जयपुर में गूंजा 'हेमू कालाणी अमर रहे' का उद्घोष: 19 साल के उस क्रांतिकारी की शौर्य गाथा, जिसने फांसी के फंदे को चूमकर रचा इतिहास
जयपुर में अमर शहीद हेमू कालाणी का बलिदान दिवस श्रद्धापूर्वक मनाया गया। सिंधी समाज सहित विभिन्न संगठनों ने 35 से अधिक स्थानों पर पुष्पांजलि अर्पित कर 19 वर्षीय क्रांतिकारी की वीरता को याद किया। संत मोनू राम जी और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने सनातन धर्म, राष्ट्र निर्माण और युवा पीढ़ी में देशभक्ति के भाव जगाने पर जोर दिया। विस्तार से पढ़ें जयपुर की भावुक श्रद्धांजलि की पूरी रिपोर्ट।

जयपुर, 21 जनवरी 2026: "उनका जीवन छोटा सही, संकल्प महान था, देश प्रथम है यही हेमू कालाणी की पहचान था।" इन पंक्तियों के साथ आज गुलाबी नगरी जयपुर की फिजाओं में देशभक्ति का एक ऐसा ज्वार उमड़ा, जिसने हर नागरिक की आंखों को नम और सीने को गर्व से चौड़ा कर दिया। अविभाजित भारत के अमर शहीद और युवा क्रांतिकारी हेमू कालाणी के बलिदान दिवस पर आज राजधानी जयपुर के कोने-कोने में श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए। यह केवल एक समाज का कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्र की वेदी पर सर्वस्व न्योछावर करने वाले उस 19 वर्षीय किशोर के प्रति पूरे शहर की कृतज्ञता का प्रतीक बन गया।
भारतीय सिंधु सभा के ईश्वर मोरवानी ने बताया कि स्मृति उत्सव के तहत जयपुर के 35 से अधिक स्थानों पर विभिन्न पूज्य सिंधी पंचायतों द्वारा भावभीनी श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित की गईं। सिंधी कॉलोनी, राजा पार्क में आयोजित 'विराट हिंदू सम्मेलन और बलिदान दिवस समारोह' इस अवसर का मुख्य केंद्र रहा। पूज्य सिंधी पंचायत, अमरलाल साहब मंडल और अमर शहीद हेमू कालाणी सेवार्थ समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस गरिमामयी सभा में भक्ति और शक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। श्री अमरापुर दरबार के संत मोनू राम जी ने नई पीढ़ी में राष्ट्रप्रेम का बीजारोपण करने का आह्वान करते हुए कहा कि सनातन धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सत्य, अहिंसा, करुणा और कर्तव्य पर आधारित एक संपूर्ण जीवन शैली है।
पुरसना राम साहब मंडल के मुकेश साध साहब ने सनातन मूल्यों पर प्रकाश डालते हुए नई पीढ़ी को गीता और रामायण से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने "चंदन है इस देश की माटी..." के ओजस्वी गायन से उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया। इसी क्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अशोक शर्मा ने सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी और नागरिक कर्तव्य जैसे पांच स्तंभों पर आधारित राष्ट्र निर्माण का मंत्र साझा किया। विधिक दृष्टिकोण और सांस्कृतिक निष्ठा पर बात करते हुए एडवोकेट चंद्र प्रकाश खेतानी ने कहा कि अपनी संस्कृति के प्रति समर्पण ही शहीद हेमू कालाणी को सच्ची श्रद्धांजलि है।
इस स्मृति पर्व में दीपशिखा पब्लिक स्कूल और श्री राम पब्लिक स्कूल के छात्र-छात्राओं की उपस्थिति ने यह सिद्ध कर दिया कि हेमू कालाणी का बलिदान आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत है। कार्यक्रम का सफल संचालन पूर्व पार्षद लेखराज जेसवानी ने किया। दूसरी ओर, दादी का फाटक स्थित पूज्य सिंधी पंचायत कार्यालय पर भी दिलीप भूरानी, राजेश आहूजा, रणवीर राजावत और अशोक वासवानी की गरिमामयी उपस्थिति में वीर बलिदानी को याद किया गया। जयपुर की गलियां आज 'हेमू कालाणी अमर रहे' के नारों से गुंजायमान रहीं, जो इस बात का प्रमाण है कि राष्ट्र के लिए प्राण देने वाले कभी मरते नहीं, वे युगों-युगों तक जनमानस के संकल्पों में जीवित रहते हैं।

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