57वें बैंक राष्ट्रीयकरण दिवस पर राजस्थान में निजीकरण के खिलाफ उठा विरोध का स्वर
जयपुर में 57वें बैंक राष्ट्रीयकरण दिवस पर बैंक यूनियन ने निजीकरण के विरोध में शपथ ली और सार्वजनिक बैंकों को बचाने की मांग उठाई।

तस्वीर में जयपुर के तारक भवन में आयोजित बैंक राष्ट्रीयकरण दिवस समारोह के दौरान मंच पर मौजूद लोग नजर आ रहे हैं।
राजस्थान प्रदेश बैंक एम्पलाईज यूनियन की ओर से जयपुर के तारक भवन में 57वां बैंक राष्ट्रीयकरण दिवस समारोह आयोजित किया गया, जिसमें सार्वजनिक-सहकारी बैंक बचाओ, देश बचाओ की शपथ ली गई। समारोह की अध्यक्षता रामगोपाल शर्मा ने की। कार्यक्रम में सार्वजनिक बैंकों, सहकारी बैंकों के कार्मिकों, किसान, आमजन और ग्राहकों ने बड़ीa संख्या में भाग लिया।
समारोह में आरपीबीयू महासचिव महेश मिश्रा, सहकार नेता सूरज भान सिंह आमेरा, सचिव महेश शर्मा, महिला विंग की संयोजिका मेघा मलिक, राहुल पांडे और आर जी शर्मा ने विचार व्यक्त किए।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए महेश मिश्रा ने कहा कि 19 जुलाई 1969 को 14 बड़े बैंकों का राष्ट्रीयकरण एक ऐतिहासिक फैसला था। उन्होंने कहा कि इसके बाद ही बैंकिंग सेवाएं गांव-गांव तक पहुंचीं और किसान-मजदूर वर्ग को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा गया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक और सरकारी सहकारी बैंकों में जमा राशि सुरक्षित है।
सहकार नेता सूरज भान सिंह आमेरा ने कहा कि राष्ट्रीयकृत और सहकारी बैंकों ने कोरोना काल, नोटबंदी और PMC-यस बैंक जैसी आपदाओं में आम जनता की जमा को सुरक्षा दी। उन्होंने कहा कि किसान क्रेडिट कार्ड, मुद्रा लोन, जनधन खाते, फसली ऋण और ग्रामीण सरकारी योजनाओं का लाभ सार्वजनिक और सहकारी बैंक ही जमीनी स्तर तक पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीयकरण आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना 57 साल पहले था।
आमेरा ने निजीकरण की चुनौती का विरोध करते हुए केंद्र सरकार की बैंक निजीकरण नीति को जन विरोधी बताया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक बैंक सार्वजनिक हित में काम करते हैं, जबकि निजी सहकारी बैंक PMC में 10 हजार करोड़ का घोटाला, आदर्श सहकारी बैंक घोटाला और यस बैंक का संकट इसके उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि निजीकरण से बैंकिंग केवल मुनाफे का धंधा बन जाएगी और गरीब, किसान तथा MSME ऋण से वंचित हो जाएंगे।
आयोजन सभा में प्रस्ताव पारित कर बैंक निजीकरण का फैसला तुरंत रद्द करने की मांग की गई और राष्ट्रीयकरण को बचाने की शपथ ली गई। नेताओं ने कहा कि निजीकरण से ग्राहकों, आमजन और बैंक कार्मिकों को सबसे अधिक नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि ठेके पर भर्ती, पुरानी पेंशन बंदी और वेतन समझौते तथा सेवा शर्तों में कटौती से 10 लाख बैंक कर्मचारियों का भविष्य अंधकार में है।
वक्ताओं ने कहा कि निजी अर्बन सहकारी बैंकों में जनता की जमा राशि डूबने, पर्याप्त भर्ती नहीं होने और पैक्स कार्मिकों को 20% आरक्षण नहीं देने से ग्रामीण सहकारी बैंकिंग ऋण व्यवस्था प्रभावित हो रही है। इससे किसान और आम ग्राहक सीधे प्रभावित हो रहे हैं।
सम्मेलन में केंद्र सरकार को पत्र लिखकर बैंक निजीकरण का फैसला वापस लेने, सार्वजनिक और सहकारी बैंकों में तुरंत भर्ती करने, बैंक गबन करने वालों पर कठोर कानून बनाकर कार्रवाई करने, निजी अर्बन सहकारी बैंकों को उदारता से बैंक लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया पर रोक लगाने और सभी निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण करने की मांग करने का निर्णय लिया गया।
कार्यक्रम के अंत में मिठाई वितरण किया गया। राष्ट्रीयकरण जिंदाबाद, निजीकरण बंद करो, जय सहकार - जय किसान - जय भारत के नारों के साथ समारोह संपन्न हुआ। कार्यक्रम में सूरज भान सिंह आमेरा, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, AICBEF एवं उप महासचिव, राजस्थान प्रदेश बैंक एम्पलाइज यूनियन की ओर से जानकारी दी गई।

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