बांदरसिंदरी पुलिस ने केंद्रीय विश्वविद्यालय में चोरी करने वाले बागरिया गिरोह के 4 आरोपियों को पकड़ा
राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय और चुरली में हुई चोरियों का खुलासा करते हुए पुलिस ने गिरोह के सदस्यों से करीब 8.75 लाख रुपये के जेवरात, नकदी और मूल दस्तावेज बरामद किए।

बांदरसिंदरी थाना पुलिस द्वारा राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय परिसर और चुरली गांव में हुई चोरियों के मामले में आरोपियों की निशानदेही पर बरामद किए गए सोने-चांदी के जेवरात, नकदी और पीड़ितों के मूल दस्तावेज।
जयपुर। अजमेर जिला पुलिस अधीक्षक हर्षवर्धन अग्रवाला के दिशा-निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण लालचन्द कायल व वृत्ताधिकारी किशनगढ़ ग्रामीण आयुप वशिष्ठ के सुपरविजन में बांदरसिंदरी थाना पुलिस ने एक बहुत बड़ी कामयाबी हासिल की है। पुलिस टीम ने राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय के स्टाफ क्वार्टर्स और ग्राम चुरली में सिलसिलेवार ढंग से हुई चोरी की संगीन वारदातों का सनसनीखेज पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस कार्रवाई के तहत शातिर बागरिया गिरोह के तीन सक्रिय सदस्यों और विश्वविद्यालय परिसर में रेकी करवाकर वारदात को अंजाम दिलाने वाले एक अंदरूनी सहयोगी कर्मचारी सहित कुल चार आरोपियों को धर-दबोचा है। कानून का शिकंजा कसते हुए पुलिस ने इन शातिर आरोपियों की निशानदेही पर करीब 8,75,900 रुपये मूल्य के सोने-चांदी के जेवरात, नकदी तथा पीड़ितों के मूल दस्तावेज बरामद करने में सफलता पाई है।
इस पूरे घटनाक्रम के अनुसार, वर्ष 2025 के नवंबर-दिसंबर महीने और जनवरी 2026 की रात्रियों में राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय के विभिन्न आवासीय स्टाफ क्वार्टर्स तथा ग्राम चुरली स्थित एक पुश्तैनी मकान को अज्ञात चोरों ने निशाना बनाया था। चोरों ने वहां से भारी मात्रा में सोने-चांदी के जेवरात और नकदी पार कर सनसनी फैला दी थी। कैंपस और आसपास के इलाके में लगातार हो रही इन चोरियों के संबंध में पुलिस थाना बांदरसिंदरी पर संबंधित धाराओं में मुकदमे दर्ज कर गहन अनुसंधान शुरू किया गया था। विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में हुई इन वारदातों की गंभीरता को देखते हुए बांदरसिंदरी थानाधिकारी दयाराम चौधरी के नेतृत्व में एक विशेष पुलिस टीम का गठन किया गया और शातिर चोरों की सरगर्मी से तलाश शुरू की गई।
अनुसंधान के दौरान गठित पुलिस टीम ने तकनीकी विश्लेषण, सीसीटीवी फुटेज और आधुनिक संसाधनों की मदद ली। पुलिस ने विश्वविद्यालय परिसर में निर्माण कार्य कर रही विभिन्न कंपनियों के कर्मचारियों के मोबाइल नंबरों और संदिग्ध बीटीएस टावर लोकेशन का बेहद गहनता से निरीक्षण किया। इस बारीकी से की गई जांच के दौरान कैंपस में ही कार्यरत एक प्राइवेट कंपनी के कर्मचारी नाथूलाल गुर्जर की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) खंगालने पर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ। नाथूलाल गुर्जर का लगातार संपर्क संदिग्ध बागरिया गैंग के गुर्गों से होना पाया गया। इसी बीच पुलिस को एक पुख्ता इनपुट मिला कि पीसांगन थाना पुलिस ने नकबजनी के एक अन्य मामले में बागरिया गैंग के बदमाशों को दबोचा है। इस सूचना पर बांदरसिंदरी थाना पुलिस ने बिना वक्त गंवाए तत्काल वहां पहुंचकर आरोपियों को प्रोडक्शन वारंट के जरिए गिरफ्तार किया और मुखबिरी करने वाले अंदरूनी कर्मचारी नाथूलाल को भी दस्तयाब कर लिया।
थाने लाकर जब बदमाशों से वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक तरीकों से बेहद गहन पूछताछ की गई, तो आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने 38.51 ग्राम सोने के जेवरात, 411.27 ग्राम चांदी के जेवरात, 1,33,000 रुपये की नकद राशि, परिवादिया रतन कंवर व प्रीति चारण के चोरी हुए मूल दस्तावेज तथा वारदात में प्रयुक्त की जाने वाली मोटरसाइकिल को बरामद कर लिया। इस मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान लखन मोग्या (उम्र 24 वर्ष) व नेमा बागरिया (उम्र 42 वर्ष) दोनों निवासी खातोलाई (बांदरसिंदरी), पप्पू बागरिया (उम्र 33 वर्ष) निवासी दूदू और विश्वविद्यालय के भीतर रहकर रेकी करने वाले मुख्य आरोपी नाथूलाल गुर्जर (उम्र 41 वर्ष) निवासी मुण्डोती के रूप में हुई है। इन सभी आरोपियों को न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहां से अदालत के आदेश पर उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है। बांदरसिंदरी पुलिस की इस संपूर्ण और त्वरित कार्रवाई को सफल बनाने में थानाधिकारी दयाराम चौधरी सहित कांस्टेबल अनिल कुमार, भागचन्द, बजरंग लाल, रामसिंह, चालक भोजराज, महिला कांस्टेबल संतरा और बीना धाभाई की अत्यंत सराहनीय भूमिका रही है। पुलिस की इस बड़ी कामयाबी से क्षेत्र में सक्रिय नकबजन गिरोहों की कमर टूट गई है।

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