ई-वे बिल में गड़बड़ी पर सख्ती, नागौर-चित्तौड़गढ़ में तीन वाहनों की जांच से लाखों की कार्रवाई
नागौर और चित्तौड़गढ़ में तीन वाहनों की जांच में ई-वे बिल और कर दस्तावेजों की गंभीर गड़बड़ियां मिलीं, एक मामले में ₹5.46 लाख पेनल्टी।

तस्वीर में वाणिज्यिक कर विभाग के अधिकारी राजमार्ग पर माल परिवहन करने वाले वाहनों की जांच करते हुए दिखाई दे रहे हैं।
माल परिवहन के दौरान ई-वे बिल, वैध कर चालान और अन्य आवश्यक दस्तावेजों में अनियमितताओं के मामलों में वाणिज्यिक कर विभाग ने नागौर और चित्तौड़गढ़ जिलों में सख्त कार्रवाई की है। विभागीय अधिकारियों की विभिन्न मार्गों पर की गई जांच में तीन वाहनों से संबंधित मामलों में कर दस्तावेजों में गंभीर विसंगतियां सामने आईं। इनमें एक मामले में ₹5,46,480 की आईजीएसटी पेनल्टी निर्धारित कर जमा कराई गई, जबकि अन्य मामलों में भौतिक सत्यापन और आगे की जांच जारी है।
नागौर सर्किल में दिल्ली से बेंगलुरु की ओर जा रहे एक वाहन की जांच के दौरान उसमें Synthetic Flavouring Essences का परिवहन पाया गया। जांच में माल के साथ वैध इनवॉइस और ई-वे बिल उपलब्ध नहीं मिला। चालक द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों में माल का मूल्य ₹70,800 और कर राशि ₹10,800 दर्शाई गई थी। भौतिक सत्यापन के दौरान माल का मूल्य ₹15.18 लाख निर्धारित किया गया। इसके बाद विभाग ने कार्रवाई करते हुए ₹5,46,480 की आईजीएसटी पेनल्टी निर्धारित की, जिसे अधिकृत प्रतिनिधि द्वारा जमा कराया गया।
इसी तरह नागौर सर्किल के अमरपुरा क्षेत्र में वाहन संख्या RJ19GL9100 को जांच के लिए रोका गया। वाहन जोधपुर से बागपत, उत्तर प्रदेश की ओर जीरा और सरसों का परिवहन कर रहा था। जांच के दौरान वाहन के साथ ई-वे बिल उपलब्ध नहीं मिला। प्रस्तुत बिल के अनुसार माल का कर-पूर्व मूल्य ₹25.15 लाख और कर राशि ₹1,25,750 थी। विभाग ने दोनों संबंधित फर्मों की स्थिति की प्रारंभिक जांच की है और फिलहाल माल का भौतिक सत्यापन किया जा रहा है। सत्यापन के बाद माल के वास्तविक बाजार मूल्य और कर देयता का निर्धारण किया जाएगा।
चित्तौड़गढ़ सर्किल में पालखेड़ी, NH-48 क्षेत्र में वाहन संख्या RJ27GD6565 को जांच के लिए रोका गया। वाहन दिल्ली से अहमदाबाद की ओर SS Utensils और Electronic Items लेकर जा रहा था। भौतिक सत्यापन तथा दस्तावेजों की जांच में घोषित मात्रा की तुलना में 18 गैस स्टोव और 48 लीटर सोल्डरिंग फ्लक्स अतिरिक्त पाया गया।
जांच के दौरान 24 इनवॉइस में बोवेब पोर्टल के अनुसार अमान्य प्राप्तकर्ताओं का विवरण भी पाया गया। इसके अलावा 9 मामलों में आपूर्तिकर्ताओं द्वारा ई-इनवॉइस जारी नहीं किए जाने की बात सामने आई। प्रारंभिक जांच में कुछ इनवॉइस का मूल्य कम दर्शाया गया प्रतीत हुआ, जिससे ई-वे बिल जनरेशन की देयता से बचने की आशंका बनी।
प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार माल का कर योग्य मूल्य ₹4,22,940 था, जबकि प्रकरण में विभाग द्वारा ₹9,30,300 की संभावित कर/दायित्व राशि निर्धारित की गई है। मामले में आगे की जांच और नियमानुसार कार्रवाई जारी है।
वाणिज्यिक कर विभाग ने स्पष्ट किया है कि माल के अंतरराज्यीय और राज्य के भीतर परिवहन के दौरान ई-वे बिल, वैध टैक्स इनवॉइस, ई-इनवॉइस तथा वास्तविक माल की मात्रा और मूल्य में पारदर्शिता सुनिश्चित करना अनिवार्य है। विभागीय प्रवर्तन दल प्रमुख राजमार्गों और संवेदनशील मार्गों पर वाहनों की लगातार जांच कर रहे हैं।
विभाग की कार्रवाई का उद्देश्य कर चोरी तथा फर्जी या अमान्य दस्तावेजों के माध्यम से कर अपवंचन पर प्रभावी अंकुश लगाने के साथ ईमानदार करदाताओं के लिए समान और पारदर्शी कारोबारी वातावरण सुनिश्चित करना है।

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