प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने रेल मंत्रालय के तीन मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत 10,783 करोड़ रुपये है और इन्हें 2029-30 तक पूरा करने की योजना है। इनसे भारतीय रेलवे का मौजूदा नेटवर्क लगभग 656 किलोमीटर तक बढ़ जाएगा।

मंजूर किए गए तीन प्रोजेक्ट्स में खड़गपुर–झारसुगुड़ा (बागदेही) चौथी लाइन, कटनी–पेंड्रा रोड चौथी लाइन और बिलासपुर (उसलापुर)–पेंड्रा रोड तीसरी लाइन शामिल हैं।

इन रेल परियोजनाओं से रेल मार्गों की क्षमता बढ़ेगी और आवाजाही बेहतर होगी। इससे भारतीय रेलवे की कामकाज की क्षमता और सेवा की विश्वसनीयता में सुधार होगा। मल्टी-ट्रैकिंग के इन कार्यों से परिचालन सुगम होगा और भीड़-भाड़ कम करने में मदद मिलेगी। ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘नए भारत’ के विज़न के अनुरूप हैं। इनके माध्यम से क्षेत्र के सर्वांगीण विकास को बढ़ावा मिलेगा और लोगों के लिए रोजगार तथा स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे, जिससे वे ‘आत्मनिर्भर’ बन सकेंगे।

इन परियोजनाओं की योजना PM-गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत बनाई गई है। इसमें एकीकृत योजना और हितधारकों के साथ बातचीत के माध्यम से मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी तथा लॉजिस्टिक्स क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया है। परियोजनाएं लोगों, सामान और सेवाओं की आवाजाही के लिए आसान कनेक्टिविटी उपलब्ध कराएंगी।

पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 14 जिलों में फैले ये तीन प्रोजेक्ट भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क को लगभग 656 किलोमीटर तक बढ़ाएंगे। प्रस्तावित मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं से लगभग 4,790 गांवों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी। इन गांवों की आबादी लगभग 56 लाख है।

रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ने से देश के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी। इनमें तारातारिणी मंदिर, श्री क्षेत्र जगन्नाथ मंदिर (झारसुगुड़ा के पास स्थित प्राचीन मंदिर), बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व, विरातेश्वर मंदिर, अमरकंटक मंदिर, ज्वालेश्वर धाम, अचानकमार टाइगर रिज़र्व, खुटाघाट बांध, मल्हार पुरातात्विक स्थल और रतनपुर महामाया मंदिर शामिल हैं।

प्रस्तावित परियोजनाएं कोयला, सीमेंट, लोहा और स्टील जैसे सामानों के परिवहन के लिए महत्वपूर्ण मार्ग हैं। क्षमता विस्तार के इन कार्यों से 27 MTPA (मिलियन टन प्रति वर्ष) का अतिरिक्त माल ढुलाई ट्रैफिक होने की उम्मीद है।

रेलवे परिवहन का पर्यावरण-अनुकूल और ऊर्जा-कुशल माध्यम होने के कारण इन परियोजनाओं से जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने और देश की लॉजिस्टिक्स लागत कम करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही तेल आयात में लगभग 12 करोड़ लीटर और CO2 उत्सर्जन में लगभग 62 करोड़ किलोग्राम की कमी आएगी। CO2 उत्सर्जन में यह कमी 2.48 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर होगी।

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