भिवानी/रोहतक। भारतीय रेलवे के बुनियादी ढांचे को सशक्त बनाने और भविष्य में सुगम रेल संचालन सुनिश्चित करने की दिशा में उत्तर पश्चिम रेलवे ने एक बड़ा कदम उठाया है। बीकानेर मंडल के अंतर्गत आने वाले भिवानी-रोहतक रेलखण्ड पर अब विकास की पटरियां बिछाई जा रही हैं। डोभभाली-लाहली-कलानौल कलां स्टेशनों के बीच चल रहे दोहरीकरण कार्य और अत्याधुनिक ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग प्रणाली की स्थापना ने इस मार्ग पर रेल सेवाओं के परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है। हालांकि, यह विकास कार्य यात्रियों के लिए अल्पकालिक असुविधा लेकर आया है, क्योंकि इस तकनीकी उन्नयन के कारण आगामी 27 जनवरी से 16 फरवरी तक रेल यातायात व्यापक रूप से प्रभावित रहने वाला है।

उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी श्री शशि किरण ने इस महत्वपूर्ण परियोजना की जानकारी साझा करते हुए बताया कि सुरक्षा और कार्य की सटीकता को देखते हुए कई प्रमुख रेल सेवाओं को रद्द, आंशिक रूप से रद्द और मार्ग परिवर्तित करने का निर्णय लिया गया है। इस महाअभियान के चलते भिवानी और रोहतक के बीच चलने वाली दैनिक रेलसेवाएं जैसे गाड़ी संख्या 54016, 54013, 54018 और 54014 आगामी 27 जनवरी से 16 फरवरी तक अपनी कुल 21 फेरियों के लिए पटरी पर नहीं उतरेंगी। वहीं, रोहतक से भिवानी जाने वाली गाड़ी संख्या 54015 भी 26 जनवरी से ही रद्द रहेगी। रोहतक-हांसी के बीच चलने वाली गाड़ियाँ और हिसार-नई दिल्ली के बीच संचालित महत्वपूर्ण सेवाएं भी फरवरी के मध्य में बाधित रहेंगी, जिससे स्थानीय यात्रियों को वैकल्पिक साधनों की तलाश करनी होगी।

इतना ही नहीं, दिल्ली से भिवानी के बीच चलने वाली रेलसेवा संख्या 54005 भी इस अवधि के दौरान अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पाएगी और रोहतक स्टेशन पर ही अपनी यात्रा समाप्त करेगी। लंबी दूरी के यात्रियों के लिए राहत और चुनौती दोनों है, क्योंकि रेलवे ने अगरतला-फिरोजपुर और दिल्ली-बठिण्डा जैसी प्रमुख एक्सप्रेस ट्रेनों के मार्ग में बदलाव किया है। ये गाड़ियाँ अब रोहतक-झाडली-बठिण्डा और डोभभाली-महम-हांसी जैसे परिवर्तित मार्गों से गुजरेंगी। सुखद पहलू यह है कि मार्ग परिवर्तन के बावजूद यात्रियों की सुविधा के लिए इन ट्रेनों का ठहराव महम, जींद, जाखल और धुरी जैसे स्टेशनों पर सुनिश्चित किया गया है।

प्रशासनिक स्तर पर इस कार्य की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि निर्माण कार्य के शुरुआती चरणों में कलानौर कलां और लाहली जैसे स्टेशनों पर ट्रेनों के ठहराव को पहले ही सीमित कर दिया गया है। बठिण्डा-गोरखपुर और भिवानी-प्रयागराज जैसी महत्वपूर्ण गाड़ियाँ भी इन स्टेशनों पर बिना रुके गुजरेंगी। रेलवे का यह निर्णय भले ही वर्तमान में यात्रियों की दिनचर्या में व्यवधान डाल रहा हो, लेकिन भिवानी-रोहतक रेलखण्ड का यह दोहरीकरण भविष्य में न केवल ट्रेनों की गति बढ़ाएगा, बल्कि इस क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास की नई इबारत भी लिखेगा। श्री शशि किरण के अनुसार, यह अस्थायी असुविधा एक सुरक्षित और तीव्र रेल तंत्र के निर्माण के लिए अपरिहार्य है।

Pratahkal Newsroom

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