पंचायत-निकाय चुनाव में नामांकन के साथ ‘नो-ड्यूज’ अनिवार्य करने की मांग
जयपुर में सहकार नेता सूरज भान सिंह आमेरा ने पंचायत व निकाय चुनाव में नामांकन के साथ सहकारी बैंकों और समितियों का नो-ड्यूज अनिवार्य करने की मांग की है। जानिए मांग के पीछे क्या वजह बताई गई है।

जयपुर में पंचायत एवं निकाय चुनावों के बीच सहकारी ऋण बकायादारों को लेकर ऑल राजस्थान को-ऑपरेटिव बैंक एम्पलाईज यूनियन और सहकारी साख समितियाँ एम्पलाईज यूनियन राजस्थान ने अहम मांग उठाई है। दोनों संगठनों ने पंचायत एवं निकाय चुनाव में नामांकन पत्र के साथ सहकारी बैंकों और समितियों से संबंधित ‘नो-ड्यूज/अनापत्ति प्रमाण पत्र’ अनिवार्य करने की मांग की है।
ऑल राजस्थान को-ऑपरेटिव बैंक एम्पलाईज यूनियन के महासचिव और सहकारी साख समितियाँ एम्प्लाइज यूनियन राजस्थान के अध्यक्ष सहकार नेता सूरज भान सिंह आमेरा ने 26 अगस्त 2026 को राज्य निर्वाचन आयुक्त, मुख्यमंत्री एवं रजिस्ट्रार, सहकारिता को पत्र लिखकर यह मांग रखी।
आमेरा ने मांग की है कि निकाय एवं ग्राम पंचायत चुनावों के नामांकन पत्र के साथ ग्राम सेवा सहकारी समिति (PACS/LAMPS), प्राथमिक सहकारी भूमि विकास बैंक, केन्द्रीय सहकारी बैंक (CCB) एवं अपैक्स बैंक के ऋण बकाया से संबंधित ‘नो-ड्यूज/अनापत्ति प्रमाण पत्र’ को अनिवार्य दस्तावेज के रूप में लागू किया जाए।
प्रांतीय महासचिव सूरज भान सिंह आमेरा ने बताया कि प्रदेश की 9000 से अधिक सहकारी पैक्स/लैम्पस, 36 पीएलडीबी एवं 29 जिला सहकारी बैंकों में हजारों करोड़ रुपये का अवधिपार ऋण बकाया है। उन्होंने कहा कि अनेक बड़े बकायादार ही चुनावों में प्रत्याशी बन जाते हैं, जिससे ऋणों की वसूली बाधित होती है।
आमेरा के अनुसार, यदि चुनाव नामांकन के साथ नो-ड्यूज अनिवार्य किया जाता है तो बकाया सहकारी ऋणों की वसूली में स्वतः तेजी आएगी। इससे सहकारी बैंकों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और एनपीए घटेगा। साथ ही ईमानदार जरूरतमंद किसान को लाभ मिलेगा तथा सहकारी संस्थाएं मजबूत होंगी।
सहकार नेता आमेरा ने कहा कि यह कदम ‘सहकार से समृद्धि’ के लक्ष्य को पूरा करने में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह किसी को चुनाव से रोकने का प्रयास नहीं, बल्कि प्रदेश के सहकारी साख सिस्टम को बचाने का प्रयास है।
26 अगस्त 2026 को जयपुर से जारी प्रेस नोट के माध्यम से सूरज भान सिंह आमेरा ने इस मांग को राज्य निर्वाचन आयुक्त, मुख्यमंत्री एवं रजिस्ट्रार, सहकारिता के समक्ष रखा है। चुनावी नामांकन के साथ सहकारी ऋणों का नो-ड्यूज अनिवार्य करने की मांग का केंद्र प्रदेश की सहकारी साख व्यवस्था में बकाया ऋणों की वसूली और सहकारी संस्थाओं की आर्थिक स्थिति से जुड़ा है।

