बार-बार बुखार आना, शरीर में कमजोरी महसूस होना, खून की कमी होना और हाथ-पांव में लगातार थकान बने रहना सामान्य लक्षण लग सकते हैं, लेकिन उपचार के बाद भी ये समस्याएं लंबे समय तक बनी रहें तो यह ब्लड कैंसर की शुरुआती चेतावनी हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर पहचान और आधुनिक उपचार के जरिए ब्लड कैंसर को पूरी तरह हराकर मरीज सामान्य जीवन जी सकता है।

भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल के ब्लड कैंसर एवं बीएमटी विशेषज्ञ डॉ प्रकाश सिंह शेखावत ने बताया कि आधुनिक चिकित्सा तकनीकों ने ब्लड कैंसर के उपचार को नई दिशा दी है। उन्होंने कहा कि समय रहते जांच और सही उपचार मिलने पर मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर सामान्य जीवन में लौट सकते हैं।

बाल रक्त एवं कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ शिवानी माथुर ने बताया कि बच्चों में होने वाले कई प्रकार के ब्लड कैंसर का शुरुआती चरण में सफल उपचार संभव है। उपचार पूरा होने के बाद स्वस्थ हो चुके हजारों बच्चे नियमित जांच के लिए अस्पताल आते हैं और अन्य बच्चों की तरह खेलकूद व शारीरिक गतिविधियों में पूरी तरह सक्रिय हैं।

डॉ शेखावत ने बताया कि कार-टी सेल थेरेपी और बोन मैरो ट्रांसप्लांट जैसी अत्याधुनिक तकनीकें ब्लड कैंसर और गंभीर रक्त रोगों के उपचार में नई उम्मीद बनकर उभरी हैं। कार-टी सेल थेरेपी में मरीज की प्रतिरक्षा कोशिकाओं यानी टी-सेल्स को विशेष तकनीक से इस तरह तैयार किया जाता है कि वे कैंसर कोशिकाओं की पहचान कर उन्हें नष्ट कर सकें। वहीं बोन मैरो ट्रांसप्लांट के जरिए रोगग्रस्त बोन मैरो को स्वस्थ स्टेम सेल्स से प्रतिस्थापित किया जाता है। यह उपचार ल्यूकीमिया, लिम्फोमा, मल्टीपल मायलोमा, थैलेसीमिया और एप्लास्टिक एनीमिया जैसे गंभीर रोगों में प्रभावी साबित हो रहा है।

उन्होंने बताया कि अस्पताल में ब्लड कैंसर से संबंधित दो विशेष परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनके तहत मरीजों को निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। बच्चों के लिए संचालित जीवनदान परियोजना में लो रिस्क श्रेणी के तीन प्रकार के ब्लड कैंसर — एक्यूट लिम्फोब्लॉस्टिक ल्यूकीमिया (एएलएल), एक्यूट प्रोमाईलोसाईटिक ल्यूकीमिया (एएमपीएल) और होजकिन्स लिम्फोमा (एचएल) — का उपचार किया जा रहा है। अगस्त 2014 से मार्च 2026 तक इस योजना के तहत 11.03 करोड़ रुपये की लागत से 176 बच्चों का सफल उपचार कर उन्हें कैंसर मुक्त किया गया। सभी बच्चे वर्तमान में सामान्य जीवन जी रहे हैं।

व्यस्क मरीजों के लिए संचालित क्रोनिक माईलोइड ल्यूकीमिया कैंसर मुक्ति योजना (सीएमएल-सीएमवाए) के तहत अगस्त 2015 से मार्च 2026 तक 2.47 करोड़ रुपये की लागत से 340 मरीजों का उपचार कर उन्हें कैंसर मुक्त किया गया है।

डॉ शिवानी माथुर ने कहा कि जागरूकता की कमी के कारण कई मामलों में बीमारी की पहचान देर से हो पाती है, जिससे उपचार शुरू होने में देरी होती है। उन्होंने बताया कि बार-बार बुखार आना, एनीमिया का उपचार लेने के बाद भी सुधार नहीं होना और शरीर पर गांठ उभरना ब्लड कैंसर के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। ऐसे किसी भी असामान्य लक्षण के लंबे समय तक बने रहने पर कैंसर रोग विशेषज्ञ से तुरंत परामर्श लेना जरूरी है।

विश्व रक्त कैंसर दिवस पर विशेषज्ञों ने स्पष्ट संदेश दिया कि समय पर जांच, जागरूकता और आधुनिक उपचार तकनीकों के जरिए ब्लड कैंसर जैसी गंभीर बीमारी पर भी निर्णायक जीत हासिल की जा सकती है।

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Pratahkal Bureau

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