जयपुर में नीरजा मोदी स्कूल की CBSE मान्यता रद्द, संयुक्त अभिभावक संघ ने मनाया जश्न और दी नन्ही अमायरा को श्रद्धांजलि
जयपुर में नीरजा मोदी स्कूल की CBSE मान्यता रद्द। संयुक्त अभिभावक संघ ने पटाखे फोड़कर जश्न मनाया और नन्ही अमायरा को श्रद्धांजलि दी। बोर्ड ने बाल सुरक्षा मानकों की अनदेखी, एंटी-बुलिंग और काउंसलिंग की कमी को स्वीकार किया। अभिभावकों की एकजुटता ने शिक्षा संस्थानों के लिए सख्त संदेश भेजा।

जयपुर। नीरजा मोदी स्कूल, जयपुर के विरुद्ध केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने विद्यालय की संबद्धता तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी है। यह ऐतिहासिक फैसला प्रदेश के जागरूक अभिभावकों की एकजुटता और निरंतर संघर्ष का परिणाम माना जा रहा है। बोर्ड का यह आदेश इस बात का प्रमाण है कि जब अभिभावक बच्चों की सुरक्षा और अधिकारों के लिए संगठित होकर आवाज़ उठाते हैं, तो कोई भी संस्था अपने कर्तव्यों से मुक्त नहीं रह सकती।
सीबीएसई द्वारा मंगलवार को जारी आदेश के बाद बुधवार को दोपहर 2:30 बजे संयुक्त अभिभावक संघ के आह्वान पर बड़ी संख्या में अभिभावक नीरजा मोदी स्कूल के गेट नंबर 6 पर एकत्र हुए। इस दौरान उन्होंने पटाखे फोड़कर सीबीएसई के निर्णय का स्वागत किया और नन्ही अमायरा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। अभिभावकों ने “साल गया—बुराई गई”, “रावण का घमंड टूट सकता है, यह तो नीरजा मोदी है” और “अभिभावक एकजुटता जिंदाबाद” जैसे नारे भी लगाए।
इस कार्यक्रम में संयुक्त अभिभावक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल, प्रदेश महामंत्री संजय अग्रवाल, प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू, ऋषि बंसल, काउंसलर देवेंद्र जोशी, रिंकू शर्मा, इमरान कुरैशी, धीरज जैन, लोकेश शर्मा और रेखा शर्मा सहित बड़ी संख्या में अभिभावक उपस्थित रहे।
संयुक्त अभिभावक संघ का दावा है कि सीबीएसई ने बोर्ड के समक्ष रखी गई सभी प्रमुख मांगों को आदेश में शामिल किया है। आदेश में विद्यालय की बाल सुरक्षा मानकों की अनदेखी, एंटी-बुलिंग व्यवस्था की विफलता, काउंसलिंग सिस्टम की कमी, CCTV निगरानी में लापरवाही, स्टाफ की असंवेदनशीलता और साक्ष्य संरक्षण में चूक को स्पष्ट रूप से स्वीकार किया गया है। बोर्ड ने यह भी माना कि यदि विद्यालय प्रबंधन समय रहते आवश्यक कदम उठाता, तो यह घटना पूरी तरह रोकी जा सकती थी।
प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा, “यह निर्णय केवल एक स्कूल पर कार्रवाई नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश के निजी स्कूलों के लिए एक सख्त चेतावनी है कि बच्चों की सुरक्षा से किसी भी कीमत पर समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नीरजा मोदी स्कूल प्रकरण में अभिभावकों की पीड़ा को दबाने, सच को छिपाने और प्रभाव का दुरुपयोग करने के प्रयास किए गए, लेकिन अंततः सत्य की जीत हुई। यह फैसला वर्षों से निजी स्कूलों की मनमानी झेल रहे अभिभावकों के लिए न्याय की दिशा में एक मजबूत कदम है।”
प्रदेश अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल ने कहा, “सीबीएसई बोर्ड का यह आदेश सिद्ध करता है कि अभिभावकों की एकजुटता किसी भी बड़े और रसूखदार संस्थान को जवाबदेह बना सकती है। यह अत्यंत दुखद है कि एक मासूम बच्ची को अपनी जान गंवानी पड़ी, लेकिन अब यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि भविष्य में किसी भी विद्यालय में ऐसी लापरवाही दोहराई न जाए।” उन्होंने यह भी मांग की कि प्रदेश के सभी CBSE एवं अन्य बोर्ड से संबद्ध स्कूलों का विशेष सुरक्षा ऑडिट कराया जाए, प्रत्येक विद्यालय में एंटी-बुलिंग, काउंसलिंग एवं चाइल्ड प्रोटेक्शन सिस्टम की वास्तविक स्थिति की जांच हो, और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों व संस्थानों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जाए।
संयुक्त अभिभावक संघ ने चेतावनी दी कि यदि इस आदेश के बाद भी प्रदेश में बाल सुरक्षा मानकों के साथ खिलवाड़ जारी रहा, तो संघ प्रदेशव्यापी आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेगा। संघ ने कहा, “स्कूल शिक्षा का मंदिर है, प्रयोगशाला नहीं — बच्चों की जान की कीमत पर कोई समझौता नहीं होगा।”

Pratahkal Bureau
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