चित्तौड़गढ़ पुलिस और जिला स्पेशल टीम (डीएसटी) ने महिलाओं के चांदी के कड़े और अन्य जेवर लूटने तथा मंदिरों से सोने-चांदी के छत्र, प्रतिमाएं और दानपात्र चोरी करने वाली अंतरराज्यीय गैंग का पर्दाफाश करते हुए तीन शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने राजस्थान और मध्यप्रदेश में 30 से अधिक वारदातों को अंजाम देना स्वीकार किया है। गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ पहले भी चोरी, लूट और मंदिरों में चोरी के कई प्रकरण दर्ज हैं।

महानिदेशक पुलिस श्री राजीव कुमार शर्मा के निर्देशानुसार प्रदेशभर में संगठित अपराधों के खिलाफ चल रही कार्रवाई के तहत चित्तौड़गढ़ जिला स्पेशल टीम और पुलिस थाना कोतवाली चित्तौड़गढ़ की संयुक्त टीम ने यह कार्रवाई की। महिलाओं के पहने हुए जेवर लूटने और रात के समय मंदिरों में होने वाली चोरी की वारदातों पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस अधीक्षक चित्तौड़गढ़ धर्मेन्द्र सिंह के निर्देश पर विशेष टीम गठित की गई थी। टीम का गठन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गजेन्द्र जोधा और वृताधिकारी चित्तौड़गढ़ बृजेश सिंह के सुपरविजन में किया गया। इसमें थाना कोतवाली के थानाधिकारी रजनीश कुमार, जिला स्पेशल टीम चोरी निरोधक टीम से इंस्पेक्टर जोधाराम और डीएसटी प्रभारी रामावतार के नेतृत्व में थाना पुलिस तथा डीएसटी की विशेष टीम शामिल थी।

मामले की शुरुआत 13 अगस्त 2026 की रात आछोड़ा गांव में हुई लूट की वारदात से हुई। नानूलाल रैगर की रिपोर्ट के अनुसार कुछ बदमाश घर में घुस आए और उसके वृद्ध माता-पिता को धमकाकर उनके जेवर लूट लिए। बदमाशों ने 75 वर्षीय मां के पैरों से चांदी के कड़े निकालने के लिए उसके साथ मारपीट की। इसके साथ ही पिता का मोबाइल और हाथ की घड़ी भी लूट ली।

घटना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने गांव से हाईवे तक के रास्तों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। इसी तरह की पूर्व वारदातों में चालानशुदा अपराधियों का रिकॉर्ड जुटाकर संदिग्धों पर निगरानी रखी गई। तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर तंत्र के आधार पर पुलिस को पता चला कि संदिग्ध बदमाश अपने स्थायी ठिकानों पर नहीं रह रहे थे और लगातार स्थान बदल रहे थे।

डीएसटी टीम ने संदिग्धों की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी। सादा कपड़ों में मैली वेशभूषा धारण कर ठेकों और अड्डों पर भी निगरानी की गई। लगातार निगरानी के साथ तकनीकी और मानवीय सूचना के आधार पर पुलिस ने गैंग के तीन सदस्यों को दबोच लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कालू पुत्र सुखा कालबेलिया निवासी कालीछांट थाना गंगरार, तेजपाल उर्फ तेजु पुत्र मिठ्ठुलाल कालबेलिया निवासी पारसोली तथा सुरेश पुत्र प्रभुलाल कालबेलिया निवासी गोराजी का निम्बाहेड़ा थाना कपासन, हाल केकड़ी के रूप में हुई है।

पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने अब तक 30 वारदातों में संलिप्तता स्वीकार की है। इनमें चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा और प्रतापगढ़ सहित मध्यप्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं के जेवर लूटने, घरों में चोरी करने तथा मंदिरों से दानपात्र, चांदी के छत्र और अन्य आभूषण चोरी करने की घटनाएं शामिल हैं। मध्यप्रदेश के रतनगढ़, सिगोली और अन्य क्षेत्रों में भी चोरी की घटनाओं का खुलासा हुआ है।

गिरोह के निशाने पर रात के समय मंदिर भी रहते थे। आरोपियों ने विभिन्न स्थानों पर मंदिरों से चांदी के छत्र, दानपात्र की नकदी, मूर्तियों से जुड़े आभूषण और अन्य कीमती सामान चोरी किए। प्रतापगढ़ क्षेत्र के एक देवनारायण मंदिर से करीब 1.50 लाख रुपये नकद और चांदी का छत्र चोरी करने की वारदात का भी खुलासा हुआ है। इसके अलावा भीलवाड़ा क्षेत्र के मंदिरों और माण्डलगढ़ के जैन मंदिर से चांदी के छत्र चोरी करने की घटनाएं भी सामने आई हैं।

गिरफ्तार आरोपी पहले से ही आपराधिक गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं। कालू के खिलाफ मंदिरों में चोरी, महिलाओं के जेवर लूटने और चोरी के एक दर्जन से अधिक प्रकरण दर्ज बताए गए हैं। वहीं सुरेश के खिलाफ मंदिरों में चोरी, महिलाओं के जेवर लूटने और चोरी से संबंधित छह प्रकरण दर्ज हैं। अन्य आरोपी के आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।

पुलिस ने आरोपियों से चोरी का माल बरामद किया है और उनसे पूछताछ जारी है। पूछताछ पूरी होने के बाद गिरोह से जुड़ी अन्य वारदातों और इसके नेटवर्क के संबंध में और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं। प्रकरण में अग्रिम अनुसंधान जारी है।

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