जयपुर। राजस्थान के बारां जिले में अवैध मादक पदार्थ तस्करी के खिलाफ पुलिस ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए एक बड़ी और अनुकरणीय कार्रवाई की है। पुलिस लाइन बारां में तैनात हेड कांस्टेबल शंकरराम को अंतरराज्यीय नशा तस्करों के साथ मिलीभगत और अफीम डोडा चूरा की तस्करी में संलिप्त पाए जाने के बाद तत्काल प्रभाव से राज्य सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। आरोपी पुलिसकर्मी इस गंभीर मामले में नामजद होने के बाद से ही लगातार फरार चल रहा है।

बारां जिला पुलिस अधीक्षक अभिषेक अंदासु ने घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि थाना बारां सदर में 29 अक्टूबर 2025 को दर्ज प्रकरण संख्या 246/2025 के तहत पुलिस ने एक डस्टर कार से 97 किलो 110 ग्राम अवैध अफीम डोडा चूरा बरामद किया था। इस मामले की गहन जांच थाना अटरू द्वारा की गई। अनुसंधान के दौरान तकनीकी विश्लेषण और गिरफ्तार किए गए तस्करों से की गई पूछताछ में पुलिस लाइन बारां में तैनात हेड कांस्टेबल शंकरराम पुत्र किशनाराम की तस्करों के साथ सीधी साठगांठ का खुलासा हुआ। जांच में यह तथ्य प्रमाणित हुआ कि आरोपी हेड कांस्टेबल अपने संपर्कों का उपयोग कर अवैध अफीम डोडा चूरा को नागौर भिजवाने का कार्य करता था।

मामले में अपनी संलिप्तता स्पष्ट होने और कानूनी कार्रवाई की आहट मिलते ही शंकरराम फरार हो गया और तब से ही ड्यूटी से लगातार अनुपस्थित चल रहा है। विभागीय स्तर पर उसे कार्य पर उपस्थित होने के लिए कई नोटिस जारी किए गए, जिनकी तामील के बावजूद उसने अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराई। आरोपी की गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कानूनी प्रक्रिया अपनाते हुए न्यायालय से पुलिस अधिनियम की धारा 37 के तहत गिरफ्तारी वारंट प्राप्त किया गया है और वर्तमान में उसकी सरगर्मी से तलाश जारी है।

इस विभागीय कार्रवाई के संबंध में एसपी अभिषेक अंदासु ने स्पष्ट किया कि पुलिस जैसे अनुशासित बल में इस प्रकार का गंभीर दुराचरण कतई स्वीकार्य नहीं है। आरोपी ने न केवल अपने पद और कर्तव्यों का दुरुपयोग कर अंतरराज्यीय तस्करी में सक्रिय भूमिका निभाई, बल्कि राजस्थान सेवा नियम 1951 के नियम 86 का उल्लंघन करते हुए बिना अनुमति के अनुपस्थित रहकर विभागीय अनुशासनहीनता भी की। यह कृत्य समाज और कानून व्यवस्था के विरुद्ध होने के साथ-साथ विभाग की छवि को भी धूमिल करने वाला है। इन गंभीर परिस्थितियों के मद्देनजर, राजस्थान असैनिक सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं पुनरावेदन) नियम 1958 के नियम 19(II) में निहित शक्तियों का उपयोग करते हुए हेड कांस्टेबल शंकरराम को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। यह कार्रवाई स्पष्ट संदेश देती है कि कानून के रक्षक यदि भक्षक बनेंगे, तो उन्हें विभाग में बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।

Pratahkal Newsroom

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