बालोतरा में वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान के तहत श्रमदान और स्वच्छता कार्यक्रम आयोजित
बालोतरा के रेवाड़ा जैतमाल में मंत्रियों ने लिया भाग, जल स्रोतों के पुनर्जीवन पर दिया जोर।

बालोतरा के रेवाड़ा जैतमाल में आयोजित 'वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान' के दौरान संबोधित करते प्रभारी मंत्री जोराराम कुमावत, साथ में अन्य जनप्रतिनिधि।
बालोतरा। 'वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान' के अंतर्गत शुक्रवार को पंचायत समिति बालोतरा की ग्राम पंचायत रेवाड़ा जैतमाल में आयोजित श्रमदान एवं स्वच्छता कार्यक्रम में जल संरक्षण का प्रबल संदेश गूंजा। कार्यक्रम में प्रभारी मंत्री जोराराम कुमावत और उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री के.के. विश्नोई ने सहभागिता निभाते हुए पर्यावरण सुरक्षा और जनसहभागिता का आह्वान किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की प्रेरणा से आयोजित इस कार्यक्रम की विशेषता जनप्रतिनिधियों की सादगी रही, जहाँ प्रभारी मंत्री जोराराम कुमावत बिना किसी एस्कॉर्ट सुविधा के और उद्योग मंत्री के.के. विश्नोई अपनी इलेक्ट्रॉनिक गाड़ी से सीधे कार्यक्रम स्थल पहुंचे, जिसे देख ग्रामीणों ने उनके सादगीपूर्ण व्यवहार की सराहना की।
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ पीपल पूजन के साथ हुआ। इस अवसर पर प्रभारी मंत्री जोराराम कुमावत, उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री के.के. विश्नोई, सिवाना विधायक हमीर सिंह भायल, पचपदरा विधायक डॉ. अरुण चौधरी एवं भाजपा जिलाध्यक्ष भरत मोदी ने सामूहिक रूप से पूजन कर हरियाली और पर्यावरण संरक्षण का संदेश प्रसारित किया। इसके पश्चात सभी जनप्रतिनिधियों ने रेवाड़ा जैतमाल अमृत सरोवर परिसर में पौधारोपण किया और स्वयं श्रमदान कर आमजन को जल संरक्षण के पुनीत कार्य से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
प्रभारी मंत्री जोराराम कुमावत ने अपने संबोधन में कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मंशा गांवों के समग्र विकास की है, क्योंकि राष्ट्र का विकास गांवों की समृद्धि पर निर्भर है। उन्होंने गंगा दशहरा से विश्व पर्यावरण दिवस तक जारी इस अभियान का उद्देश्य जल संरक्षण, संग्रहण एवं जनजागृति को बताते हुए पारंपरिक जल स्रोतों जैसे तालाब, एनीकट, जोहड़ और कुओं के पुनर्जीवन पर विशेष बल दिया। उन्होंने ‘खेत का पानी खेत में, घर का पानी घर में और गांव का पानी गांव में’ रोकने की व्यवस्था को अनिवार्य बताया और कहा कि जल की बचत ही जल का उत्पादन है। मरुस्थलीय क्षेत्र में बढ़ते तापमान पर चिंता जताते हुए उन्होंने ‘एक पेड़ मां के नाम’ एवं ‘हरियालो राजस्थान’ अभियान के तहत अधिक से अधिक वृक्षारोपण की अपील की।
उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री के.के. विश्नोई ने कहा कि राज्य सरकार पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित कर जल आत्मनिर्भरता की दिशा में कृतसंकल्पित है। उन्होंने कहा कि यह प्रयास न केवल पेयजल संकट का स्थाई समाधान करेगा, बल्कि भूजल स्तर में भी उल्लेखनीय वृद्धि करेगा। सिवाना विधायक हमीर सिंह भायल ने भारतीय संस्कृति में जल स्रोतों के महत्व को रेखांकित करते हुए इसे पुनर्जागरण का अभियान बताया। पचपदरा विधायक डॉ. अरुण चौधरी ने जानकारी दी कि रेवाड़ा जैतमाल अमृत सरोवर कभी 40 गांवों की प्यास बुझाने का केंद्र था, जिसे अब अवैध खनन और जल आवक में कमी से मुक्त कर सरकार पुनर्जीवित कर रही है ताकि रोजगार के नए अवसर सृजित हो सकें। भाजपा जिलाध्यक्ष भरत मोदी ने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को सांस्कृतिक परंपरा बताते हुए समाज के सक्रिय सहयोग का आह्वान किया। कार्यक्रम में अतिरिक्त जिला कलक्टर भुवनेश्वर सिंह चौहान, अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी हीराराम कलबी सहित बड़ी संख्या में अधिकारी एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।

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