राजस्थान में रेल अवसंरचना विस्तार के तहत एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज करते हुए दूधवाखारा–सादुलपुर (30 किलोमीटर) रेलखंड का दोहरीकरण कार्य पूर्ण कर लिया गया है, जिसके साथ ही चूरू–सादुलपुर (58 किलोमीटर) रेलमार्ग पूरी तरह दोहरीकृत हो गया है। रेलवे ने चूरू–रतनगढ़ और चूरू–सादुलपुर रेलमार्ग के दोहरीकरण कार्य को रिकार्ड समय में पूरा कर एक नई उपलब्धि हासिल की है।

रेल यात्रियों की संख्या और व्यस्त मार्गों को ध्यान में रखते हुए भारतीय रेलवे द्वारा महत्वपूर्ण रेलमार्गों के दोहरीकरण का कार्य निरंतर किया जा रहा है, ताकि अधिक रेलसेवाओं का संचालन सुनिश्चित हो सके, यात्रियों को बेहतर सुविधा मिले और समय की बचत हो। राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं तथा धार्मिक एवं ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण चूरू–सादुलपुर रेलमार्ग का दोहरीकरण पूरा होने से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को नया विस्तार मिला है।

उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी अमित सुदर्शन के अनुसार, महाप्रबंधक उत्तर पश्चिम रेलवे श्री अमिताभ के निर्देशानुसार दूधवाखारा–सादुलपुर (30 किलोमीटर) रेलखंड का दोहरीकरण कार्य पूर्ण किया गया है। रेल संरक्षा आयुक्त द्वारा दिनांक 28.04.2026 को इस खंड को रेल संचालन के लिए अनुमोदन प्रदान किया गया। इस परियोजना के साथ ऑटोमैटिक सिग्नलिंग एवं विद्युतीकरण कार्य भी सफलतापूर्वक पूर्ण किए गए हैं। इसके साथ ही 58 किलोमीटर लंबे चूरू–सादुलपुर खंड का संपूर्ण दोहरीकरण, ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग तथा विद्युतीकरण सहित मात्र 2 वर्ष 3 महीने में पूरा किया गया है, जिससे लाइन क्षमता एवं परिचालन गतिशीलता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

इस परियोजना के अंतर्गत 5 स्टेशनों पर हाई लेवल प्लेटफॉर्म तथा 3 सब-वे का निर्माण भी किया गया है। रेलमार्ग को 130 किलोमीटर प्रति घंटे की गति क्षमता के अनुसार विकसित किया गया है। वर्ष 2023-24 में 469 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृत यह परियोजना लगभग 2 वर्षों के रिकॉर्ड समय में पूर्ण की गई है।

इसी क्रम में चूरू–रतनगढ़ (43 किलोमीटर) रेलमार्ग का दोहरीकरण कार्य भी 2 वर्षों में पूर्ण किया जा चुका है। इस प्रकार उत्तर पश्चिम रेलवे के दो प्रमुख रेलमार्गों का दोहरीकरण लगातार दो वर्षों में पूरा किया गया है, जिससे क्षेत्रीय रेल नेटवर्क को नई मजबूती मिली है।

दोहरीकरण के बाद रतनगढ़–चूरू–सादुलपुर रेलमार्ग राजस्थान, हरियाणा एवं अन्य उत्तर भारतीय राज्यों के बीच तीव्र रेल संचालन का एक महत्वपूर्ण मार्ग बन जाएगा। इससे चूरू और रतनगढ़ क्षेत्र का सीकर, बीकानेर, रेवाड़ी, हिसार एवं अन्य राज्यों से संपर्क सशक्त होगा, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा तथा रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। प्रतिदिन आवागमन करने वाले यात्रियों, विद्यार्थियों तथा कोचिंग एवं उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत छात्रों को बेहतर रेल सुविधा प्राप्त होगी। बीकानेर संभाग में जिप्सम, लाइम स्टोन, खाद्यान्न एवं उर्वरक के लदान हेतु सुगम परिवहन उपलब्ध होगा। सालासर बालाजी और खाटूश्यामजी जैसे धार्मिक स्थलों के श्रद्धालुओं के लिए यात्रा और अधिक सुगम होगी, वहीं सामाजिक एवं व्यापारिक संबंधों को भी मजबूती मिलेगी। भारतीय सेना में कार्यरत सैनिकों सहित आम नागरिकों के लिए भी आवागमन अधिक सुगम होगा।

रेलवे द्वारा इंफ्रास्ट्रक्चर सुदृढ़ कर यात्रियों को अधिकतम सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा क्षेत्रीय विकास को गति देने के उद्देश्य से निरंतर योजनाबद्ध कार्य किए जा रहे हैं, जिसका यह दोहरीकरण एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।

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