भारत भाग्य विधाता: जयपुर में सीएम भजनलाल और डिप्टी सीएम दिया कुमारी ने असली हीरोज़ को किया सम्मानित
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और डिप्टी सीएम दिया कुमारी ने कंगना रनौत की फिल्म 'भारत भाग्य विधाता' की स्क्रीनिंग में भाग लिया। क्या यह फिल्म देश के गुमनाम नायकों की असली कहानी बयां कर पाएगी? जानिए इस खास सम्मान समारोह की पूरी खबर।

जयपुर में फिल्म की स्क्रीनिंग के दौरान (बाएं से दाएं) मंजू शर्मा, कंगना रनौत, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी मंच पर मौजूद।
देश के गुमनाम नायकों के समर्पण को बड़े पर्दे पर उतारने वाली कंगना रनौत अभिनीत फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ ने अपनी रिलीज के साथ ही दर्शकों के दिलों को छू लिया है। भुवनेश्वर, रायपुर, दिल्ली और जोधपुर के बाद फिल्म की टीम ने जयपुर में एक विशेष स्क्रीनिंग का आयोजन किया, जिसमें राजस्थान के माननीय मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस गरिमामयी अवसर पर लोकसभा सांसद मंजू शर्मा की उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
फिल्म की विषयवस्तु उन अनसुने और अनदेखे हीरोज़ को समर्पित है, जो विपरीत परिस्थितियों में निस्वार्थ भाव से राष्ट्र सेवा में जुटे रहते हैं। जयपुर में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और कंगना रनौत ने समाज के उन फ्रंटलाइन वर्कर्स को 'बैज ऑफ ऑनर' प्रदान किया, जिन्होंने अपने कार्यों से समाज को नई दिशा दी है। सम्मानित होने वालों में रमा अग्रवाल, सुरभि शर्मा, रीनू कुमारी, मीनू, उदयवीर, रोशन लाल सालोडिया, रुकैया आरा, रूपाली देवी, पूर्वा पारीक और सपना शर्मा शामिल थे।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने फिल्म की सराहना करते हुए कहा कि यह फिल्म संवेदनशीलता और करुणा की उस भावना को जीवंत करती है, जो कोविड-19 जैसी चुनौतियों के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों और युवाओं ने दिखाई थी। कंगना रनौत ने भी मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह फिल्म अब स्वयं अपनी कहानी कहने के लिए तैयार है। फिल्म के निर्माता डॉ. जयंतीलाल गड़ा की यह प्रस्तुति, जो पेन स्टूडियोज, मणिकर्णिका फिल्म्स और परमहंस क्रिएशंस का संयुक्त प्रयास है, देशभर में फ्रंटलाइन वर्कर्स को सम्मानित करने के एक विशेष अभियान के तहत प्रदर्शित की जा रही है। इसका उद्देश्य पुलिसकर्मियों, नर्सों, सफाईकर्मियों और अन्य सहयोगी कर्मचारियों के अथक योगदान को वह पहचान दिलाना है, जो अक्सर मुख्यधारा से ओझल रहती है।

