फसल बीमा फर्जीवाड़ा: श्रीगंगानगर में ई-मित्र संचालकों और किसानों पर FIR के निर्देश
सूरतगढ़ के कालूसर में एक ही खसरे पर सात गुना अधिक क्षेत्र का फसल बीमा कराकर करीब 30 लाख रुपये का क्लेम लेने का मामला सामने आया। कृषि विभाग ने ई-मित्र संचालकों समेत कई लोगों पर FIR के निर्देश दिए हैं।

जयपुर, 19 अगस्त 2026। श्रीगंगानगर जिले की सूरतगढ़ तहसील के कालूसर गांव में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) के तहत फर्जी पॉलिसियां बनाकर बीमा क्लेम हासिल करने का मामला विभागीय जांच में सही पाया गया है। जांच में सामने आया कि एक ही खसरा नंबर की जमीन पर कई लोगों के नाम से फसल बीमा कराया गया और वास्तविक क्षेत्रफल से सात गुना अधिक क्षेत्र पर बीमा कराया गया। इस मामले में कृषि विभाग ने सीएससी (ई-मित्र) संचालकों और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की धाराओं में FIR दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।
कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने फर्जीवाड़े का प्रकरण संज्ञान में आने के बाद संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार), जिला परिषद श्रीगंगानगर को लगभग 30 लाख रुपये का बीमा क्लेम प्राप्त करने के अपराध में शामिल सीएससी (ई-मित्र) एवं दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध पुलिस थाने में प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज करवाकर कठोर कार्रवाई कराने के निर्देश दिए हैं।
कृषि आयुक्त श्री नरेश कुमार गोयल ने सूरतगढ़ तहसील के कृषक श्री बनवारी लाल पुत्र श्री सांवला, श्री रिछपाल पुत्र श्री गिरधारी एवं अन्य भागीदार किसानों, सीएससी (ई-मित्र) संचालक श्री विकास कुमार व श्री बिजेश तथा बीमा कंपनी के विरुद्ध पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता 2023 की धाराओं में FIR दर्ज करवाकर कठोर कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं।
जांच में फर्जीवाड़े का तरीका भी सामने आया। श्री बनवारी लाल ने स्वयं के खसरा नंबर 281/91 पर ऋणी किसान के रूप में 10.37 हेक्टेयर में मूंगफली फसल का बीमा कराया। इसी खसरा की जमीन पर सीएससी (ई-मित्र) संचालक श्री विकास कुमार से भी 10.37 हेक्टेयर में मूंगफली तथा श्री बिजेश से भी 10.3 हेक्टेयर में मूंगफली का अलग-अलग फसल बीमा कराया गया। श्री बनवारी लाल ने तीनों फसल बीमा पॉलिसियों पर कुल 23,35,319 रुपये का क्लेम प्राप्त किया।
इसी खसरा की जमीन श्री बनवारी लाल ने श्री रिछपाल पुत्र श्री गिरधारी को बटाई/लीज पर दी थी। श्री रिछपाल ने भी 10.37 हेक्टेयर में मूंगफली का बटाईदार किसान के रूप में फसल बीमा कराया। श्री रिछपाल ने भी 7,80,195 रुपये का फसल बीमा क्लेम प्राप्त किया।
इसी खसरा के 10.37 हेक्टेयर क्षेत्र में अन्य किसान श्री इमींचन्द पुत्र श्री महावीर, श्रीमती प्रमीला पत्नी श्री सुनील साहरण एवं श्री ओमप्रकाश पुत्र श्री राजाराम ने भी मूंगफली का फसल बीमा कराया था, लेकिन जिले की बीमा कंपनी ने इन पॉलिसियों को रिजेक्ट कर दिया। विभाग के अनुसार चयनित रूप से फसल बीमा पॉलिसियों को रिजेक्ट किया जाना बीमा कंपनी की संलिप्तता की पुष्टि करता है।
जांच के अनुसार एक ही खसरा पर अनेक पॉलिसियां जारी की गईं और खसरे के वास्तविक क्षेत्रफल से सात गुना अधिक क्षेत्र पर बीमा कराया गया था। विभाग का मानना है कि इस तरह का संगठित फर्जीवाड़ा सीएससी (ई-मित्र), बीमा कंपनी तथा संबंधित किसानों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है।
कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने स्पष्ट कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ केवल वास्तविक किसानों तक पहुंचे, इसके लिए विभाग दृढ़ है। फर्जी पॉलिसी जारी करने में शामिल बीमा कंपनी, सीएससी (ई-मित्र), सहयोगी किसानों, सक्रिय दलालों, बीमा कंपनी के कर्मचारियों तथा वित्तीय संस्थाओं के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता 2023 की धाराओं के अंतर्गत कठोर कार्रवाई के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा।
इससे पहले कृषि विभाग ने कल खरीफ 2026 के लिए टोंक जिले की मालपुरा तहसील और जयपुर जिले की शाहपुरा तहसील में फर्जी फसल बीमा कराने वाले ई-मित्र संचालक एवं दोषियों के विरुद्ध FIR दर्ज कर कार्रवाई की थी।
कृषि आयुक्त ने बताया कि इस बार कृषि विभाग ने कृषि बीमा पॉलिसी के साथ फार्मर आईडी को अनिवार्य किया है। इससे फर्जीवाड़ा करने वालों की तुरंत पहचान हो जाएगी। साथ ही ऐसे सभी किसान, जिन्होंने कृषि लोन नहीं लिया है तथा फसल बीमा कराया है, उन सभी मामलों की गहनता से जांच की जाएगी। कृषि विभाग ने ऑपरेशन क्लीन फसल बीमा चलाया है। राज्य सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। देश की इस सबसे बड़ी योजना के साथ किसी को भी खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा।
कृषि आयुक्त श्री गोयल ने सभी सीएससी (ई-मित्र) संचालकों, किसानों, दलालों, बीमा कर्मचारियों और वित्तीय संस्थाओं को आगाह किया है कि यदि किसी भी प्रकार का फर्जीवाड़ा पाया गया तो संबंधित विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई से कोई नहीं बच पाएगा। फर्जी तरीके से बनाई गई फसल बीमा पॉलिसियों को तत्काल निरस्त करवा लिया जाए, अन्यथा भारतीय न्याय संहिता 2023 के अंतर्गत कठोर कार्रवाई के लिए तैयार रहें।
कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि वह ईमानदार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ कोई नरमी नहीं बरतेगा। कृषि विभाग के अनुसार ऑपरेशन क्लीन फसल बीमा जारी रहेगा और फर्जीवाड़े में शामिल लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

