विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय में विशेष प्रदर्शनी, राष्ट्रीय एकता का संदेश
राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर प्रदर्शनी हुई, जिसमें 1947 की पीड़ा और विस्थापन की स्मृतियां साझा की गईं।

तस्वीर में राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय परिसर में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए कुलपति प्रो. आनंद भालेराव और अन्य गणमान्य लोग नजर आ रहे हैं।
राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय परिसर में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर वर्ष 1947 के विभाजन की पीड़ा, विस्थापन और मानवीय त्रासदी को स्मरण करते हुए विशेष कार्यक्रम एवं प्रदर्शनी आयोजित की गई। प्रदर्शनी का उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आनंद भालेराव ने किया।
प्रदर्शनी में वर्ष 1947 के विभाजन के दौरान आमजन द्वारा झेली गई पीड़ा, विस्थापन, संघर्ष, असुरक्षा और मानवीय त्रासदी को सूचनात्मक प्रदर्शनी पैनलों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। इस अवसर पर कुलपति प्रो. आनंद भालेराव ने विभाजन के उस पीड़ादायक दौर की अनेक कठिन स्मृतियों और घटनाओं को साझा किया।
कुलपति ने कहा कि विभाजन केवल भू-भाग का बंटवारा नहीं था, बल्कि यह लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित करने वाली एक गहरी मानवीय त्रासदी थी। उस दौर में लोगों को अपने घर-परिवार, अपनी जमीन और अपनों से बिछड़ने का दर्द झेलना पड़ा।
उन्होंने उस समय की परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि किस प्रकार समाज में हिंदू और मुस्लिम समुदायों को अलग करने तथा विभाजन की भावना को बढ़ाने के प्रयास किए गए, जिसका सबसे अधिक पीड़ादायक प्रभाव आम नागरिकों पर पड़ा। उन्होंने उस दौर से जुड़े कई प्रसंगों और घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इतिहास की इन स्मृतियों को समझना इसलिए आवश्यक है, ताकि अतीत की त्रासदियों से सीख लेकर भविष्य में सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता को और मजबूत किया जा सके।
प्रो. आनंद भालेराव ने कहा, “विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस केवल अतीत को स्मरण करने का दिवस नहीं है, बल्कि उस दौर की कठिन स्मृतियों के माध्यम से अपनी राष्ट्रीय चेतना को जीवित रखने और भारत के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का स्मरण करने का अवसर भी है।”
कार्यक्रम में बांदरसिंदरी गांव के वरिष्ठ नागरिकों ने भी सहभागिता की। इनमें ऐसे वरिष्ठ नागरिक शामिल रहे, जिन्होंने विभाजन के दौर को देखा और उस समय की परिस्थितियों को अनुभव किया। उन्होंने अपनी स्मृतियां और अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने उस समय के भारत से लेकर आज के बदलते भारत तक के सफर को अपनी आंखों से देखा है। उनके संस्मरणों ने प्रदर्शनी को और अधिक जीवंत एवं भावनात्मक बना दिया।
इस अवसर पर केंद्रीय विद्यालय के कक्षा 6 से 12वीं तक के विद्यार्थियों ने भी प्रदर्शनी का अवलोकन किया। विद्यार्थियों ने अत्यंत उत्सुकता के साथ प्रदर्शनी को देखा और विषय को समझने के लिए अनेक प्रश्न किए। उनकी जिज्ञासा से यह अनुभव हुआ कि उन्होंने इतिहास के इस महत्वपूर्ण अध्याय को समझने और आत्मसात करने का गंभीर प्रयास किया। कार्यक्रम में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर आधारित एक चलचित्र का प्रदर्शन भी किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य केवल विभाजन की त्रासदी को याद करना नहीं, बल्कि इतिहास से सीख लेते हुए वर्तमान पीढ़ी में राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी, मानवीय संवेदना, सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता और अखंडता की भावना को और सुदृढ़ करना रहा।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के अधिकारियों, शिक्षकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों एवं विश्वविद्यालय समुदाय के सदस्यों ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर कार्यक्रम को सफल बनाया। कार्यक्रम का संचालन जनसंपर्क अधिकारी श्रीमती अनुराधा मित्तल ने किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ।

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