बीबीएमबी में राजस्थान को स्थाई सदस्य बनाने की मांग, मंत्री सुरेश सिंह रावत ने रखी बात
जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने स्वर्ण जयंती समारोह में रावी-ब्यास जल में राज्य की 52.69 प्रतिशत हिस्सेदारी के आधार पर स्थाई प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाया।

पंचकूला के इंद्रधनुष सभागार में 15 मई 2026 को आयोजित बीबीएमबी के स्वर्ण जयंती समारोह में मंच से संबोधित करते राजस्थान के जल संसाधन मंत्री श्री सुरेश सिंह रावत।
पंचकुला/जयपुर। भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) के स्थापना दिवस के अवसर पर शुक्रवार को पंचकुला के इंद्रधनुष सभागार में आयोजित स्वर्ण जयंती समारोह राजस्थान के हक की पुरजोर आवाज का गवाह बना। इस महत्वपूर्ण आयोजन में राजस्थान के जल संसाधन मंत्री श्री सुरेश सिंह रावत ने केंद्र सरकार के समक्ष राज्य की दशकों पुरानी मांग को दोहराते हुए बीबीएमबी में राजस्थान को स्थाई सदस्य बनाए जाने और एक अतिरिक्त पूर्णकालिक सदस्य पद सृजित करने का गंभीर आग्रह किया। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में केन्द्रीय विद्युत, आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल उपस्थित रहे, जिनके समक्ष श्री रावत ने तर्क दिया कि रावी-ब्यास जल में राजस्थान की 52.69 प्रतिशत की विशाल हिस्सेदारी होने के बावजूद अब तक बोर्ड में राज्य के किसी अधिकारी को सदस्य के रूप में नियुक्त न करना न्यायसंगत नहीं है।
जल संसाधन मंत्री ने अपने संबोधन में बीबीएमबी की ऐतिहासिक भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि 15 मई 1976 को अपनी स्थापना के बाद से यह बोर्ड राजस्थान, पंजाब और हरियाणा के बीच जल वितरण, सिंचाई और जल-विद्युत प्रबंधन में धुरी बना हुआ है। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि पश्चिमी राजस्थान के 13 जिलों की जीवनरेखा रावी-ब्यास-सतलुज नदी प्रणाली पर टिकी है और इसी परियोजना ने मरुधरा को आर्थिक समृद्धि और हरियाली प्रदान की है। श्री रावत ने स्पष्ट किया कि चूंकि राजस्थान इस प्रणाली के अंतिम छोर पर स्थित है, इसलिए जल वितरण में पारदर्शिता, समयबद्धता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना अनिवार्य है ताकि अंतिम छोर के किसान और नागरिक को उसका उचित हिस्सा मिल सके।
आधुनिक जल प्रबंधन की दिशा में कड़े सुझाव देते हुए श्री रावत ने बांध सुरक्षा को सर्वोपरि बताया और बांधों के अधिकतम भराव स्तर तक जल-संग्रहण के लिए त्वरित वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए फ्लोटिंग सोलर, पम्प्ड स्टोरेज पावर प्लांट, रियल-टाइम डिस्चार्ज मॉनिटरिंग और सैटेलाइट आधारित जल प्रबंधन जैसे तकनीकी नवाचारों को अपनाने का आह्वान किया। मंत्री ने जोर दिया कि डिजिटल डेटा रिकॉर्डिंग और पारदर्शी ऑनलाइन शेयरिंग से राज्यों के मध्य आपसी विश्वास सुदृढ़ होगा। इस गरिमामयी समारोह में पंजाब के जल संसाधन मंत्री श्री बरिंदर कुमार गोयल, हरियाणा की सिंचाई मंत्री श्रीमती श्रृति चौधरी, केन्द्रीय विद्युत सचिव श्री पंकज अग्रवाल और बीबीएमबी अध्यक्ष श्री मनोज त्रिपाठी सहित अन्य उच्चाधिकारी मौजूद रहे, जहां राजस्थान की इस सशक्त पैरवी ने देश के आदर्श जल प्रबंधन मॉडल को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक नई बहस छेड़ दी है।

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