जयपुर। राजस्थान के चूरू जिले की रतनगढ़ थाना पुलिस ने साइबर अपराधियों और संदिग्ध बैंक खातों के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष 'म्यूल हंटर' अभियान के तहत एक बड़ी सफलता अर्जित की है। चूरू जिला पुलिस अधीक्षक निश्चय प्रसाद एम. के कुशल निर्देशन में त्वरित कार्यवाही करते हुए पुलिस टीम ने साइबर फ्रॉड का शिकार हुए एक पीड़ित के ठगे गए कुल 15,00,000 रुपये उसके बैंक खाते में सकुशल रिफंड करवा दिए हैं। यह पूरी कार्रवाई अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुजानगढ़ सतपाल सिंह एवं वृत्ताधिकारी रतनगढ़ इनसार अली के सुपरविजन तथा रतनगढ़ थानाधिकारी गौरव खिड़िया के नेतृत्व में अंजाम दी गई, जिसने पुलिस की सजगता और तकनीकी दक्षता को साबित किया है।

इस पूरे सनसनीखेज घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब 8 अक्टूबर 2025 को परिवादिया मंजु कंवर पत्नी गोविंद सिंह ने साइबर पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित गोविंद सिंह ने जुलाई 2025 में गूगल पर 'PURE Energy Private Limited' (तेलंगाना) का एक विज्ञापन देखा था, जिसके झांसे में आकर उन्होंने पूरे राजस्थान की इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर डीलरशिप हासिल करने के लिए ऑनलाइन आवेदन कर दिया। इसके पश्चात कंपनी के कथित प्रतिनिधियों ने सोची-समझी साजिश के तहत पीड़ित को अपने जाल में फंसाया और टोकन मनी व प्री-रजिस्ट्रेशन के नाम पर दो अलग-अलग किश्तों में कुल 15 लाख रुपये अपने बैंक खाते में ट्रांसफर करवा लिए। मोटी रकम ऐंठने के बाद कंपनी अपने वादे से मुकर गई और पूरे राजस्थान के स्थान पर सिर्फ चूरू की डीलरशिप देने की बात कहने लगी। हद तो तब हो गई जब पीड़ित की फर्म 'कृष्णा बिजनेस एवं प्रॉपर्टीज' को बिना कोई माल डिलीवर किए ही कंपनी के कारिंदों ने पीड़ित का फोन उठाना तक बंद कर दिया।

धोखाधड़ी का अहसास होने पर जब मामला पुलिस के पास पहुंचा, तो थानाधिकारी गौरव खिड़िया और उनकी टीम ने बिना वक्त गंवाए राष्ट्रीय साइबर पोर्टल 1930 के माध्यम से स्थानांतरित की गई राशि के रूट को खंगालना शुरू किया। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए विभिन्न बैंकों और साइबर पोर्टल के नोडल अधिकारियों से तत्काल संपर्क साधा और ठगी गई 15 लाख रुपये की पूरी राशि को होल्ड करवा दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए रतनगढ़ थाने में बाकायदा एफआईआर दर्ज की गई और इस हाई-टेक मामले का अनुसंधान सहायक उप निरीक्षक रामनिवास को सौंपा गया। जांच अधिकारी रामनिवास ने कंपनी के दावों और आधिकारिक ई-मेल्स का गहन तकनीकी विश्लेषण किया। जांच के दौरान कंपनी लगातार यह झूठा दावा कर रही थी कि उसने वाहन भिजवा दिए हैं, लेकिन पुलिसिया अनुसंधान और तकनीकी साक्ष्यों ने कंपनी के इस सफेद झूठ को बेनकाब कर दिया। मामला पूरी तरह से वित्तीय धोखाधड़ी (सिविल नेचर) का प्रमाणित होने पर पुलिस द्वारा अंतिम रिपोर्ट माननीय न्यायालय में पेश की गई। इसके बाद माननीय एसीजेएम कोर्ट रतनगढ़ के आदेश पर पुलिस ने अग्रिम विधिक कार्यवाही को अंजाम देते हुए पीड़ित के पूरे 15 लाख रुपये उसके खाते में वापस लौटाए। इस बेहद जटिल रिकवरी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम देने में कांस्टेबल महेंद्र (344) और कांस्टेबल मुकेश (340) ने विशेष तकनीकी सूझबूझ दिखाते हुए अत्यंत सराहनीय व मुख्य भूमिका निभाई है। पुलिस की इस त्वरित और ठोस कार्रवाई ने न केवल साइबर अपराधियों के हौसले पस्त किए हैं, बल्कि आमजन में पुलिस तंत्र के प्रति विश्वास को और अधिक सुदृढ़ किया है।

Pratahkal Newsroom

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