ब्यावर बैठक में अधिकारियों पर बरसे विधायक शंकर सिंह रावत
जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत की मौजूदगी में ब्यावर-मसूदा की अनदेखी, तालाबों पर अतिक्रमण और सीएलजी बैठकों की सूचना न मिलने पर विधायक ने जताई नाराजगी।

ब्यावर जिला कलेक्ट्रेट सभागार में वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान-2026 की समीक्षा बैठक के दौरान मंच पर चर्चा करते विधायक शंकर सिंह रावत (बाएं) और जल संसाधन कैबिनेट मंत्री सुरेश सिंह रावत (दाएं)।
जिला कलेक्ट्रेट स्थित सभागार में आयोजित 'वंदे गंगा जल संरक्षण-जन अभियान-2026' की जिला स्तरीय समीक्षा बैठक उस समय हंगामेदार हो गई, जब स्थानीय विधायक शंकर सिंह रावत विभागीय अधिकारियों के मनमाने रवैये पर पूरी तरह बिफर पड़े। जल संसाधन कैबिनेट मंत्री सुरेश सिंह रावत की अध्यक्षता में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में विधायक ने अधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए उनकी कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल दागे और अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की।
बैठक में अपनी बात रखते हुए विधायक शंकर सिंह रावत ने अधिकारियों के पक्षपातपूर्ण रवैये को उजागर किया। उन्होंने कड़े शब्दों में सवाल किया कि आखिर 'वंदे गंगा जल संरक्षण-जन अभियान-2026' से जुड़े शुभारंभ और समापन के समस्त कार्यक्रम केवल जैतारण विधानसभा क्षेत्र में ही क्यों आयोजित किए जा रहे हैं? उन्होंने ब्यावर और मसूदा विधानसभा क्षेत्र की लगातार की जा रही घोर अनदेखी पर कड़ी आपत्ति जताई। जनहित के मुद्दों को पुरजोर तरीके से उठाते हुए विधायक ने ब्यावर शहर के मध्य स्थित बिचड़ली तालाब पर हो रहे अवैध अतिक्रमण का गंभीर मामला भी कैबिनेट मंत्री के समक्ष रखा। इसके साथ ही, उन्होंने क्षेत्र में जल संकट के समाधान हेतु केड़िया देह (भीम) तालाब को पाइपलाइन के माध्यम से जवाजा तालाब से जोड़ने की बेहद महत्वपूर्ण और पुरानी मांग को भी प्रमुखता से दोहराया।
प्रशासनिक समन्वय की कमी को उजागर करते हुए विधायक ने पुलिस विभाग की कार्यशैली पर भी जमकर भड़ास निकाली। उन्होंने रोष प्रकट करते हुए कहा कि पुलिस थाना स्तर पर होने वाली और पुलिस अधीक्षक कार्यालय द्वारा जिला स्तर पर बुलाई जाने वाली सीएलजी (कम्युनिटी लाइजनिंग ग्रुप) बैठकों की सूचना तक उन्हें नहीं दी जा रही है। अधिकारियों की इस घोर लापरवाही को असहनीय बताते हुए विधायक शंकर सिंह रावत ने मंच पर मौजूद कैबिनेट मंत्री सुरेश सिंह रावत से पुरजोर मांग की कि वे अधिकारियों के इस लापरवाह, ढुलमुल और तानाशाही पूर्ण रवैये से संबंधित विभागों के मंत्रियों तथा उच्चाधिकारियों को तत्काल अवगत कराएं ताकि दोषियों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सके। इस तीखे विरोध ने जिले के प्रशासनिक हल्कों में खलबली मचा दी है और आने वाले दिनों में इसके बड़े प्रशासनिक असर देखने को मिल सकते हैं।

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