भारत के गौरवशाली इतिहास और ‘पंच परिवर्तन’ पर राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय में विशेष व्याख्यान
राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय में भारत के गौरवशाली इतिहास एवं पंच परिवर्तन पर विशेष व्याख्यान, भारतीय ज्ञान परंपरा और पर्यावरण संरक्षण पर जोर।

तस्वीर में पोडियम पर खड़े वक्ता और हॉल में बैठे श्रोता नजर आ रहे हैं।
भारतीय शिक्षण मंडल की राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय इकाई के तत्वावधान में “भारत का गौरवशाली इतिहास एवं पंच परिवर्तन” विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम कुलपति प्रो. आनंद भालेराव के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ ध्येय श्लोक एवं ध्येय वाक्य के साथ हुआ। इसके बाद डॉ. धनेश्वर प्रूशटी ने मुख्य वक्ता डॉ. श्रीकांत का परिचय प्रस्तुत किया।
मुख्य वक्ता डॉ. शश्रीकांत ने अपने उद्बोधन में भारत के गौरवशाली अतीत एवं विजयशाली इतिहास को विभिन्न ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक उदाहरणों के माध्यम से प्रस्तुत किया। उन्होंने भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा एवं गुरुकुल व्यवस्था की विशेषताओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। साथ ही, भारतीय ज्ञान परंपरा में आयुर्वेद, चिकित्सा शास्त्र एवं कुटुंब व्यवस्था के महत्व को रेखांकित किया।
उन्होंने कहा कि भारतीय समाज की मूल विशेषता समरसता एवं सामाजिक एकता रही है। भारतीय जीवन-दृष्टि में प्रकृति के साथ सामंजस्य, पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन को सदैव महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। उन्होंने भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं में निहित इन जीवन-मूल्यों को वर्तमान समय में आत्मसात करने की आवश्यकता पर बल दिया।
अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. राजेश कुमार ने भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति की समृद्ध परंपरा पर प्रकाश डालते हुए पर्यावरण के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में प्रकृति एवं पर्यावरण के प्रति सम्मान और संरक्षण की भावना सदैव विद्यमान रही है।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों के साथ-साथ विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता की। मंच संचालन डॉ. गजानन ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. अखिल अग्रवाल, डॉ. गाथा ठक्कर, डॉ. अनुराग सिंह, डॉ. ज्ञान रंजन पांडा, डॉ. जय प्रकाश त्रिपाठी एवं सिद्धार्थ शर्मा का महत्वपूर्ण एवं अमूल्य सहयोग रहा।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. प्रमोद कांबले ने सभी अतिथियों, मुख्य वक्ता, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इसके बाद राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

