बीकानेर। भारतीय रेलवे द्वारा यात्री सुविधाओं के विस्तार और सफर को अधिक सुरक्षित व आरामदायक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। उत्तर पश्चिम रेलवे प्रशासन ने बीकानेर से धर्मनगरी हरिद्वार के बीच चलने वाली रेलसेवा की कायाकल्प करने का निर्णय लिया है। अब इस मार्ग पर यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं और यात्रियों को पुराने कोचों के स्थान पर अत्याधुनिक तकनीक से लैस 'एलएचबी' (लिंक हॉफमैन बुश) रैक की सुविधा मिलेगी। इस बदलाव के बाद न केवल ट्रेन की गतिशीलता में सुधार होगा, बल्कि यात्रियों को झटकों से मुक्त एक सुगम यात्रा का अनुभव प्राप्त होगा।

उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी श्री शशि किरण ने इस महत्वपूर्ण बदलाव की आधिकारिक जानकारी साझा करते हुए बताया कि रेलवे की प्राथमिकता यात्रियों की सुरक्षा और सुविधानुसार बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाना है। उनके अनुसार, गाड़ी संख्या 14717, बीकानेर-हरिद्वार रेलसेवा आगामी 19 जनवरी 2026 से बीकानेर से अपनी नई रैक के साथ प्रस्थान करेगी। इसी क्रम में, वापसी की यात्रा के लिए गाड़ी संख्या 14718, हरिद्वार-बीकानेर रेलसेवा 20 जनवरी 2026 से हरिद्वार से एलएचबी रैक के साथ संचालित की जाएगी। यह परिवर्तन इस रूट पर रेल यात्रा के एक नए युग की शुरुआत माना जा रहा है।

इस आधुनिक रेलसेवा की संरचना को लेकर भी प्रशासन ने व्यापक खाका तैयार किया है। नई एलएचबी रैक वाली इस ट्रेन में कुल 16 डिब्बे शामिल होंगे, जो यात्रियों की विभिन्न श्रेणियों की जरूरतों को पूरा करेंगे। इसमें 03 थर्ड एसी कोच, 06 द्वितीय शयनयान (स्लीपर) कोच, 05 साधारण श्रेणी के कोच के साथ-साथ 01 पॉवरकार श्रेणी और 01 गार्ड डिब्बा लगाया जाएगा। एलएचबी कोच अपनी उच्च वहन क्षमता, एंटी-टेलिस्कोपिक सुरक्षा प्रणाली और बेहतर ब्रेक व्यवस्था के लिए जाने जाते हैं, जो किसी भी अप्रिय स्थिति में जान-माल के नुकसान को न्यूनतम करने में सहायक होते हैं।

रेलवे का यह निर्णय विशेष रूप से उन यात्रियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है जो नियमित रूप से धार्मिक दर्शन या व्यावसायिक कार्यों हेतु बीकानेर और हरिद्वार के बीच आवागमन करते हैं। पुराने रैक की तुलना में एलएचबी रैक में शोर कम होता है और डिब्बों के भीतर जगह भी अधिक व्यवस्थित होती है। बीकानेर से हरिद्वार तक के इस लंबे सफर में अब यात्रियों को थकान कम और आधुनिक सुख-सुविधाओं का आनंद अधिक मिलेगा। बुनियादी ढांचे में किया गया यह सुधार भारतीय रेल की निरंतर विकासशील छवि को और सुदृढ़ करता है।

Pratahkal Bureau

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