बांसवाड़ा: गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल श्री बागडे का आह्वान, बेटियों ने फिर लहराया सफलता का परचम
बांसवाड़ा के गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय के सप्तम दीक्षांत समारोह में राज्यपाल श्री हरीभाऊ बागडे ने 33,329 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान कीं। इस समारोह में बेटियों ने बाजी मारते हुए 35 में से 25 स्वर्ण पदक अपने नाम किए। राज्यपाल ने विकसित भारत के लिए प्राचीन ज्ञान परंपरा और कठोर परिश्रम का संदेश देते हुए विद्यार्थियों को राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित किया।

बांसवाड़ा/जयपुर। गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय के आंगन में गुरुवार को भविष्य के निर्माताओं का एक अनूठा संगम देखने को मिला, जहाँ शिक्षा की लौ और राष्ट्र निर्माण के संकल्प ने एक उत्सव का रूप ले लिया। विश्वविद्यालय के माही भवन में आयोजित सप्तम दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राजस्थान के राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री हरीभाऊ बागडे ने इस आयोजन को विद्यार्थियों के नवजीवन में प्रवेश का 'आनंदोत्सव' करार दिया। समारोह के दौरान जब मंच से मेधावी छात्रों के नामों की घोषणा हुई, तो पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इस वर्ष के दीक्षांत समारोह की सबसे गौरवशाली उपलब्धि छात्राओं का दबदबा रही, जहाँ स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले कुल 35 मेधावियों में से 25 छात्राओं ने अपनी मेधा का लोहा मनवाया। राज्यपाल ने इस उपलब्धि की सराहना करते हुए स्पष्ट किया कि शिक्षा ही वह सशक्त माध्यम है, जिससे गरीब, पिछड़े और वंचित समाज को विकास की मुख्य धारा में लाया जा सकता है।
राज्यपाल श्री बागडे ने शिक्षा की गहराई को रेखांकित करते हुए कहा कि प्राथमिक और माध्यमिक स्तर की शिक्षा ही भविष्य का मूल आधार है, जिस पर हमें विशेष ध्यान देना होगा। विकसित भारत के निर्माण का मार्ग प्रतिभाशाली व्यक्तित्वों से होकर गुजरता है और इसके लिए विद्यार्थियों को केवल उपाधि तक सीमित न रहकर आजीवन ज्ञान की खोज में समर्पित रहना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों में आत्मविश्वास और आत्मबल भरने के लिए निरंतर अभ्यास और कठोर परिश्रम को सफलता की अनिवार्य शर्त बताया। उनके संबोधन में भारतीय ज्ञान परंपरा का गौरव भी स्पष्ट रूप से झलका, जहाँ उन्होंने तक्षशिला और नालंदा जैसे प्राचीन विश्वविद्यालयों का स्मरण कराते हुए शैक्षणिक संस्थानों को भारत का स्वर्णिम गौरव पुनः लौटाने का संकल्प लेने को प्रेरित किया।
इस भव्य समारोह में शैक्षणिक उपलब्धियों के आंकड़े भी बेहद प्रभावशाली रहे। राज्यपाल द्वारा कुल 33,329 अभ्यर्थियों को दीक्षा प्रदान की गई, जिनमें स्नातक के 29,397 और स्नातकोत्तर के 3,903 विद्यार्थी शामिल थे। विशेष रूप से उच्च शैक्षणिक अनुसंधान के क्षेत्र में 29 विद्यावाचस्पति (पीएचडी) अभ्यर्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इसके साथ ही, 35 मेधावी छात्र-छात्राओं को उनकी उत्कृष्ट शैक्षणिक सफलता के लिए स्वर्ण पदक से नवाजा गया। कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत और प्रगति का लेखा-जोखा विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर केशव सिंह ठाकुर ने प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने स्वागत उद्बोधन में विश्वविद्यालय की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डाला। यह दीक्षांत समारोह न केवल विद्यार्थियों के लिए एक शैक्षणिक पड़ाव था, बल्कि राष्ट्रभक्ति की भावना के साथ समाज सेवा और आत्म-विकास के संकल्प का एक ऐतिहासिक दस्तावेज भी बन गया।

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