जयपुर। गुलाबी नगरी की ऐतिहासिक पहचान 'चारदीवारी' (परकोटा) के संरक्षण और इसके मूल स्वरूप को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए सरकार अब पूरी तरह से सख्त रुख अख्तियार कर रही है। मंगलवार को शासन सचिव श्री रवि जैन की अध्यक्षता में आयोजित तकनीकी हेरिटेज कमेटी की उच्च स्तरीय बैठक में जयपुर के गौरव को यूनेस्को के वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाए रखने के लिए निर्णायक निर्देश जारी किए गए। यह बैठक न केवल संरक्षण की रणनीति पर केंद्रित रही, बल्कि शहर के मूल सौंदर्य को बिगाड़ने वाले कारकों के खिलाफ एक युद्ध स्तर की तैयारी का संकेत भी दे गई।

यूनेस्को मानकों पर आधारित 'मास्टर प्लान' की तैयारी

बैठक के दौरान शासन सचिव ने स्पष्ट किया कि जयपुर का परकोटा विश्व विरासत की सूची में शामिल है, और इसकी गरिमा को बनाए रखना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि चारदीवारी क्षेत्र के लिए एक विस्तृत संरक्षण प्लान शीघ्र तैयार कर उसे धरातल पर उतारा जाए। इस योजना का मुख्य उद्देश्य परकोटे के ऐतिहासिक ढांचे को आधुनिक चुनौतियों से सुरक्षित रखना है।

अवैध अतिक्रमण और विरूपण पर 'जीरो टॉलरेंस'

शहर की खूबसूरती में दाग लगाने वाले अवैध पोस्टर, बैनर और स्वरूप में अनधिकृत बदलावों को लेकर शासन सचिव ने कड़ा रुख अपनाया। बैठक में लिए गए प्रमुख निर्णय निम्नलिखित हैं:

सघन अभियान की शुरुआत: चारदीवारी क्षेत्र में किसी भी प्रकार के अवैध विज्ञापन, पोस्टर और बैनर हटाने के लिए तत्काल सघन अभियान चलाया जाएगा।

सख्त कानूनी कार्यवाही: ऐतिहासिक स्वरूप से छेड़छाड़ करने वाले या सार्वजनिक संपत्तियों को विरूपित करने वालों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।

परिशुद्ध मॉनिटरिंग: परकोटा दीवार और ऐतिहासिक दरवाजों (गेट्स) की स्थिति की निगरानी के लिए एक 'विस्तृत मॉनिटरिंग योजना' लागू की जाएगी, ताकि समय रहते मरम्मत और रखरखाव सुनिश्चित हो सके।

प्रशासनिक अधिकारियों की एकजुटता

हेरिटेज संरक्षण की इस महत्वपूर्ण बैठक में प्रशासन के विभिन्न विभागों के आला अधिकारी शामिल हुए। इनमें जयपुर नगर निगम आयुक्त डॉ. गौरव सैनी, स्वायत्त शासन विभाग के निदेशक प्रतीक चन्द्रशेखर, मुख्य नगर नियोजक शशीकान्त, और स्थानीय निकाय विभाग की मुख्य नगर नियोजक प्रीति गुप्ता प्रमुख रहे। इनके साथ ही पुरातत्व विभाग, पर्यटन विभाग, स्मार्ट सिटी के प्रतिनिधि और संबंधित जोन उपायुक्तों ने भी तकनीकी पहलुओं पर अपनी विशेषज्ञ राय साझा की।

निष्कर्ष: विरासत की गरिमा की पुनर्स्थापना

यह बैठक केवल एक प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि जयपुर की सांस्कृतिक विरासत को संजोने का एक संकल्प है। शासन सचिव के कड़े निर्देशों से स्पष्ट है कि अब गुलाबी नगरी के मूल स्वरूप से समझौता नहीं किया जाएगा। इन प्रयासों का सीधा प्रभाव न केवल शहर के पर्यटन पर पड़ेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी यह ऐतिहासिक विरासत अपने शुद्ध और राजसी स्वरूप में सुरक्षित रह सकेगी।

Pratahkal Newsroom

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