चित्तौड़गढ़: मेवाड़ कुमावत समाज महाकुंभ 2025 का भव्य शुभारंभ, राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने संस्कृति और विरासत के संरक्षण का दिया संदेश
चित्तौड़गढ़ के मण्डफिया में आयोजित मेवाड़ कुमावत समाज महाकुंभ 2025 का राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने शुभारंभ किया। उन्होंने कुमावत समाज को भारतीय शिल्प व स्थापत्य संस्कृति का संवाहक बताते हुए शिक्षा, विरासत संरक्षण और सामाजिक एकता पर जोर दिया।

जयपुर, 28 दिसंबर।
चित्तौड़गढ़ जिले के मण्डफिया में रविवार को मेवाड़ कुमावत समाज की ऐतिहासिक एकता और सांस्कृतिक चेतना का सजीव दृश्य देखने को मिला, जब राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने “मेवाड़ कुमावत समाज महाकुंभ 2025” का विधिवत शुभारंभ किया। समाजजनों, जनप्रतिनिधियों और गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में आयोजित इस महाकुंभ ने मेवाड़ की समृद्ध परंपराओं और शिल्प विरासत को नए सिरे से रेखांकित किया।
उद्घाटन अवसर पर राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने कहा कि कुमावत केवल एक समाज नहीं, बल्कि भारतीय शिल्प, स्थापत्य और निर्माण कला से जुड़ी एक जीवंत संस्कृति है। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि इस समाज का नामकरण महाराणा कुम्भा द्वारा किया गया था, जो स्वयं कला, संगीत और स्थापत्य के महान संरक्षक रहे। राज्यपाल ने नई पीढ़ी से अपनी विरासत, पारंपरिक कलाओं और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
राज्यपाल ने शिक्षा को विकास की आधारशिला बताते हुए कहा कि कोई भी समाज तभी आगे बढ़ता है, जब वह शिक्षा को प्राथमिकता देता है और कुरीतियों व अंधविश्वास से मुक्त होने का सतत प्रयास करता है। उन्होंने मेवाड़ की सांस्कृतिक पहचान में कुमावत समाज के ऐतिहासिक योगदान की चर्चा करते हुए कहा कि चित्तौड़गढ़ का कीर्ति स्तंभ, कुंभलगढ़ दुर्ग और हवामहल जैसे स्थापत्य चमत्कार इसी समाज के कुशल वास्तुविदों और शिल्पियों की देन हैं।
अपने संबोधन में राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने समाज की सामाजिक एकता, शिक्षा के प्रति जागरूकता, संस्कारों और सेवा कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के महाकुंभ न केवल समाज को संगठित करते हैं, बल्कि सांस्कृतिक मूल्यों को भी सशक्त आधार प्रदान करते हैं। उन्होंने युवाओं से शिक्षा, कौशल विकास और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय सहभागिता निभाने का आह्वान करते हुए कार्यक्रम को भविष्य की दिशा तय करने वाला बताया।
कार्यक्रम के समापन पर यह संदेश स्पष्ट रूप से उभरा कि मेवाड़ कुमावत समाज महाकुंभ 2025 केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति और सामाजिक चेतना को जोड़ने वाला एक सशक्त मंच है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा।
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