। यह विषय न केवल भारतीय ज्ञान परंपरा और सनातन मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है, बल्कि वर्तमान शिक्षा प्रणाली की पुनर्संरचनात्मक दृष्टि को भी स्पष्ट रूप से रेखांकित करता है, जिसका ध्येय राष्ट्र को मानसिक दासता से मुक्त कर पुनर्निर्माण की ओर अग्रसर करना है।

कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाते हुए इसकी अध्यक्षता राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आनंद भालेराव करेंगे, जिनके कुशल मार्गदर्शन में इस विशाल आयोजन की रूपरेखा तैयार की गई है। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भारतीय शिक्षण मंडल के अखिल भारतीय संगठन मंत्री श्री बी. आर. शंकरानंद अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। साथ ही, विशिष्ट अतिथि के तौर पर भारतीय शिक्षण मंडल के अखिल भारतीय महामंत्री प्रो. भरत शरण सिंह एवं राजस्थान सरकार के माननीय शिक्षा मंत्री श्री मदन दिलावर शिरकत करेंगे।

समारोह की महत्ता को विस्तार देने हेतु अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख डॉ. संजय पाठक, राजस्थान क्षेत्र के क्षेत्रीय संयोजक प्रो. गजेंद्र पाल सिंह, राजस्थान विश्वविद्यालय की कुलगुरु एवं जयपुर प्रांत की अध्यक्ष प्रो. अल्पना कटेजा तथा जोधपुर प्रांत के प्रांत मंत्री श्री चंडीदान चारण सहित अन्य गणमान्य विभूतियां भी इस आयोजन का हिस्सा बनेंगी।

उल्लेखनीय है कि भारतीय शिक्षण मंडल की नींव वर्ष 1969 में राम नवमी के पावन अवसर पर रखी गई थी। वर्तमान में यह संगठन अपनी राष्ट्रवादी विचारधारा के साथ देश के 45 प्रांतों में सक्रियता से कार्य कर रहा है। कुलपति प्रो. आनंद भालेराव के नेतृत्व में आयोजित यह कार्यक्रम भारतीय शिक्षा के स्वदेशी दृष्टिकोण को सुदृढ़ करने की दिशा में एक सशक्त पहल माना जा रहा है, जो आने वाली पीढ़ियों को उनकी जड़ों से जोड़ने का महती कार्य करेगा।

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