मुरादाबाद-सहारनपुर रेलखण्ड पर डौसनी स्टेशन यार्ड में ब्लॉक: ऋषिकेश और श्रीगंगानगर की ट्रेनें होंगी प्रभावित
उत्तर रेलवे के मुरादाबाद-सहारनपुर रेलखण्ड पर डौसनी स्टेशन यार्ड में नॉन-इन्टरलॉकिंग कार्य के कारण रेल यातायात प्रभावित रहेगा। मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी श्री शशि किरण के अनुसार, ऋषिकेश-श्रीगंगानगर और साबरमती-योगनगरी ऋषिकेश जैसी मुख्य रेल सेवाएं रिशड्यूल और रेगूलेट की गई हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए रेलवे ने समय सारिणी में किए गए बदलावों की विस्तृत जानकारी साझा की है।

मुरादाबाद। उत्तर रेलवे के मुरादाबाद-सहारनपुर रेलखण्ड पर बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने और परिचालन सुरक्षा को बेहतर बनाने के उद्देश्य से डौसनी स्टेशन यार्ड में महत्वपूर्ण अनुरक्षण कार्य शुरू किया गया है। रेल प्रशासन द्वारा यहाँ नॉन-इन्टरलॉकिंग का कार्य किया जा रहा है, जिसके चलते इस मार्ग से गुजरने वाली कई प्रमुख रेल सेवाओं के पहिए थमने वाले हैं। डौसनी यार्ड में होने वाले इस तकनीकी सुधार के कारण रेल यातायात व्यवस्था को अस्थाई रूप से पुनर्गठित किया गया है, जिसका सीधा असर उत्तर पश्चिम रेलवे की सेवाओं पर भी पड़ा है।
उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी श्री शशि किरण ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि डौसनी यार्ड में चल रहे इस तकनीकी कार्य के कारण कई महत्वपूर्ण ट्रेनें अपने निर्धारित समय से देरी से संचालित होंगी। विशेष रूप से ऋषिकेश और श्रीगंगानगर के बीच चलने वाली गाड़ियों के समय में बदलाव किया गया है। गाड़ी संख्या 14816, ऋषिकेश-श्रीगंगानगर रेलसेवा आगामी 13 जनवरी, 19 जनवरी और 24 जनवरी 2026 को अपने प्रारंभिक स्टेशन ऋषिकेश से निर्धारित समय के स्थान पर 1 घंटा 30 मिनट की देरी से प्रस्थान करेगी।
वहीं, लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों की मुश्किलें बढ़ाते हुए गाड़ी संख्या 19031, साबरमती-योगनगरी ऋषिकेश रेलसेवा को भी रिशड्यूल किया गया है। यह ट्रेन 28 जनवरी, 3 फरवरी और 8 फरवरी 2026 को साबरमती से अपने तय समय से 1 घंटा 30 मिनट की देरी से रवाना होगी। केवल ट्रेनों की रवानगी ही नहीं, बल्कि मार्ग में उनके संचालन की गति पर भी इस ब्लॉक का प्रभाव दिखेगा। श्रीगंगानगर से प्रस्थान करने वाली गाड़ी संख्या 14815, श्रीगंगानगर-ऋषिकेश रेलसेवा 13 जनवरी और 19 जनवरी 2026 को मार्ग में उत्तर रेलवे के विभिन्न स्टेशनों पर लगभग 30 मिनट तक रेगूलेट की जाएगी यानी इसे बीच रास्ते में रोककर चलाया जाएगा।
रेलवे द्वारा उठाए गए इस कदम का मुख्य उद्देश्य रेल पटरियों और सिग्नल प्रणाली का आधुनिकीकरण करना है, ताकि भविष्य में यात्रा को और अधिक सुरक्षित और निर्बाध बनाया जा सके। हालांकि, इस अनुरक्षण कार्य के कारण यात्रियों को होने वाली असुविधा को देखते हुए प्रशासन ने पहले ही सूचना जारी कर दी है ताकि लोग अपनी यात्रा की योजना तदनुसार बना सकें। रेलखण्ड पर चल रहा यह नॉन-इन्टरलॉकिंग कार्य तकनीकी दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है, जिसके पूरा होने के बाद इस मार्ग पर ट्रेनों की रफ्तार और सुरक्षा मानकों में उल्लेखनीय सुधार होने की उम्मीद है।

Pratahkal Bureau
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