भगत की कोठी डीजल शेड: रेलवे स्क्रैप से बनाई गई आकर्षक कलाकृतियां
उत्तर पश्चिम रेलवे के कर्मचारियों ने कबाड़ पुर्जों से 'मेक इन इंडिया' शेर और चिंकारा जैसी कलाकृतियां बनाकर स्वच्छता का संदेश दिया।

तस्वीर में रेलवे स्क्रैप से निर्मित मेक इन इंडिया शेर और रोबोट की कलाकृति दिख रही है।
उत्तर पश्चिम रेलवे के भगत की कोठी डीजल शेड में अनुपयोगी रेलवे स्पेयर पार्ट्स को आकर्षक कलाकृतियों में बदलकर स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और रचनात्मक पुनः उपयोग का संदेश दिया जा रहा है। तकनीकी कर्मचारियों की इस अभिनव पहल के तहत स्प्रिंग, बेयरिंग, नट और बोल्ट जैसे कबाड़ में पड़े पुर्जों से मेक इन इंडिया का प्रतीक शेर, चिंकारा, रोबोट, स्टीम लोको ट्रॉली, हंस और भारत के नक्शे सहित विभिन्न कलाकृतियां तैयार की गई हैं।
उत्तर पश्चिम रेलवे द्वारा रेल परिसरों को स्वच्छ, सुंदर और आकर्षक बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। 'स्वच्छता ही सेवा' अभियान के बाद आयोजित स्वच्छता पखवाड़े के अंतर्गत 'स्वच्छता से समृद्धि' की अवधारणा को साकार करने के लिए अनुपयोगी रेलवे स्क्रैप से कलाकृतियों का निर्माण किया जा रहा है। इस पहल के माध्यम से स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ अनुपयोगी सामग्री के रचनात्मक पुनः उपयोग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी श्री अमित सुदर्शन के अनुसार, रेलवे के विभिन्न कारखानों, अनुरक्षण डिपो और अन्य इकाइयों में ट्रेनों के अनुरक्षण एवं मरम्मत के दौरान निकलने वाले अनुपयोगी पुर्जों और कबाड़ का उपयोग आकर्षक कलाकृतियां बनाने में किया जा रहा है। इससे स्क्रैप का रचनात्मक उपयोग सुनिश्चित होने के साथ रेलवे परिसरों का सौंदर्यीकरण भी हो रहा है।
भगत की कोठी स्थित डीजल शेड के तकनीकी कर्मचारियों ने अपनी रचनात्मक सोच और तकनीकी दक्षता से रेल इंजन के अनुपयोगी स्पेयर पार्ट्स को कलाकृतियों का स्वरूप दिया है। इन कलाकृतियों को तैयार करने में स्प्रिंग, बेयरिंग, नट, बोल्ट सहित विभिन्न प्रकार के स्क्रैप का इस्तेमाल किया गया है।
कर्मचारियों द्वारा बनाई गई कलाकृतियों में 'मेक इन इंडिया' का प्रतीक शेर, पश्चिमी राजस्थान में पाया जाने वाला चिंकारा, रोबोट, स्टीम लोको ट्रॉली, हंस और भारत का नक्शा प्रमुख हैं। इन सभी कलाकृतियों को डीजल शेड परिसर में सजावट के रूप में स्थापित किया गया है। ये कलाकृतियां परिसर की सुंदरता बढ़ाने के साथ संसाधनों के पुनः उपयोग और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रही हैं।
रेलवे कर्मचारियों की यह पहल दर्शाती है कि अनुपयोगी समझी जाने वाली सामग्री को रचनात्मक प्रयासों से आकर्षक स्वरूप दिया जा सकता है। 'वेस्ट टू आर्ट' की यह अवधारणा अपशिष्ट के बेहतर प्रबंधन, स्वच्छता के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने और कार्यस्थल को स्वच्छ एवं सुंदर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
उत्तर पश्चिम रेलवे यात्री सुविधाओं में सुधार और बेहतर रेल कार्यप्रणाली के साथ स्वच्छ, सुंदर एवं सुविधाजनक रेल परिसरों के विकास के लिए भी निरंतर प्रयासरत है। भगत की कोठी डीजल शेड के तकनीकी कर्मचारियों की यह पहल स्वच्छता अभियान को रचनात्मकता, संसाधनों के पुनः उपयोग और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी से जोड़ते हुए रेलवे परिसरों के सौंदर्यीकरण का उदाहरण प्रस्तुत कर रही है।

