राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय में 18वीं राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिता, 55 विद्यार्थियों ने उठाए राष्ट्रीय मुद्दे
संसदीय कार्य मंत्रालय के सौजन्य से आयोजित इस प्रतियोगिता में 55 छात्रों ने शिक्षा सुधार, राष्ट्रीय सुरक्षा और अरावली संकट जैसे समसामयिक विषयों पर चर्चा की।

राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय में 23 अक्टूबर 2026 को 18वीं राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिता आयोजित की गई।
राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय में 23 अक्टूबर, 2026 को भारत सरकार के संसदीय कार्य मंत्रालय के प्रायोजन में 18वीं राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में 55 विद्यार्थियों ने संसदीय भूमिकाएं निभाते हुए शिक्षा सुधार, राष्ट्रीय सुरक्षा, भारत की विदेश नीति, कृषि, एच-1बी वीजा नीतियों, अरावली संकट और पंजाब में नशीले पदार्थों की समस्या सहित कई समसामयिक मुद्दों पर चर्चा की। आयोजन का उद्देश्य युवाओं में लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक जागरूकता और संसदीय प्रक्रियाओं की समझ विकसित करना तथा उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय विषयों पर सार्थक विचार-विमर्श का मंच उपलब्ध कराना था।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आनंद भालेराव के नेतृत्व में आयोजित इस प्रतियोगिता ने संवाद, लोकतांत्रिक सहभागिता और विचारपूर्ण विमर्श के महत्व को रेखांकित किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रो. आनंद भालेराव ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर की ऐसी प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों में लोकतांत्रिक चेतना विकसित करने और भावी नेतृत्व तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की प्रतियोगिता की मेजबानी करना विश्वविद्यालय के लिए युवाओं में लोकतांत्रिक मूल्यों का विकास करने और देश के भावी नेतृत्व को तैयार करने का महत्वपूर्ण अवसर है। विश्वविद्यालय अपने शैक्षणिक पाठ्यक्रम के माध्यम से भी विद्यार्थियों में इन मूल्यों को विकसित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सीकर, राजस्थान से पूर्व सांसद स्वामी सुमेधानंद सरस्वती ने संसदीय कार्यप्रणाली को समझने और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर विचार-विमर्श करने में विद्यार्थियों की गहरी रुचि की सराहना की। लोकतांत्रिक संवाद के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र भारत की राजनीतिक व्यवस्था का आधार है और संसदीय बहस एवं चर्चाएं युवाओं की दृष्टि तथा भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
प्रतियोगिता में संसदीय कार्य मंत्रालय से प्रतियोगिता के समूह समन्वयक श्री पुनीत पाठक और राजकीय महाविद्यालय, अजमेर में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर प्रो. मनोज अवस्थी अतिथि एवं निर्णायक के रूप में शामिल हुए।
प्रतियोगिता के तहत आयोजित प्रतीकात्मक संसदीय सत्र में कुल 55 विद्यार्थियों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने सरकार के मंत्रियों, विपक्षी सदस्यों, विदेशी प्रतिनिधियों, प्रेस प्रतिनिधियों, अध्यक्ष, मार्शल और संसदीय कार्यालय के कर्मचारियों सहित विभिन्न संसदीय एवं संस्थागत भूमिकाओं का निर्वहन किया। स्थापित संसदीय परंपराओं के अनुरूप आयोजित सत्र में प्रश्नकाल, शून्यकाल और नियम 193 के अंतर्गत चर्चा हुई। इस प्रक्रिया से विद्यार्थियों को विधायी प्रक्रियाओं और संसदीय कार्यप्रणाली का व्यावहारिक अनुभव मिला।
सत्र के दौरान शिक्षा सुधार, विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA), एच-1बी वीजा नीतियों, भारत की विदेश नीति, कृषि, राष्ट्रीय सुरक्षा, इथेनॉल से संबंधित मुद्दों, अरावली संकट और पंजाब में नशीले पदार्थों की समस्या सहित जनहित से जुड़े अनेक समसामयिक विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। इन चर्चाओं के माध्यम से प्रतिभागियों को अपने विचार तार्किक ढंग से प्रस्तुत करने, विभिन्न दृष्टिकोणों का आलोचनात्मक विश्लेषण करने और रचनात्मक एवं तथ्यपरक संवाद में भाग लेने का अवसर मिला।
प्रतियोगिता ने सैद्धांतिक ज्ञान और संसदीय लोकतंत्र की व्यावहारिक समझ के बीच की दूरी कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विभिन्न संसदीय भूमिकाओं का निर्वहन करते हुए विद्यार्थियों ने विधायी बहस, जनसंचार, टीमवर्क, प्रक्रियागत अनुशासन और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व से जुड़ी जिम्मेदारियों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त किया। इस अभ्यास से विद्यार्थियों में आलोचनात्मक चिंतन, संवैधानिक जागरूकता, पारस्परिक सम्मान और विभिन्न मतों के प्रति सहिष्णुता को भी प्रोत्साहन मिला।
इस पहल के माध्यम से राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय ने लोकतांत्रिक मूल्यों, नागरिक उत्तरदायित्व और युवा नेतृत्व को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। प्रतियोगिता का समन्वय संकाय समन्वयक डॉ. ज्ञान रंजन पांडा ने किया। आयोजन में पांच विद्यार्थी समन्वयकों आदित्य सिंह, गौरांशी हांडा, निहारिका सोमावत, प्रिया यादव और सर्वेश प्रियदर्शी ने महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया।

