जयपुर। राजस्थान को हरित प्रदेश बनाने के संकल्प के साथ मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने वन एवं पर्यावरण विभाग की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए राज्य की पारिस्थितिकी को सुदृढ़ करने हेतु दूरगामी निर्देश जारी किए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि ‘मिशन हरियालो राजस्थान’ राज्य सरकार का प्राथमिकता वाला लक्ष्य है, जिसके तहत आगामी मानसून सत्र में प्रदेशभर में 10 करोड़ पौधारोपण करने का महा-लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि मानसून आगमन से पूर्व ही पौधारोपण की समस्त तैयारियां समयबद्ध तरीके से पूर्ण कर ली जाएं ताकि इस अभियान को अपेक्षित सफलता मिल सके।

शनिवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में श्री शर्मा ने कहा कि 10 करोड़ पौधों को रोपने के इस वृहद लक्ष्य की प्राप्ति के लिए वन एवं पर्यावरण विभाग के साथ-साथ अन्य सभी सरकारी विभागों की सक्रिय सहभागिता अनिवार्य है। उन्होंने मुख्य सचिव को स्वयं इस पूरे कार्य की निरंतर मॉनिटरिंग करने की जिम्मेदारी सौंपी है। मुख्यमंत्री ने कार्ययोजना को विस्तार देते हुए बताया कि विश्व पर्यावरण दिवस यानी 5 जून से इस अभियान का श्रीगणेश किया जाएगा, जिसे जुलाई, अगस्त और सितंबर के मानसून महीनों में तीव्र गति प्रदान की जाएगी। इसके लिए उन्होंने सभी विभागों को पौधारोपण स्थलों का चयन करने, सुरक्षा हेतु फेंसिंग लगाने और खड्डे खोदने जैसे बुनियादी कार्य समय से पहले पूरा करने के आदेश दिए। विशेष रूप से वन विभाग को नोडल एजेंसी के रूप में अन्य विभागों के साथ समन्वय स्थापित करने की हिदायत दी गई है।

अभियान की व्यापकता को बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री ने राजस्व विभाग के सहयोग से उपयुक्त भूमि के चयन और भारतीय रेलवे की परिसंपत्तियों में वृक्षारोपण हेतु विस्तृत कार्ययोजना बनाने पर बल दिया। इसके अतिरिक्त, सार्वजनिक निर्माण विभाग को निर्देशित किया गया है कि प्रत्येक जिले में प्रमुख सड़कों के किनारों और चारागाह भूमि पर सघन वृक्षारोपण सुनिश्चित किया जाए। मिट्टी की उत्पादकता और स्थानीय पारिस्थितिकी का ध्यान रखते हुए मुख्यमंत्री ने इस वर्ष गूलर के वृक्षारोपण को विशेष प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने संसाधनों की सुलभता पर जोर देते हुए कहा कि आवश्यकता पड़ने पर सीएसआर फंड के माध्यम से वनरक्षक कार्यालयों को पानी के टैंकर उपलब्ध कराए जाएं और इस पुनीत कार्य में ‘वृक्षमित्रों’ का भी पूर्ण सहयोग लिया जाए।

किसानों की आर्थिक समृद्धि और पर्यावरण संरक्षण को जोड़ते हुए श्री शर्मा ने मुख्यमंत्री वृक्षारोपण महाअभियान के अंतर्गत फलदार पौधों के निःशुल्क वितरण की घोषणा की। चंदन की खेती को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री को उदयपुर, सिरोही एवं बांसवाड़ा के चिन्हित क्षेत्रों का व्यक्तिगत निरीक्षण कर वहां तारबंदी और ड्रिप सिंचाई जैसी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने को कहा। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में हरियाली लाने के लिए ‘ड्रोन सीडिंग’ की तकनीक अपनाने और अभयारण्य क्षेत्रों में पौधारोपण को प्राथमिकता देने के निर्देश भी दिए गए। मुख्यमंत्री ने प्रत्येक जिले में एक ‘नमो नर्सरी’ की स्थापना और हर पंचायत समिति स्तर पर चरणबद्ध तरीके से ‘नमो वन’ विकसित करने के संकल्प को दोहराया।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा की दूरदर्शी पहल पर वर्ष 2024 से 2028 तक पांच वर्षों में कुल 50 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में 7 करोड़ के लक्ष्य के विरुद्ध 7.22 करोड़ और वर्ष 2025 में 10 करोड़ के लक्ष्य के विरुद्ध 11.74 करोड़ से अधिक पौधारोपण कर सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता सिद्ध की है। बैठक में वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री संजय शर्मा, अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री अखिल अरोड़ा, अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री आनंद कुमार सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जबकि मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सम्मिलित हुए।

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